भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले ही दिन कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। पीटीआई सूत्रों के अनुसार, बैठक के पहले सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और यूएई के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति तब गंभीर हो गई जब दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, जिसे शांत कराने के लिए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को हस्तक्षेप करना पड़ा।
ईरान का अमेरिका और इजरायल पर हमला
अपने संबोधन में ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने खुद को 'अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद' का शिकार बताया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की स्पष्ट रूप से निंदा करें। अराघची ने कहा, "ब्रिक्स को पश्चिमी आधिपत्य और अमेरिका की उस भावना के खिलाफ खड़ा होना चाहिए, जिसमें वह खुद को सजा से ऊपर मानता है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स को एक न्यायपूर्ण और मानवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने का मुख्य स्तंभ बनना चाहिए।
ईरान बनाम UAE: आमने-सामने
बैठक में तनाव तब बढ़ा जब यूएई के मंत्री अल मरार ने अपने बयान में सीधे तौर पर ईरान का नाम लिया। उन्होंने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी आलोचना की। इसके जवाब में अराघची ने यूएई पर आरोप लगाया कि वह अपनी धरती का उपयोग अमेरिका को ईरान पर हमले करने के लिए करने दे रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और यूएई के बीच ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर विवाद चल रहा है। इसी विवाद के कारण ब्रिक्स अब तक पश्चिमी एशिया संकट पर कोई साझा बयान जारी करने में विफल रहा है।
ब्रिक्स की एकता पर सवाल?
ब्रिक्स आम सहमति के सिद्धांत पर काम करता है। ऐसे में दो महत्वपूर्ण सदस्यों, ईरान और यूएई के बीच बढ़ती खाई समूह की एकता के लिए खतरा बन सकती है। भारत द्वारा आयोजित यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ब्लॉक पश्चिमी एशिया संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और अमेरिका की नई व्यापार व टैरिफ नीतियों के आर्थिक परिणामों से जूझ रहा है। 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद ब्रिक्स में अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत इन मतभेदों को सुलझाकर एक 'संयुक्त घोषणापत्र' जारी करवा पाएगा।
