BCI Lawyers Assault Case: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे वकीलों से कथित मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में आरोप लगाया कि BCI गेट के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे वकीलों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने और BCI परिसर की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की।
प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि BCI चेयरमैन ने मीडिया में बयान दिया था कि कुछ 'लीगल कॉकरोच' वहां आए थे और उनके समर्थकों ने उन्हें पीटकर वहां से भगा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाओं से “बार काउंसिल के चेयरमैन की ओर से कानूनविहीनता को बढ़ावा दिया जा रहा है।”
सुप्रीम कोर्ट ने HC जाने की दी छूट
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वकीलों को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दे दी। यानी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की CBI जांच या CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किया और याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का रास्ता दिया।
'वकीलों को प्रदर्शन करने पर पीटा नहीं जा सकता'
प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर कुछ वकील खड़े होकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उनके साथ मारपीट नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में दखल देने और BCI कार्यालय की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की। साथ ही CBI जांच की मांग भी रखी।
जस्टिस बागची बोले- प्रदर्शन की जगह कानूनी रास्ता क्यों नहीं अपनाया?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक समाज है। अगर BCI के कामकाज को लेकर शिकायत थी, तो प्रदर्शन करने की जगह कोर्ट का रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया?
जस्टिस बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक क्षेत्र में कुप्रशासन से जुड़े मामलों के लिए नियम और शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था तय की है। यह अनुशासन का मामला है और शिकायत दूर करने के लिए अच्छी तरह से तय तंत्र मौजूद है।
इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर कुछ वकील प्रदर्शन के लिए खड़े हैं, तो उन्हें पीटा नहीं जा सकता। जस्टिस बागची ने दोहराया कि कानून में शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था बनाई गई है और उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
CJI बोले- BCI से जुड़ा कोई मुद्दा SC ने नहीं सुना हो, ऐसा नहीं
CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि 'BCI से जुड़ा ऐसा कोई पहलू नहीं है, जिसे इस कोर्ट ने कभी सुना न हो।' जस्टिस बागची ने भी कहा कि वकीलों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन शिकायतों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पष्ट और क्रमबद्ध व्यवस्था तय कर रखी है।
प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर कोर्ट चाहता है कि वे हाईकोर्ट जाएं, तो वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे। इस पर CJI ने कहा कि कई बार लोग ऐसा व्यवहार करने लगते हैं जैसे कोर्ट में संस्थागत पक्षपात है, जबकि कोर्ट हर मामले को सुनता है।
