नॉर्थ ईस्ट के सूबे के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ किया है कि असम कभी भी म्यांमार का हिस्सा नहीं था। शनिवार (नौ दिसंबर, 2023) को उनकी यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के दावे को लेकर आई।
मीडिया की ओर से पूछे गए सवालों को लेकर उन्होंने बताया- देखिए, उन्हें इस बारे (असम के इतिहास) में कोई ज्ञान नहीं है। वह कुछ बातें न ही बोलें...यही सही है। असम कभी भी म्यांमार का हिस्सा नहीं था। वहां से असम में लोग आए थे और एक समय पर वहां झड़प भी हुई थी, जो कि एक कुछ समय के लिए थी। बस इनता ही असम का म्यांमार से संपर्क है। अन्यथा मैंने तो ऐसा कोई डेटा नहीं देखा जो बताता हो कि असम म्यांमार का हिस्सा था।
दरअसल, सिटिजनशिप एक्ट 1955 के सेक्शन छह ए से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सिब्बल की ओर से टिप्पणी की गई थी, ''असम म्यांमार का हिस्सा था।''
हालांकि, सिब्बल की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई दलील पर असम सरकार के प्रवक्ता पीयूष हजारिका ने कहा- असम के इतिहास में किसी भी समय हम म्यांमार का हिस्सा नहीं थे। महाभारत के समय से और उससे पहले, हम दृढ़ता से भारतवर्ष का अभिन्न अंग रहे हैं।
