गुंडई और लफंगई बंद करनी है तो BJP के हेडक्वार्टर पर बुल्डोजर चला दो, मनीष सिसोदिया ने कही ये बात

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 20, 2022, 04:59 PM IST

दिल्ली के डिप्टी सीएम ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता या तो लंफगई करते देखे जाएंगे या लफंगों और गुंडों को मंच खड़े होकर सम्मान करते देखे जाएंगे। बीजेपी के हेडक्वार्टर पर बुल्डोजर चला दो। लफंगों के हेडक्वार्टर पर अपने आप बुल्डोजर चल जाएगा।

गुंडई और लफंगई बंद करनी है तो BJP के हेडक्वार्टर पर बुल्डोजर चला दो, मनीष सिसोदिया ने कही ये बात
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दिल्ली के जहांगीरपुरी में दंगे के आरोपियों के अवैध निर्माण पर बुल्डोजर चलने के बाद आम आदमी पार्टी और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बुधवार को बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर देश में गुंडई और लफंगई बंद करनी है तो इसका सबसे सरल और सबसे बढ़िया तरीका है कि बीजेपी के हेडक्वार्टर पर बुल्डोजर चला दो। लफंगों के हेडक्वार्टर पर अपने आप बुल्डोजर चल जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी कहीं भी स्कूल की बात करती नजर नहीं आती है। कॉलेज की बात करती नजर नहीं आएगी। रोजगार की बात करती नजर नहीं आएगी। महंगाई कम करने के लिए बात करती नजर नहीं आएगी। केवल गुंडई की बात करती नजर आएगी। लफंगई की बात करती नजर आएगी। 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता या तो लंफगई करते देखे जाएंगे या लफंगों और गुंडों को मंच खड़े होकर सम्मान करते देखे जाएंगे। आजकल बीजेपी की तरफ से देश भला करने के लिए कोई न्यूज नहीं है। देश की अगली पीढ़ी को पढ़ाने के लिए कोई काम नहीं है। उनको इलाज करवाने के लिए कोई काम नहीं है। उनको नौकरी दिलवाने के लिए कोई काम नहीं है। महंगाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। जिधर देखों हर तरफ भारतीय जनता पार्टी गंडई और लंफगई का नाम बन गई है। बीजेपी आराजकता का महौल बनाकर रखा हुआ है।

उन्होंने कहा कि पिछले 8 साल से बीजेपी देश की सत्ता में है। इन्होंने स्कूल के लिए कुछ नहीं किया। अस्पतालों के लिए, रोजगार के लिए कुछ नहीं किया। केवल और केवल लड़ाई झगड़े गुंडई बढ़ाने, हर तरफ मारपीट करवाने, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करवाने, इनको बढ़ावा दिया है। ट्रैक्टर से कुचलवाने और बसों से कुचलवाने को बढ़ावा दिया है। आजकल देशभर में आराजकता और गुंडई का माहौल है इसके लिए पूरी तरह से बीजेपी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा जो देश पढ़े लिखे की पहचान दिलाना चाहता है, जो ये चाहता है कि पढ़ाई लिखाई की बात हो, वे इससे निराश हैं।

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