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नेस्ले इंडिया के शिशु आहार प्रोडक्ट्स पर उठे सवाल, कंपनी ने FSSAI के आरोपों को किया खारिज, बोली- सभी नियम का किया पालन

FSSAI ने शिशु आहार (नैन एक्सेला प्रो, लैक्टोजेन प्रो) के विज्ञापनों में भ्रामक दावों और बायोटिन की कमी पर नेस्ले इंडिया पर कानूनी कार्रवाई की, जबकि कंपनी ने सभी नियमों के पालन का दावा किया है।

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शिशु आहार प्रोडक्ट्स पर FSSAI सख्त, नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन मामले दर्ज; कंपनी बोली– सभी नियम माने

Photo : iStock

भारत की प्रमुख खाद्य उत्पाद निर्माता कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) एक बार फिर देश के खाद्य सुरक्षा नियामक के निशाने पर आ गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया के तीन प्रमुख शिशु पोषण उत्पादों (Infant Nutrition Products) में नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। नियामक द्वारा तीन अलग-अलग निर्णयन (Adjudication) मामले दर्ज किए जाने के बाद, शुक्रवार को शेयर बाजार (BSE) में नेस्ले इंडिया के शेयरों में गिरावट देखी गई। दूसरी तरफ, नेस्ले इंडिया ने FSSAI के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उसके सभी शिशु उत्पाद और उनके डिब्बों पर दिए गए लेबल पूरी तरह से वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं तथा सरकारी नियमों का शत-प्रतिशत पालन करते हैं।

FSSAI की जांच में क्या आया सामने?

खाद्य सुरक्षा नियामक (FSSAI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'इंस्टाग्राम' पर एक आधिकारिक संदेश जारी कर बताया कि उसने ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध नेस्ले के शिशु आहार उत्पादों और उनके प्रचार-प्रसार की गहन जांच की थी। इस दौरान तीन मुख्य उत्पादों नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 (NAN Excella Pro Stage 1), लैक्टोजेन प्रो 1 (Lactogen Pro 1) और एक फॉलो-अप फॉर्मूला (Follow-up Formula) में कमियां और नियमों का उल्लंघन पाया गया।

नियामक ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं:-

  • विज्ञापनों और दावों पर आपत्ति:- FSSAI ने नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के लेबल पर लिखे '5HMO' और 'व्हे प्रोटीन' (Whey Protein) से जुड़े दावों को भ्रामक माना। इसके साथ ही, लैक्टोजेन प्रो 1 के लेबल पर लिखे इस दावे पर भी सवाल खड़े किए कि इसका 'व्हे प्रोटीन' आसानी से पच जाता है।
  • पोषण की कमी:- प्रयोगशाला जांच के दौरान नेस्ले के 'फॉलो-अप फॉर्मूला' के एक नमूने में 'बायोटिन' की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई। संदर्भ प्रयोगशाला (Referral Laboratory) में दोबारा जांच कराने पर भी नमूना 2020 के नियमों में निर्धारित बायोटिन की आवश्यकता के अनुरूप नहीं निकला।

किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई?

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक खाद्य सुरक्षा नियामक के अनुसार, नेस्ले इंडिया के ये उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) नियम, 2020 के नियम 4(2) का उल्लंघन करते हैं। यह नियम कंपनियों को शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार के प्रचार संबंधी दावे करने या सामग्री जारी करने से रोकता है। इसके अतिरिक्त, ये उत्पाद शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु खाद्य (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के भी खिलाफ पाए गए हैं। यह ऐतिहासिक कानून नवजात शिशुओं के आहार के किसी भी प्रकार के विज्ञापन या व्यावसायिक प्रचार पर सख्त प्रतिबंध लगाता है, ताकि माताओं को स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके और फॉर्मूला मिल्क के आक्रामक प्रचार को रोका जा सके।

नेस्ले इंडिया का पक्ष: 'हमारे सभी दावे वैज्ञानिक और नियमबद्ध'

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक FSSAI द्वारा कानूनी कदम उठाए जाने के कुछ ही घंटों बाद नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कंपनी का रुख साफ किया। कंपनी ने कहा कि नैन एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो जैसे उत्पादों और उनके पैकेजिंग लेबल को एफएसएसएआई की ही विशेषज्ञ समिति द्वारा पूर्व में मंजूरी दी गई थी। नियामक के नोटिस के जवाब में कंपनी ने अधिकारियों को अपना विस्तृत स्पष्टीकरण फिर से सौंप दिया है। कंपनी का कहना है कि डिब्बों के लेबल पर लिखे सभी दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं और पूरी तरह सच हैं। नेस्ले इंडिया ने दोहराया कि वह देश के सभी लागू कानूनों, गुणवत्ता मानकों और पैकेजिंग घोषणाओं का सख्ती से पालन करती है। कंपनी ने कहा कि वह उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य सुरक्षा के अभियानों में FSSAI का सहयोग करना जारी रखेगी।

बाजार पर असर और पुराना इतिहास

इस कानूनी कार्रवाई की खबर बाहर आते ही शेयर बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई। शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में नेस्ले इंडिया के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई और इंट्राडे कारोबार में शेयर का भाव करीब 2.8% तक नीचे गिर गया। गौर हो कि FSSAI और नेस्ले इंडिया के बीच यह दूसरा सबसे बड़ा विवाद है। इससे पहले साल 2015 में खाद्य सुरक्षा नियामक ने सीसे (Lead) की मात्रा अधिक होने और लेबल पर स्वाद बढ़ाने वाले एमएसजी (MSG) संबंधी चिंताओं के कारण नेस्ले के लोकप्रिय उत्पाद 'मैगी इंस्टेंट नूडल्स' (Maggi) पर देशभर में प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, बाद में कानूनी लड़ाई और अधिकृत प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता साबित होने के बाद मैगी से प्रतिबंध हटा लिया गया था और उत्पाद ने बाजार में वापसी की थी। फिलहाल, FSSAI की इस नई कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों के जवाब-सवाल जारी हैं और मामला न्यायाधिकरण (Adjudication) के समक्ष पेंडिंग है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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