Nupur Sharma : पैगंबर विवाद मामले में नूपुर शर्मा को बड़ी राहत, SC ने 10 अगस्त तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 19, 2022, 04:17 PM IST

Nupur Sharma : पैगंबर मोहम्मद विवाद मामले में भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने नूपुर की गिरफ्तारी पर 10 अगस्त तक रोक लगा दी है। साथ ही जिन राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Nupur Sharma : पैगंबर विवाद मामले में नूपुर शर्मा को बड़ी राहत, SC ने 10 अगस्त तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई

Nupur Sharma : पैगंबर मोहम्मद विवाद मामले में भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने नूपुर की गिरफ्तारी पर 10 अगस्त तक रोक लगा दी है। साथ ही जिन राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त तक होगी। नूपुर के खिलाफ यदि नई प्राथमिकी दर्ज होती भी है तो उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं होगी। नूपुर शर्मा के वकील ने कोर्ट से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिली हैं। याचिका में गिरफ्तारियां पर रोक लगाने एवं और नए एफआईआर दर्ज न करने की मांग की गई थी।

बता दें कि आठ अलग-अलग राज्यों में नूपुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं। कोलकाता पुलिस ने नूपुर के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी एफआईआर एक साथ मिलाने पर राज्यों से उनका जवाब मांगा है। 

नूपुर ने केस ट्रांसफर की अर्जी लगाई थी
 बता दें कि इससे पहले भी उन्होंने गिरफ्तारी से बचने और केस ट्रांसफर की अर्जी लगाई थी। लेकिन 1 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कड़े शब्दों में उनकी आलोचना की थी। धमकियों के ताजा मामलों को पेश करते हुए उन्होंने एक बार फिर अर्जी दाखिल की है।  उनकी नई याचिका पर कल वही बेंच सुनवाई करेगी - जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत - जिन्होंने 1 जुलाई को उनकी आलोचना की थी।

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रेप और मौत की धमकी का हवाला
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी "अप्रत्याशित और कड़ी आलोचना" के बाद "नए" खतरों का हवाला देते हुए, निलंबित भाजपा नेता नुपुर शर्मा ने फिर से अपनी संभावित गिरफ्तारी को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और पैगंबर मोहम्मद पर उनकी टिप्पणियों पर पूरे भारत में दर्ज नौ मामलों को क्लब करने की अपील की है। ताजा याचिका में उनका तर्क है कि 1 जुलाई की आलोचना के बाद से कुछ असामाजिक तत्वों ने बलात्कार और मौत की धमकी दी है। उसने अपनी पहले की याचिका में भी इस तरह की धमकियों का हवाला दिया था। लेकिन अदालत ने टिप्पणी की थी, उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है या वह सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है? यह शर्मनाक है। उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।

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