हर साल 30 जनवरी यानी आज ही के दिन विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है। कुष्ठ रोग, वैश्विक स्तर पर एक गंभीर बीमारी है जिसका समय रहते इलाज कराना बेहद जरूरी है। पहले की तुलना में अब लोगों में कुष्ठ रोग को लेकर जागरूकता बढ़ी है जिसके चलते अब इसके मामले कम आते हैं। कुष्ट रोग के मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। कुष्ट रोग के मामले 1980 के दशक में 50 लाख से अधिक थे जो साल 2020 में घटकर 1.30 लाख के करीब पहुंचे हैं। कुष्ठ रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने और समाज में इसकी लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से हर साल 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाया जाता है।
क्या है कुष्ठ रोग और कैसे फैलती है ये बीमारी?
कुष्ठ रोग एक संक्रामक रोग है जो विशेषकर हाथ-पैर या त्वचा पर गंभीर विकृत घाव का कारण बनता है। यह Mycobacterium Leprae नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। कुष्ट रोग एक ऐसी बीमारी है जो सदियों से चली आ रही है, लेकिन यह बहुत ज्यादा संक्रामक नहीं होता है। ये बीमारी तब दूसरों को फैलती है जब कोई व्यक्ति कुष्ट रोग से पीड़ित मरीजों की नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों की चपेट में आता है। वयस्कों की तुलना में बच्चों में कुष्ठ रोग होने की आशंका अधिक होती है। ऐसे में बच्चों को कुष्ट रोग से पीड़ित मरीजों के नजदीक ना जाने दें।
कुष्ठ रोग के लक्षण और कारण
कुष्ट रोग के रोगों के लक्षणों की बात करें तो मुख्य रूप से त्वचा में घाव, गांठ या उभार हो सकते हैं। घावों में पीलापन अधिक देखा जाता है। रोग बढ़ने पर भौहें/पलकें गायब होने, दर्द, लालिमा और जलन की समस्या महसूस होती है। कुष्ट रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्राई (एम. लेप्री) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
कुष्ठ का उपचार
कुष्ट रोग का इलाज संभव है। कुष्ट रोग से पीड़ित मरीज को एंटीबायोटिक्स दिया जाता है। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने में काफी लंबा समय लगता है। इस बीमारी का कम से कम 6 महीने से एक साल तक इलाज चल सकता है। रोग का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। आंकड़ों की बात करें तो कुष्ट रोग से पीड़ित अब तक 16 मिलियन (1.6 करोड़) लोग ठीक हो चुके हैं।
घटी मरीजों की संख्या
कुष्ट रोग के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कुष्ट रोग के ज्यादातर मामले अफ्रीका और एशिया में देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका में हर साल लगभग 100 लोगों में इसका निदान किया जा रहा है। भारत में भी कुष्ठ बड़ी समस्या रही है। यहां साल 2014-15 में कुष्ठ रोग के 1,25,785 मामलों की तुलना में 2021-22 में यह घटकर 75,394 रह गई है।
विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2024 की थीम
विश्व कुष्ठ दिवस 2024 का थीम है “कुष्ठ रोग को हराओ” है।
