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दिल्ली में 44 साल से कम उम्र के लोग क्यों बन रहे हैं कैंसर का सबसे बड़ा शिकार, सामने आई चौंकाने वाली वजह

  • Authored by: Vineet
  • Updated Feb 3, 2026, 03:05 PM IST

Delhi Cancer Cases: दिल्ली में कैंसर अब सिर्फ बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 44 साल से कम उम्र के लोग तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। आखिर क्यों कम उम्र में बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले? इस लेख में जानिए दिल्ली में कैंसर के पीछे जिम्मेदार प्रदूषण, लाइफस्टाइल, तंबाकू और देरी से जांच जैसी वैज्ञानिक वजहें।

दिल्ली में कैंसर से लोगों की मौत का बड़ा खुलासा

दिल्ली में कैंसर से लोगों की मौत का बड़ा खुलासा (Istock)

Delhi Cancer Cases: दिल्ली में 44 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हाल ही में एक सरकारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि पिछले दो दशकों में कैंसर से होने वाली मौतों में से लगभग 33 प्रतिशत युवा वर्ग में हो रही हैं। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर इस समस्या के पीछे क्या कारण हैं। आइए, जानते हैं कि दिल्ली में युवा लोग कैंसर का सबसे बड़ा शिकार क्यों बन रहे हैं।

कैंसर का बढ़ता ग्राफ

पिछले दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 2005 में 2,000 मौतों से लेकर 2024 में 7,400 मौतों तक का सफर बेहद चौंकाने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि से तीन गुना अधिक है।

कैंसर के प्रकार और जोखिम कारक

महिलाओं में, 25 से 44 साल की उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की मौतें अधिक होती हैं। वहीं, पुरुषों में फेफड़ों और मौखिक गुहा के कैंसर की दर अधिक है। डॉ. रमन नारंग के अनुसार, तंबाकू और पान का उपयोग और वायु प्रदूषण जैसे कारक इस समस्या के मुख्य कारण हैं।

देर से निदान की समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर मामलों में कैंसर का देर से निदान होने के कारण युवा वयस्कों में मृत्यु दर बढ़ रही है। कई लोग लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि वे कैंसर के लिए 'बहुत युवा' हैं।

आक्रामक कैंसर का बढ़ता प्रचलन

कई मामलों में, युवा उम्र के साथ कैंसर की अधिक आक्रामक प्रजातियां देखी जा रही हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में, युवा महिलाओं में उच्च-ग्रेड ट्यूमर और अधिकतर HER2-पॉजिटिव या ट्रिपल-नेगेटिव कैंसर के मामलों की पहचान की गई है।

जागरूकता की कमी

कैंसर के लक्षणों के प्रति जागरूकता की कमी भी एक बड़ी समस्या है। युवा वयस्क अक्सर चेतावनी संकेतों को सामान्य मान लेते हैं, जैसे कि गांठें, अनियमित रक्तस्राव या वजन में अप्रत्याशित कमी।

समाधान और उपाय

इस समस्या का समाधान केवल जागरूकता बढ़ाने और प्रारंभिक स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को लागू करने से ही संभव है। डॉक्टरों का सुझाव है कि हमें जीवनशैली में सुधार लाना चाहिए और कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए।

दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों की दर चिंताजनक है, लेकिन सही जानकारी और समय पर चिकित्सा सहायता से इसे रोका जा सकता है।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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