जब किसी को हार्ट अटैक आता है तो उस वक्त हर सेकंड कीमती होता है। कई बार लोग सीने में दर्द या भारीपन को गैस, एसिडिटी या थकान समझकर कुछ देर इंतजार करते रहते हैं। यही देरी खतरनाक हो सकती है। अगर अचानक सीने में दबाव, जकड़न या दर्द हो और साथ में सांस फूलना, ठंडा पसीना, मितली, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। दर्द हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक भी जा सकता है।
डॉ. अमित खंडेलवाल (डायरेक्टर एवं एचओडी, कार्डियोलॉजी, पारस हेल्थ उदयपुर) कहते हैं कि हार्ट अटैक में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उनका कहना है कि लक्षण हल्के हों या कुछ देर बाद कम हो जाएं, तब भी उन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
सबसे पहले तुरंत मेडिकल मदद लें
सीने में अचानक दर्द या दबाव महसूस हो तो सबसे पहला काम इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेना है। एम्बुलेंस उपलब्ध हो तो उसका इस्तेमाल करना बेहतर है। इसमें ट्रेंड मेडिकल टीम रास्ते में ही जरूरी मदद शुरू कर सकती है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए। न ही उसे पैदल चलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी मेहनत करने दें।
मरीज को आराम से रखें
मरीज को कम्फर्टेबल पोजिशन में बिठाएं या लिटाएं। उसे अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाएं। उसे अकेला न छोड़ें और उसकी हालत पर नजर रखें।
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डॉ. असीत खन्ना (डायरेक्टर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, यशोदा मेडिसिटी) कहते हैं कि अचानक सीने में तेज दर्द, भारीपन या दबाव के साथ पसीना, सांस लेने में परेशानी, चक्कर या शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलता दर्द हो, तो इसे गैस या सामान्य दर्द समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए।
एस्पिरिन अपनी मर्जी से न दें
कुछ परिस्थितियों में हार्ट अटैक के शक में एस्पिरिन दी जा सकती है, लेकिन इसे हर मरीज को अपनी तरफ से देना सही नहीं है। डॉ. खन्ना के मुताबिक, अगर मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है, ब्लीडिंग की समस्या नहीं है और डॉक्टर ने इसे लेने से मना नहीं किया है, तो मेडिकल हेल्प की सलाह के अनुसार एस्पिरिन दी जा सकती है। इसके अलावा अपनी तरफ से कोई दूसरी दवा देने से बचना चाहिए।
मरीज बेहोश हो जाए तो क्या करें?
अगर मरीज अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो या सिर्फ हांफ रहा हो, तो स्थिति गंभीर है। ऐसे में तुरंत सीपीआर शुरू करना चाहिए। अगर आसपास एईडी उपलब्ध है, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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दर्द कम हो जाए तो भी खतरा खत्म नहीं
हार्ट अटैक के लक्षण कुछ समय बाद कम हो जाएं, तब भी अस्पताल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती लक्षण कभी-कभी बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसलिए सीने में अचानक असामान्य दर्द या दबाव को नजरंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
तो कुल मिलाकर एक्सपर्ट्स की मानें तो हार्ट अटैक में हर सेकंड का महत्व होता है। जल्दी मेडिकल मदद मिलने से जांच और जरूरी इलाज जल्द शुरू हो सकता है। ऐसे में घबराने के बजाय तुरंत मदद लेना और मरीज को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी कदम है।
