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हर समय ठंडे रहते हैं हाथ-पैर? डॉक्टर कुणाल सूद से जानें खराब ब्लड सर्कुलेशन के 4 मुख्य कारण

डॉ. कुणाल सूद ने ऐसी 4 प्रमुख मेडिकल कंडीशंस के बारे में बताया है, जो हमारे ब्लड सर्कुलेशन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।

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हर समय ठंडे रहते हैं हाथ-पैर? डॉक्टर से जानें खराब ब्लड सर्कुलेशन के 4 मुख्य कारण (Photo: istock)

मौसम चाहे कड़कड़ाती ठंड का हो या फिर गर्मियों के दिन, क्या आपके हाथ-पैर हर वक्त बर्फ जैसे ठंडे बने रहते हैं? अगर हां और आप इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं तो ये आपकी गलती है। प्रसिद्ध फिजिशियन डॉ. कुणाल सूद के अनुसार, हर समय हाथ और पैरों का ठंडा रहना शरीर में धीमे या खराब रक्त संचार का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है कि शरीर के दो हिस्सों तक खून का प्रवाह सही से नहीं हो पा रहा है।

डॉ. कुणाल सूद ने ऐसी 4 प्रमुख मेडिकल कंडीशंस के बारे में बताया है, जो हमारे ब्लड सर्कुलेशन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं:

रेनॉड्स फिनोमोनॉन

रेनॉड्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें ठंड या मानसिक तनाव के संपर्क में आते ही हाथों और पैरों के छोटे ब्लड वेसेल्स अचानक सिकुड़ जाते हैं। इस वजह से उन हिस्सों तक खून का प्रवाह अस्थायी रूप से बेहद कम हो जाता है। इसके कारण उंगलियों का रंग पहले सफेद, फिर नीला और खून की वापसी पर लाल हो जाता है।

पेरीफेरल आर्टरी डिजीज

पेरीफेरल आर्टरी डिजीज एक गंभीर स्थिति है जिसमें पैरों और हाथों तक खून ले जाने वाली धमनियों में फैट या कोलेस्ट्रॉल की परत जम जाती है। इसके कारण धमनियां संकरी हो जाती हैं और पैरों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता। हाथ-पैर ठंडे रहने के अलावा, थोड़ा चलने पर ही पैरों में ऐंठन या तेज दर्द होना PAD का बड़ा लक्षण है।

एनीमिया ( आयरन की कमी)

जब शरीर में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है, तो उसे एनीमिया कहते हैं। हीमोग्लोबिन का मुख्य काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर के अंगों तक पहुंचाना होता है। जब शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं बनता, तो शरीर दिल और दिमाग को गर्म रखने को प्राथमिकता देता है। इसके चलते हाथ और पैरों तक पर्याप्त गर्मी और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

डायबिटीज और न्यूरोपैथी

लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल हाई रहने से शरीर की नसों और ब्लड वेसेल्स को भारी नुकसान पहुंचता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। नसें डैमेज होने के कारण पैरों में खून का बहाव सुस्त पड़ जाता है, जिससे पैर हमेशा ठंडे महसूस होते हैं। साथ ही, पैरों में चींटियां काटने जैसी झनझनाहट भी बनी रहती है।

कब कराएं जांच?

डॉ. कुणाल सूद कहते हैं कि अगर आपके हाथ-पैर ठंडे रहने के साथ-साथ उंगलियों का रंग बदलता है, त्वचा में घाव या अल्सर बनने लगते हैं, अथवा सुन्नता और चलने में दर्द होता है, तो इसे बिल्कुल अनदेखा न करें। डॉक्टर से संपर्क करके अपना लिपिड प्रोफाइल, हीमोग्लोबिन और ब्लड शुगर टेस्ट जरूर करवाएं। सही समय पर लाइफस्टाइल में बदलाव और डॉक्टरी परामर्श से ब्लड सर्कुलेशन को सुधारा जा सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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