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खरमास में क्यों बदल जाता है खानपान, उड़द और राई से परहेज के पीछे क्या हैं कारण

  • Authored by: Vineet
  • Updated Dec 21, 2025, 11:46 AM IST

Kharmas Diet In Hindi: क्या आपने कभी सोचा है कि खरमास के दौरान खानपान में बदलाव क्यों जरूरी माना जाता है, क्यों इस समय उड़द की दाल और राई से परहेज करने की सलाह दी जाती है? आज के लेख में जानिए खरमास और मलमास से जुड़े धार्मिक नियम, आयुर्वेदिक कारण और सेहत से जुड़ी वैज्ञानिक सोच।

खरमास में क्यों बदल जाता है खानपान

खरमास में क्यों बदल जाता है खानपान (PC - Pulse AI)

Kharmas Diet In Hindi: हिंदू पंचांग में खरमास को एक खास समय माना जाता है, जब न सिर्फ शुभ कार्यों पर रोक लगती है बल्कि खानपान में भी बदलाव की परंपरा है। अक्सर घर के बड़े कहते हैं कि इस दौरान कुछ चीजें नहीं खानी चाहिए, खासकर उड़द की दाल और राई। लेकिन क्या ये सिर्फ धार्मिक मान्यताएं हैं या इसके पीछे सेहत और आयुर्वेद से जुड़ी वजहें भी हैं? इस लेख में हम खरमास के खानपान नियमों को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि परंपरा के साथ-साथ उसकी वैज्ञानिक सोच भी साफ हो सके।

क्या है खरमास और क्यों माना जाता है खास समय

खरमास उस अवधि को कहा जाता है जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है। शास्त्रों के अनुसार यह समय साधना, संयम और आत्मचिंतन का होता है। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। इसी सोच के साथ खानपान को भी हल्का और सात्विक रखने की परंपरा चली आ रही है, ताकि शरीर और मन दोनों शांत रहें।

खरमास में खानपान बदलने की धार्मिक सोच

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भारी, तामसिक और ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजों से बचना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा भोजन शरीर में आलस्य और असंतुलन पैदा कर सकता है, जो साधना और संयम के भाव के खिलाफ जाता है। इसलिए सादा और सुपाच्य खाना ही बेहतर माना गया है।

उड़द की दाल से परहेज क्यों

शास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में उड़द की दाल को भारी और गर्म तासीर वाला बताया गया है। यह पचने में समय लेती है और शरीर में कफ बढ़ा सकती है। खरमास के दौरान जब पाचन अग्नि कमजोर मानी जाती है, तब उड़द का सेवन गैस, अपच और भारीपन की समस्या बढ़ा सकता है।

राई क्यों मानी जाती है वर्जित

राई यानी सरसों भी तेज और उष्ण प्रकृति की होती है। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में गर्मी बढ़ाती है। खरमास में इसका सेवन त्वचा, पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकता है। इसी वजह से इस समय राई से बनी चीजों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद क्या कहता है

आयुर्वेद मानता है कि मौसम और सूर्य की स्थिति का सीधा असर हमारी पाचन शक्ति पर पड़ता है। खरमास में पाचन कमजोर हो सकता है, इसलिए हल्का, सात्विक और आसानी से पचने वाला भोजन ही शरीर के लिए सही रहता है। उड़द और राई जैसे पदार्थ इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

आज के समय में इन नियमों की अहमियत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी ये नियम हमें अपने शरीर को समझने का मौका देते हैं। अगर हम इस दौरान हल्का खाना खाएं, तला-भुना कम करें और पारंपरिक समझ को अपनाएं, तो सेहत को फायदा मिल सकता है। परंपरा और विज्ञान, दोनों का यही संदेश है - संयम ही सबसे बड़ी कुंजी है।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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