हेल्थ

Perez Hilton की घटना ने बढ़ाई चिंता, आखिर खुद को नुकसान क्यों पहुंचाते हैं लोग?

Self Harm Mental Health: आत्म-हानि को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह कई बार भावनाओं के दर्द का संकेत हो सकती है जिसे व्यक्ति अकेले संभाल नहीं पा रहा होता है।

Image

आखिर खुद को नुकसान क्यों पहुंचाते हैं लोग

Self Harm Mental Health: हाल ही में पेरिस हिल्टन (Perez Hilton) से जुड़ी एक घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। एक लाइव प्रसारण के दौरान वो खुदको चोट पहुंचाते हुए नजर आए। वीडियो में उनके इस व्यवहार को जिसने भी देखा उसे धक्का लगा। वीडियो के वायरल होने के बाद कई लोग उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को लेकर चिंतित हो गए। बाद में हिल्टन ने अपने फैंस को बताया कि वह सुरक्षित हैं और उन्हें जरूरी मदद मिल रही है। इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े एक बेहद गंभीर मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है।

आखिर ऐसा क्यों होता है कि कोई व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में पहुंच जाता है। ऐसी घटनाओं को केवल ध्यान खींचने की कोशिश मान लेना ठीक नहीं है। इसके पीछे गहरा मानसिक तनाव, भावनात्मक दर्द या किसी मुश्किल परिस्थिति से जूझना हो सकता है।

आत्म-हानि क्या होती है

सबसे पहले हमें ये जानना होगा कि आखिर आत्म-हानि का मतलब होता क्या है। सरल शब्दों में समझें तो इसका मतलब जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाना है। आत्म-हानि और आत्महत्या की कोशिश एक ही चीज नहीं हैं इन दोनों में बड़ा अतंर है। कुछ लोग आत्म-हानि का सहारा अपनी बेहद मुश्किल भावनाओं से कुछ समय के लिए राहत पाने के लिए लेते हैं। हालांकि, इससे समस्या खत्म नहीं होती और समय के साथ स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए ऐसे व्यवहार को नजरअंदाज करने के बजाय उसके पीछे की वजह को समझना और सही मदद लेना जरूरी है।

आखिर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में क्यों पहुंचता है

हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग हो सकती है। इसके पीछे कोई एक कारण नहीं होता। लगातार तनाव, अकेलापन, रिश्तों में परेशानी, किसी तरह का भावनात्मक आघात या लंबे समय से चली आ रही मानसिक परेशानी इसका कारण हो सकती है। कई बार व्यक्ति अपनी भावनाओं को किसी के सामने ठीक से व्यक्त नहीं कर पाता। उसे लगता है कि कोई उसकी बात नहीं समझेगा। यही भावना धीरे-धीरे भावनात्मक बोझ को बढ़ा सकती है। अवसाद, चिंता, गहरा दुख, अस्वीकृति की भावना और पुराने मानसिक आघात भी कुछ लोगों में आत्म-हानि के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

क्या आत्म-हानि सिर्फ ध्यान खींचने के लिए होती है

किसी व्यक्ति के खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार को केवल ध्यान खींचने की कोशिश समझना एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। इस बात की काफी ज्यादा संभावना है कि वह व्यक्ति मदद मांगना चाहता हो, लेकिन उसके पास अपनी परेशानी बताने के लिए सही शब्द न हों। कुछ लोग अपनी भावनाओं को बोलकर व्यक्त नहीं कर पाते ऐसे में उनका व्यवहार ही उनकी बातों का संकेत बन जाता है। अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है तो उसे डांटने, शर्मिंदा करने या उसकी परेशानी का मजाक उड़ाने के बजाय उसकी बात सुनना ज्यादा जरूरी है।

अगर कोई करीबी परेशान नजर आए तो क्या करें

अगर आपका कोई दोस्त, परिवार का सदस्य या करीबी व्यक्ति लगातार उदास, परेशान या अलग-थलग नजर आ रहा है, तो उससे बात करने की कोशिश करें। उसकी बात ध्यान से सुनें। उसे यह महसूस कराएं कि वह अकेला नहीं है और जरूरत पड़ने पर मदद लेना बिल्कुल सामान्य बात है। अगर आपको लगे कि व्यक्ति तत्काल खतरे में है या खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं है, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत स्थानीय आपातकालीन सहायता, किसी भरोसेमंद परिजन या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।

ऐसी घटनाओं से हमें क्या सीख मिलती है

पेरिस हिल्टन से जुड़ी घटना हमें याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी किसी एक वर्ग या उम्र के व्यक्ति तक सीमित नहीं है। बाहर से खुश और सफल नजर आने वाला व्यक्ति भी अंदर से किसी गंभीर भावनात्मक परेशानी से गुजर सकता है। इसलिए हमें किसी के दर्द को देखकर तुरंत फैसला सुनाने के बजाय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति मदद मांग रहा है, तो उसकी बात सुनना और उसे सही सहायता तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत करने से शर्म और डर कम हो सकता है। समय पर मिलने वाला भावनात्मक और पेशेवर सहयोग किसी व्यक्ति को कठिन दौर से बाहर निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

और पढ़ें
End of Article