Lung Detox Damage Repair: दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हल्की ठंड महसूस की जा रही है। ऐसे में सर्दियां और दिवाली आने के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने और स्मॉग छाने की चिंता बढ़ सकती है। इस चिंता के साथ फेफड़ों की सेहत खराब होने तो सांस लेने की समस्या भी बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में उन लोगों के लिए सवाल और भी जरूरी हो जाता है, जो कई सालों से प्रदूषित हवा में रह रहे हैं। क्या इतने लंबे समय तक प्रदूषण झेलने के बाद फेफड़े दोबारा ठीक हो सकते हैं।
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इसका जवाब सीधा हां या ना में नहीं दिया जा सकता। प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है। लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से सांस की नलियों में जलन और सूजन हो सकती है। कुछ मामलों में धीरे-धीरे फेफड़ों की काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए दिवाली और सर्दियों के प्रदूषण से पहले यह समझना जरूरी है कि फेफड़ों को बचाने के लिए क्या किया जा सकता है और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
फेफड़ों की रिकवरी हो सकती है ?
डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरि, कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के अनुसार फेफड़ों की रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितने समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहा और उससे फेफड़ों को कितना नुकसान हुआ है। अगर प्रदूषण की वजह से केवल सांस की नलियों में जलन या सूजन हुई है, तो प्रदूषण से दूरी बनाने के बाद इसमें सुधार हो सकता है। लेकिन अगर फेफड़ों में लंबे समय से कोई स्थायी बदलाव या पुरानी बीमारी हो चुकी है, तो हर नुकसान पूरी तरह ठीक हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
प्रदूषण फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है?
खराब हवा में मौजूद बहुत छोटे कण और दूसरी प्रदूषक गैसें सांस के साथ शरीर में पहुंच सकती हैं। लगातार ऐसा होने पर सांस की नलियों में परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को बार-बार खांसी, घरघराहट, सीने में भारीपन या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
हालांकि केवल प्रदूषण को हर परेशानी की वजह मान लेना भी सही नहीं है। धूम्रपान, अस्थमा, सीओपीडी, काम की जगह पर धूल या केमिकल्स का संपर्क और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकती हैं।
लंग डिटॉक्स कैसे करें
फेफड़ों को साफ करने के नाम पर किसी खास ड्रिंक, पाउडर या डिटॉक्स प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती। फेफड़ों की सेहत के लिए प्रदूषण और धुएं से दूरी बनाना, धूम्रपान से बचना, साफ हवा में रहना और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम करना ज्यादा जरूरी है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
लंबे समय से खांसी, सांस फूलना, घरघराहट, सीने में जकड़न या पहले की तुलना में कम मेहनत में थकान महसूस हो रही है, तो इसे सिर्फ प्रदूषण का असर मानकर न छोड़ें। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो फेफड़ों के डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्पाइरोमेट्री जैसे परीक्षण से फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच कर सकते हैं।
