PTSD Awareness Day: तनाव एक ऐसी स्थिति है जिसका सामना हर व्यक्ति कभी न कभी अपने जीवन में जरूर करता है। फिर चाहे वह घर की टेंशन हो, ऑफिस, पैसों की चिंता या अन्य परिवार संबंधी तनाव, इन स्थितियों में व्यक्ति अक्सर खुद का तनावग्रस्त महसूस करते हैं। यहां तक कि बच्चे भी पढ़ाई और करियर के दबाव की वजह से तनावग्रस्त महसूस करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, हर तनाव एक जैसा नहीं होता है। कई बार किसी व्यक्ति को किसी हादसे या बहुत दर्दनाक घटना के बाद लंबे समय तक डर और सदमे की स्थिति देखने को मिल सकीत है। यह भी तनाव का एक गंभीर रूप है, जिसे PTSD यानी पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर कहते हैं। आइए जानते हैं पीटीएसडी कैसे समान्य तनाव से अलग है, दोनों में अंतर कैसे पहचान सकते हैं।
सामान्य तनाव क्या होता है
अमृता अस्पताल फरीदाबाद के मनोचिकित्सक और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर गायत्री भाटिया के मुताबिक तनाव हमारे शरीर और दिमाग की एक सामान्य प्रतिक्रिया है। जब कोई मुश्किल परिस्थिति आती है, तो कुछ समय के लिए चिंता या घबराहट होना स्वाभाविक है। जैसे ही समस्या कम होती है, तनाव भी धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य तरीके से जीने लगता है।
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PTSD क्या है और यह क्यों होता है
डॉक्टर की मानें तो PTSD कोई साधारण तनाव नहीं है। यह अक्सर किसी बड़ी और दर्दनाक घटना के बाद होता है। जैसे सड़क हादसा, किसी अपने की अचानक मौत, हिंसा, प्राकृतिक आपदा या कोई ऐसा अनुभव जिसे भूल पाना आसान न हो। डॉक्टर बताते हैं कि कुछ लोगों के मन पर ऐसी घटनाओं का असर लंबे समय तक बना रहता है और वे उस डर से बाहर नहीं निकल पाते।
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PTSD और सामान्य तनाव में क्या अंतर है
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सामान्य तनाव कुछ दिनों या हफ्तों में कम हो जाता है, लेकिन PTSD में व्यक्ति महीनों तक उसी घटना को बार-बार याद करता रहता है। बुरे सपने आना, छोटी-सी आवाज से डर जाना, हर समय बेचैनी महसूस करना, लोगों से दूरी बनाना या किसी काम में मन न लगना इसके आम संकेत हैं। जब ये परेशानियां रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कौन सी स्थिति ज्यादा खतरनाक है
डॉक्टर का कहना है कि सामान्य तनाव आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन PTSD का समय पर इलाज न मिले तो यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ा सकता है। इसलिए PTSD सामान्य तनाव से ज्यादा गंभीर माना जाता है। अगर किसी दर्दनाक घटना के बाद एक महीने से ज्यादा समय तक डर, बेचैनी या बुरे सपने बने रहें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। सही इलाज और परिवार के सहयोग से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
