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बहुत ज्यादा सोचने लगे हैं बच्चे, जानें दिमाग की रेस को रोकने का तरीका

Mental Health Awareness: ओवरथिंकिंग बच्चों में भी देखने को मिल रही है। अगर इसे कंट्रोल किया जाए तो बच्चों को उनके फैसले लेने में मदद मिल सकती है। जानें कैसे आप बच्चों को ये आदत छुड़वा सकते हैं।

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दिमाग की रेस को रोकने का तरीका (PG)

Mental Health Awareness: ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना एक आम बात हो गई है। बड़े लोगों के अलावा अब बच्चों में भी ये आदत डेवलप हो रही है। क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आपके बच्चे ने कोई छोटी-सी बात कही थी और फिर बाद में कई दिन तक उसके बारे में ही सोचता रहा कहीं सामने वाला नाराज तो नहीं हो गया? या फिर बार-बार दिमाग में यही चलता रहे कि-क्या मैंने सही किया, स्कूल में लोग मेरे में क्या सोचेंगे? अगर मैंने ऐसा किया तो कहीं मेरे दोस्त मुझसे नाराज तो नहीं हो जाएंगे?

ओवरथिंकिंग क्या होती है?

सबसे पहले हमारा ये जानना जरूरी है कि ओवरथिंकिंग होती क्या है। ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी भी बात को जरूरत से ज्यादा सोचते रहना। या तो पुरानी बातों को बार-बार दिमाग में चलाते रहना या फिर भविष्य में क्या गलत हो सकता है, इसके बारे में बिना वजह चिंता करते रहना। ऐसे में बच्चे पढ़ाई पर फोकस की जगह पूरा टाइम सही और गलत का विचार करने में लगा देत हैं।

ओवरथिंकिंग के संकेत क्या हैं?

सबसे पहले हमारा ये जानना जरूरी है कि ओवरथिंकिंग होती क्या है। ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी भी बात को जरूरत से ज्यादा सोचते रहना। या तो पुरानी बातों को बार-बार दिमाग में चलाते रहना या फिर भविष्य में क्या गलत हो सकता है, इसके बारे में बिना वजह चिंता करते रहना। ऐसे में बच्चे पढ़ाई पर फोकस की जगह पूरा टाइम सही और गलत का विचार करने में लगा देत हैं।

ओवरथिंकिंग क्यों नुकसानदायक है?

लगातार ज्यादा सोचने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है और तनाव महसूस होने लगता है। चिंता बढ़ती है और मन हमेशा परेशान रहता है। फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। नींद खराब होने लगती है। इसके अलावा काम करने की बजाय हम सिर्फ सोचते रह जाते हैं।

ओवरथिंकिंग से बच्चे को कैसे बाहर निकलें?

बच्चे को एक टाइम लिमिट दें कि किसी बात पर सिर्फ कुछ मिनट ही सोचें इससे उसका दिमाग ज्यादा स्थिर होगा। बच्चे से कहें कि वह अपने विचारों को लिखने की आदत डाले, इससे उसका दिमाग हल्का होगा। खुद से उसे पूछने दें कि क्या ये बात कुछ हफ्तों बाद भी उसके लिए मायने रखेगी? थोड़ा ध्यान हटाने के लिए कोई हॉबी डेवलप करवाएं। बच्चे से नरमी से बात करें, जैसे आप अपने दोस्त से करते हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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