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International Women’s Day: खून की कमी से जूझ रहीं भारतीय महिलाएं, क्यों एनीमिया बन रहा देश का सबसे अनदेखा हेल्थ संकट

Anemia Crisis In Indian Women: भारत में एनीमिया महिलाओं के लिए एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला हेल्थ संकट बन चुका है। NFHS-5 के अनुसार करीब 68% महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि आयरन की कमी, बार-बार गर्भधारण और खराब डाइट इसके मुख्य कारण हैं। चलिए डॉक्टर से ही जानते हैं आखिर क्यों यह स्थिति एक अनदेखी इमेरजेंसी बन रही है।

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भारतीय महिलाओं में एनीमिया बन रहा अनदेखी हेल्थ इमरजेंसी (AI Image)

Anemia Crisis In Indian Women: भारत में महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हैं, लेकिन उनमें से एक बड़ी समस्या है एनीमिया यानी खून की कमी। यह ऐसी समस्या है जो लाखों महिलाओं को प्रभावित करती है, लेकिन अक्सर इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। कई महिलाएं थकान, चक्कर या कमजोरी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।

हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. एम. वी. ज्योत्स्ना के अनुसार भारत में एनीमिया महिलाओं के लिए एक बड़ा लेकिन अनदेखा हेल्थ संकट बन चुका है। NFHS-5 सर्वे बताता है कि 15 से 49 साल की लगभग 68.4% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, यानी हर 10 में से करीब 7 महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह महिलाओं की रोजमर्रा की सेहत से लेकर गर्भावस्था तक पर असर डाल सकता है।

भारत में महिलाओं में एनीमिया कितना गंभीर है

भारत में एनीमिया की समस्या काफी व्यापक है। NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार 15–49 साल की लगभग 68.4% महिलाएं एनीमिक हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है, जहां करीब 70.4% महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा लगभग 64.7% है।

इतना ही नहीं, किशोरियों में भी यह समस्या काफी आम है। 15 से 19 साल की करीब 59% लड़कियां एनीमिया से प्रभावित हैं। डॉ. एम. वी. ज्योत्स्ना बताती हैं कि जब यह समस्या किशोरावस्था में शुरू होती है, तो आगे चलकर गर्भावस्था और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।

एनीमिया क्या होता है और कैसे होता है

मेडिकल भाषा में एनीमिया तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो खून के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

महिलाओं में सामान्य हीमोग्लोबिन का स्तर आमतौर पर 12 से 15.5 g/dL के बीच माना जाता है। वहीं गर्भावस्था के दौरान अगर यह स्तर 11 g/dL से नीचे चला जाए, तो उसे एनीमिया माना जाता है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन कम होता है तो शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

महिलाओं में एनीमिया के सबसे आम कारण

डॉ. एम. वी. ज्योत्स्ना के अनुसार महिलाओं में एनीमिया का सबसे आम कारण आयरन की कमी है। कई बार मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्राव होने से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। इसके अलावा बार-बार गर्भधारण और गर्भावस्था के बीच कम अंतर, पोषण की कमी, और ऐसी डाइट जिसमें आयरन पर्याप्त मात्रा में न हो, ये सभी वजहें एनीमिया को बढ़ावा देती हैं। कुछ मामलों में शरीर आयरन को सही तरीके से अवशोषित भी नहीं कर पाता, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

एनीमिया के लक्षण जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है

एनीमिया के कई लक्षण होते हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं। लगातार थकान रहना, चक्कर आना, सांस फूलना, त्वचा का पीला पड़ना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी इसके आम संकेत हो सकते हैं।

डॉ. एम. वी. ज्योत्स्ना बताती हैं कि अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह महिलाओं की रोजमर्रा की सेहत के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान भी जोखिम बढ़ा सकता है।

गर्भावस्था और महिलाओं की सेहत पर एनीमिया का असर

भारत में 50% से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित होती हैं। खून की कमी के कारण गर्भावस्था के दौरान कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इनमें समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले बच्चे का जन्म और मां में अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं शामिल हैं।

डॉक्टरों के अनुसार एनीमिया का समय पर इलाज और सही देखभाल बहुत जरूरी है, ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रह सके।

एनीमिया से बचाव कैसे संभव है

अच्छी बात यह है कि एनीमिया एक ऐसी समस्या है जिसे काफी हद तक रोका और ठीक किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है समय-समय पर जांच, संतुलित और पोषक आहार, और जरूरत पड़ने पर आयरन सप्लीमेंट्स लेना।

डॉ. एम. वी. ज्योत्स्ना के मुताबिक अगर महिलाओं को समय रहते सही पोषण, जागरूकता और मेडिकल सलाह मिल जाए, तो एनीमिया के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं अपने शरीर के संकेतों को समझें और सेहत को नजरअंदाज न करें।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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