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शरीर की चर्बी निगल जाता है ये भूरा फैट, जानें मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर कैसे करता है वजन कम

Benefits Of Brown Fat: सारे फैट खराब नहीं होते हैं। ब्राउन फैट शरीर में पाया जाने वाला एक ऐसा फैट है, जो वजन को कम करता है और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है। ये कैलोरी जलाकर शरीर को गर्म रखने का काम करता है। यहां से आप इसके बारे में और जानकारी ले सकते हैं।

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ब्राउन फैट क्या है, जानें फायदे (pic credit: canva)

Benefits Of Brown Fat: फैट यानी वसा का नाम सुनते ही लोगों के चेहरों पर शिकन आ जाती है, क्योंकि फैट को हमेशा मोटापे से जोड़कर देखा जाता है, जो काफी हद तक सही भी है, लेकिन शरीर में फैट के दो प्रकार पाए जाते हैं, जिन्हें व्हाइट फैट और ब्राउन फैट कहा जाता है। ये दोनों फैट ही शरीर के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन एक सीमित मात्रा में।

क्या है ब्राउन फैट?

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राउन फैट व्हाइट फैट का ही एक रूप है, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली में बहुत अंतर होता है। असल में जब व्हाइट फैट शरीर में ऊर्जा के स्टोरेज के तौर पर काम करता है, लेकिन जब वह कैलोरी को बर्न वाली स्टेज में तब्दील होता है तो उसे ब्राउन फैट या ब्राउन एडिपोज टिश्यू कहते हैं। इसलिए ब्राउन फैट ऊर्जा की जरूरत के समय बर्न होकर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है और साथ ही ऊष्मा भी प्रदान करता है।

क्या ब्राउन फैट मोटापा बढ़ाता है?

ब्राउन फैट शरीर में मोटापा बढ़ाने का नहीं, बल्कि कम करने का काम करता है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में भी मदद करता है। सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में ब्राउन फैट बहुत मदद करता है, जो खुद बर्न होकर शरीर को गर्मी देता है। ये सर्दियों का सुरक्षा कवच है। इसमें माइटोकॉन्ड्रिया की मात्रा ज्यादा होती है।

शरीर के लिए क्यों है जरूरी?

अब सवाल है कि ब्राउन फैट शरीर के लिए क्यों जरूरी है। ब्राउन फैट शरीर में मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, ब्लड शुगर कंट्रोल में सहायक है, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारता है, ठंड में शरीर को गर्म रखता है, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करता है और कैलोरी बर्न करने में मदद करता है। रिसर्च की मानें तो जिन लोगों में मोटापा कम होता है, उनमें ब्राउन फैट की मात्रा अधिक होती है और वे मोटे लोगों की तुलना में ज्यादा एक्टिव होते हैं।

ब्राउन फैट की कमी के लक्षण-

वहीं, ब्राउन फैट की कमी शरीर में व्हाइट फैट की अधिकता को दिखाती है। इससे शरीर में थकान होती है और ऊर्जा की कमी बनी रहती है, मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, ठंड ज्यादा लगने लगती है, वजन बढ़ने लगता है, और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। जाहिर है कि ब्राउन फैट आहार से नहीं मिलता है, बल्कि शरीर में इसे एक्टिवेट करना होता है। इसके लिए पोषण युक्त भोजन के साथ पर्याप्त वर्कआउट करना चाहिए।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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