हेल्थ

ज्यादा चीनी खाना पड़ सकता है भारी, याददाश्त और फोकस को नुकसान पहुंचाती है शुगर

Impact of high sugar on brain in hindi: हम में से ज्यादातर लोग मीठा खाना पसंद करते हैं, लेकिन ज्यादा चीनी खाना धीरे-धीरे दिमाग की सेहत पर असर डाल सकता है। बत दें कि यह हाई शुगर डाइट से याददाश्त, फोकस और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। यह दिमाग के कुछ खास हिस्सों को भी प्रभावित करती है और लंबे समय में स्ट्रोक, डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए समय रहते चीनी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

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ज्यादा शुगर क्यों है सेहत के लिए नुकसानदेह

Impact of high sugar on brain in hindi: मीठा खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। चाय, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड स्नैक्स और कई रोजमर्रा के खाने में भी काफी मात्रा में चीनी होती है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ज्यादा चीनी सिर्फ वजन बढ़ाती है या डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है। अगर लंबे समय तक ज्यादा शुगर खाई जाए तो यह ब्रेन के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है। इससे याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है। इसलिए मीठा खाते समय मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

शुगर दिमाग में फील-गुड हार्मोन को बढ़ाती है

डॉक्टरों के अनुसार जब हम मीठा खाते हैं तो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज होता है। यह वही न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमें खुशी और संतुष्टि का एहसास दिलाता है। यही वजह है कि मीठा खाने के बाद कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है। लेकिन समस्या तब होती है जब यह आदत बन जाती है। लगातार ज्यादा चीनी खाने से दिमाग बार-बार उसी सुखद एहसास को पाने के लिए शुगर की मांग करने लगता है, जिससे सेल्फ-कंट्रोल और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

याददाश्त और सीखने की क्षमता पर असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि हाई शुगर डाइट दिमाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा डाल सकती है। इसमें याददाश्त, सीखने की क्षमता और भावनाओं को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शामिल है। ज्यादा चीनी दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को ओवरलोड कर देती है, जिससे ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है और मानसिक प्रदर्शन भी कमजोर पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर पढ़ाई या काम पर फोकस करना मुश्किल हो सकता है।

शुगर क्रैश से आती है थकान और सुस्ती

अक्सर लोग मीठा खाने के बाद अचानक एनर्जी महसूस करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद ही थकान या नींद जैसा महसूस होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादा शुगर खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर जल्दी गिर भी जाता है। इस उतार-चढ़ाव को “शुगर क्रैश” कहा जाता है। इस स्थिति में दिमाग की एक्टिविटी धीमी पड़ जाती है, जिससे व्यक्ति को सुस्ती, थकान और मानसिक धुंधलापन महसूस हो सकता है।

दिमाग के इन हिस्सों पर पड़ता है असर

डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा चीनी खास तौर पर दिमाग के दो महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित करती है—प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हमारा फोकस, निर्णय और व्यवहार नियंत्रित करता है, जबकि हिप्पोकैम्पस याददाश्त और सीखने से जुड़ा होता है। अगर लंबे समय तक हाई शुगर डाइट ली जाए तो ब्रेन की प्लास्टिसिटी कम हो सकती है, जिससे नई चीजें याद रखना और समझना कठिन हो सकता है।

लंबे समय में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित न रहे तो यह दिमाग की नसों और नर्व सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है। धीरे-धीरे यह स्थिति स्ट्रोक, डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दिमाग से जुड़ी कई बीमारियां अचानक नहीं होतीं, बल्कि सालों तक गलत खान-पान और मेटाबॉलिक नुकसान की वजह से धीरे-धीरे विकसित होती हैं। इसलिए आज से ही संतुलित आहार अपनाना ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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