स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एशियाई खेलों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। भारत की दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर बिना कोई मेडल जीते ही जापान के आइची-नागोया में अपना अभियान खत्म कर बैठीं। मनु ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल के व्यक्तिगत और टीम के साथ कुल चार इवेंट में हिस्सा लिया था। हालांकि, पेरिस ओलंपिक की स्टार खिलाड़ी कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं। मनु भाकर से भारत को मेडल की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सारी उम्मीद चकनाचूर हो गई।
सोमवार को मनु का अभियान तब खत्म हुआ, जब भारत महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम फाइनल में पांचवें स्थान पर रहा। ईशा सिंह, मनु भाकर और राही सरनोबत की तिकड़ी ने 1727-56x के स्कोर के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। गोल्ड मेडल चीन (1743-68x) को मिला। साउथ कोरिया ने सिल्वर (1735-65x) जीता, जबकि चीनी ताइपे ने ब्रॉन्ज मेडल (1734-48x) अपने नाम किया।
सिंगल और टीम इवेंट में रहीं फेल
महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत फाइनल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं ईशा सिंह 580-22x के स्कोर के साथ आठवें स्थान पर रहीं। टॉप आठ शूटर्स को फाइनल में आगे बढ़ने का मौका मिला। मनु भाकर व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना पाईं। क्वालिफिकेशन राउंड में 579-18x स्कोर करके वह 11वें स्थान पर रहीं, जबकि राही 568-16x के स्कोर के साथ 30वें स्थान पर रहीं।
10 मीटर इवेंट में भी नहीं मिले मेडल
इससे पहले, मनु 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में भी जगह नहीं बना पाई थीं। व्यक्तिगत इवेंट के क्वालिफिकेशन राउंड में वह 181.1 पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर रही थीं। ईशा सिंह क्वालिफिकेशन में 572 पॉइंट्स के साथ 16वें स्थान पर रहीं, जबकि सुरुचि सिंह 568 पॉइंट्स के साथ 26वें स्थान पर रहीं। भाकर 10 मीटर एयर पिस्टल के टीम इवेंट में मेडल नहीं जीत पाईं।
खाली हाथ लौटना पड़ेगा भारत
एशियन गेम्स से पहले मनु शानदार ने हांगझोऊ में हुए ISSF वर्ल्ड कप 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। जहां उनकी साथी खिलाड़ी ईशा सिंह ने महिलाओं के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया। म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप 2026 में उन्होंने सम्राट राणा के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। घरेलू मैदान पर हुई एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में मनु ने महिलाओं के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में व्यक्तिगत सिल्वर मेडल जीता। हालांकि, एशियन गेम्स में वह कोई मेडल नहीं जीत सकीं और खाली हाथ भारत लौट आईं।
