Eating Rice Can Cause cancer: क्या आप भी उन लोगों में सें हैं जो रोज चावल खाते हैं? आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि चावल का सेवन अब स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चावल में आर्सेनिक और अन्य जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ रही है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और आधुनिक कृषि प्रथाओं के कारण चावल की गुणवत्ता में गिरावट आई है। इस लेख में हम चावल से जुड़े इन खतरों और उनसे बचाव के उपाय जानेंगे।
चावल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा
एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते चावल में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे-जैसे तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता है, चावल में आर्सेनिक की मात्रा भी बढ़ जाती है। यह तत्व कैंसर, फेफड़ों की बीमारियों और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।
एशियाई देशों में बढ़ता खतरा
रिपोर्ट में भारत, बांग्लादेश, चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, म्यांमार और फिलीपींस जैसे देशों में चावल के उपभोग से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इन देशों में चावल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा मूत्राशय, फेफड़े और त्वचा कैंसर जैसी बीमारियों से जुड़ी हुई है। इसके अलावा, मधुमेह, गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं और बच्चों के मस्तिष्क विकास में रुकावट जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं।
चावल पकाने का सुरक्षित तरीका
विशेषज्ञों का सुझाव है कि चावल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोकर, पांच मिनट उबालकर पानी निकाल देना चाहिए, फिर नए पानी में पकाना चाहिए। इस प्रक्रिया से चावल में मौजूद आर्सेनिक की मात्रा काफी हद तक घटाई जा सकती है। शैफील्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस विधि से लाल चावल से 50% और सफेद चावल से 74% तक आर्सेनिक हटाया जा सकता है।
पॉलिश चावल के खतरे
पॉलिश चावल, जो बाजार में अधिक चमकदार और सफेद दिखता है, उसमें पोषक तत्वों की कमी होती है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पूर्णिया, बिहार में केमिकल युक्त पॉलिश चावल खाने से लोगों में ब्रेन, नस, बेरीबेरी, लिवर, माइग्रेन, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां देखी गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
पोषक तत्वों में गिरावट और टॉक्सिन्स में वृद्धि
पिछले पांच दशकों में चावल और गेहूं में जिंक और आयरन जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा में कमी आई है, जबकि आर्सेनिक, बेरियम, स्ट्रोंटियम और क्रोमियम जैसे खतरनाक तत्वों की मात्रा में वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन आधुनिक कृषि प्रथाओं और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण हुआ है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
