अगर आपका लगभग पूरा दिन लैपटॉप के सामने, ऑफिस की कुर्सी पर या फिर सोफे पर बैठे-बैठे गुजरता है तो नई रिसर्च आपको अलर्ट कर देगी। और अगर आप ये सोच रहे हैं कि दिन में 30 मिनट का वर्कआउट किया ही है - तो इसे पढ़ना और समझना और भी जरूरी है।
यह स्टडी बताती है कि सिर्फ नियमित वर्कआउट करना काफी नहीं है। बल्कि दिन भर आपको मूवमेंट करते रहना होगा। कुछ देर की वॉक या एक्सरसाइज के बाद दिनभर लगातार बैठे रहने की आदत कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है।
सुबह का वर्कआउट काफी नहीं
हममें से कई लोग ऑफिस पहुंचने के बाद अपनी सीट से तभी उठते हैं, जब चाय पीनी हो या लंच का समय हो। बीच के चार-पांच घंटे कब निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। स्टडी इसी आदत पर चिंता जताती है।
पीयर-रिव्यूड जर्नल PLOS Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत कुछ खास तरह के कैंसर की वजह बन सकती है। स्टडी के तहत 90 हजार से ज्यादा लोगों के रुटीन पर कई साल तक नजर रखी गई। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहते थे, उनमें कैंसर से मौत का खतरा बीच-बीच में उठकर चलते-फिरते रहने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा दिखा।
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लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में क्या होता है
हमारा शरीर लगातार चलने-फिरने के लिए बना है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि जब हम घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं, तो सबसे पहले मांसपेशियों की सक्रियता (Muscle Activity) धीमी पड़ने लगती है। इसके साथ ही शरीर में ग्लूकोज और फैट का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगती है। समय के साथ वजन बढ़ना, हार्मोनल बदलाव और शरीर में लगातार रहने वाली हल्की सूजन (Chronic Inflammation) जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
इतना ही नहीं, लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम होता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। ये बदलाव कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।

हर थोड़ी देर में कुर्सी छोड़ना क्यों जरूरी है (AI Image)
बैठने और कैंसर का कनेक्शन
हालांकि इस सवाल का स्पष्ट जवाब इस स्टडी में नहीं मिलता है। वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि सिर्फ कुर्सी पर बैठे रहना सीधे तौर पर कैंसर का कारण नहीं बनता। लेकिन लंबे समय तक बैठने से बॉडी में जो बदलाव होते हैं, उनका गंभीर साइड इफेक्ट कैंसर के तौर पर सामने आ सकता है।
लॉन्ग टाइम सिटिंग से कोलोरेक्टल (बड़ी आंत), ब्रेस्ट और एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की अंदरूनी परत) जैसे कैंसर का खतरा बढ़ता है। खासकर तब, जब इसके साथ मोटापा, असंतुलित खानपान, धूम्रपान या अन्य खराब जीवनशैली की आदतें भी जुड़ी हों।
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ऑफिस जाने वाले क्या करें
अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें पूरे दिन कंप्यूटर के सामने बैठना पड़ता है, तो ये स्टडी आपको अलर्ट करती है। लेकिन घबराने की बजाय कुछ छोटे बदलावों को अपनाएं।
जैसे कि 30 से 40 मिनट बाद दो-तीन मिनट के लिए कुर्सी से उठें। पानी लेने खुद जाएं, फोन पर बात करते समय थोड़ा टहलें, प्रिंटर तक पैदल जाएं, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें या सीट पर बैठे-बैठे हल्की स्ट्रेचिंग कर लें। ये छोटी-छोटी आदतें मांसपेशियों को दोबारा सक्रिय करती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाती हैं और लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
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हफ्ते में कितना वर्कआउट जरूरी
शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही रहे, इसके लिए उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार हफ्ते में 150 से 300 मिनट की एक्सरसाइज जरूरी बताई जाती है। इसके अलावा, दिन भर में थोड़ी थोड़ी देर में मूवमेंट करना भी जरूरी है।
यानी सुबह के वर्कआउट के बाद अगर आप 8-10 घंटे लगातार कुर्सी पर बैठे रहे, तो आप खुद को एक्टिव नहीं कह सकते। इसलिए फिट रहने का सबसे आसान मंत्र यही है कि रोजाना नियमित व्यायाम करें और दिनभर बार-बार उठकर बॉडी मूवमेंट करते रहें। कई बार सिर्फ दो मिनट की छोटी-सी वॉक भी आपकी सेहत को बड़ा फायदा दे सकती है।
