हेल्थ

सर्दी में क्या पूरे दिन जुराबें पहन सकते हैं, वुलन या कॉटन- कौन सी सॉक्स हैं बेस्ट

Socks in Winters: सर्दी से बचने के लिए पैरों को ढककर रखने की सलाह दी जाती है। ठंड से बचने का बढ़िया उपाय है पैरों में जुराबें पहन कर रखना। लेकिन क्या पूरा दिन जुराबें पहनकर रहना सही है। यहां देखें वुलन या कॉटन में ठंड में कौन सी जुराबें पहनना सही रहता है।

Image

सर्दी में पूरा दिन जुराबें पहनना सही या नहीं (Pic: Canva)

Socks in Winters: अक्सर घरों में बड़े समझाते हैं कि सर्दी से बचना है तो सिर और पैर ढककर रखो। पैरों में तो जुराबें खासतौर पर पहनने को कहा जाता है। लेकिन समझ ये नहीं आता है कि जुराबें कॉटन की पहनना सही रहेगा या वुलन यानी ऊन की जुराबें आपको सर्दी से बेहतर सुरक्षा देंगी। और क्या पूरे दिन मोजे पहनकर रहा जा सकता है। कहीं इस तरह पहनने से सेहत पर कोई साइड इफेक्ट तो नहीं होगा। इसी को विस्तार से जानते हैं।

सर्दी में पूरे दिन जुराबें पहनने के फायदे

सर्दी-जुकाम की शिकायत पैरों में ठंड लगने से जल्दी होती है। इसी के साथ शरीर में जकड़न की शिकायत भी बढ़ सकती है। इसलिए शरीर को गर्म रखने के लिए जरूरी है कि जुराबें पहनकर कर पैरों को गर्म रखा जाए। इससे शरीर की नसें भी ठंड में कम सिकुड़ती हैं और रक्त संचार सही से काम करता है।

जुराबें पहनकर रखने से ठंड में त्वचा सुरक्षित रहती है और एड़ियों के फटने की समस्या कम होती है। वहीं जोड़ों के दर्द में भी आराम रहता है।

सर्दी में पूरे दिन जुराबें पहनने के नुकसान

  • अगर जुराबें सही मटीरियल की न हों, तो पैरों में पसीना आ सकता है।
  • पैर अगर ठीक से सूखे नहीं होंगे तो नमी बनी रहने से खुजली, बदबू और फंगल इंफेक्शन हो सकता है।
  • बहुत टाइट या सिंथेटिक जुराबें लंबे समय तक पहनने से रैशेज हो सकते हैं।

वैसे पूरे दिन जुराबें पहनना गलत नहीं है लेकिन जुराबों के चयन में सही मटीरियल और सही फिट बहुत जरूरी है। बीच-बीच में जब आपको सही लगे- तब पैरों को हवा जरूर लगवाएं।

ऊनी जुराबें कब पहनें

ऊनी जुराबें कब पहनें

सर्दी में क्या ऊनी जुराबें ही पहननी चाहिए

वुलन यानी ऊनी जुराबें ठंड में बेहतरीन गर्माहट देती हैं। खासतौर पर ये ठंडी हवा और नमी से पैरों का बचाव करती हैं। बहुत ठंडे इलाकों या सुबह-शाम बहुत ज्यादी सर्दी के समय ये जुराबें पहनने से राहत मिलती है।

हालांकि दिनभर वुलन जुराबें पहनने से पसीना और खुजली हो सकती है। जिनकी त्वचा सेंसिटिव है, उनको एलर्जी या जलन की समस्या भी हो सकती है। कई बार पैरों में ज्यादा गर्मी हो जाने से घबराहट भी हो सकती है। इसलिए सुबह-शाम, बाहर निकलते समय या बहुत ठंड में ही वुलन सॉक्स पहननी चाहिए।

कॉटन के सॉक्स पहनने के फायदे और नुक्सान

सर्दी में कॉटन की जुराबें नमी और पसीना सोख लेती हैं जिससे पैर सूखे रहते हैं और एलर्जी का खतरा कम होता है। ये जुराबें पूरे दिन पहनने के लिए आरामदायक रहती हैं। इनको ऑफिस, घर और सामान्य सर्दी के मौसम में पहन सकते हैं।

हालांकि बहुत ज्यादा ठंड से ये जुराबें आपको सुरक्षा नहीं देती हैं।

कॉटन की जुराबें कब पहनें

कॉटन की जुराबें कब पहनें

विंटर्स के लिए आपकी सॉक्स गाइड

सिचुएशनजुराब का विकल्प
बहुत ज्यादा ठंडवुलन सॉक्स
पूरे दिन पहननाकॉटन सॉक्स
पसीना ज्यादा आता हैकॉटन सॉक्स
बाहर जाना या सुबह-शाम की ठंडवुलन सॉक्स
संवेदनशील त्वचाकॉटन सॉक्स

सर्दियों में जुराबें पहनते समय इन बातों का रखें ध्यान

  1. सर्दी में भी जुराबों को रोज बदलें और साफ सॉक्स ही पहनें।
  2. बहुत टाइट जुराबें न पहनें। पैरों को हवा लगना जरूरी है।
  3. दिन भर सॉक्स पहनी हों तो रात में सोते समय पैरों को कुछ देर खुला रखें।
  4. अगर पसीना ज्यादा आता है तो कॉटन या कॉटन-ब्लेंड सॉक्स चुनें।
  5. बदबू या खुजली हो तो तुरंत जुराबें बदलें।
  6. गीली या ठंडी जुराबें न पहनें। इससे इंफेक्शन या ठंड लगने की समस्या हो सकती है।

वैसे सर्दियों में पूरे दिन जुराबें पहनना सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं है, लेकिन आपको सही मटीरियल जरूर चुनना होगा। इसके बाद सॉक्स ही सर्दी की आपकी आधी समस्या का समाधान कर देंगी।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

और पढ़ें
End of Article