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हार्ट अटैक और मेनोपॉज दोनों में दिखाई देते हैं ये लक्षण! भूलकर भी पहचानने में गलती न करें महिलाएं

  • Edited by: प्रणव मिश्र
  • Updated Mar 21, 2023, 05:20 PM IST

Menopause Cause Heart Attack: पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी महिलाओं में हार्ट फेल होने का एक विशिष्ट कारण है, हालांकि यह असामान्य है। मेनोपॉज तक पहुंचने के बाद मेनोपॉज के प्रभाव के कारण हार्ट अटैक के कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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हार्ट अटैक और मेनोपॉज के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं? (Image: istockphoto)

Heart Attack And Menopause Symptoms: बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। कई बार विभिन्न कारणों से महिलाओं का हृदय स्वास्थ्य भी कमजोर हो जाता है। यह उच्च रक्तचाप, कोरोनरी धमनी रोग, वाल्व रोग और मधुमेह मेलिटस के कारण होता है। लेकिन कई बार मेनोपॉज तक पहुंचने के बाद यानी मेनोपॉज के बाद कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मेनोपॉज के प्रभावों के लिए हृदय रोग के कुछ लक्षण गलत हो सकते हैं। इसलिए मेनोपॉज के प्रभाव और हृदय रोग के लक्षणों के बीच अंतर करने में गलती नहीं करनी चाहिए। हृदय रोग के शुरूआती लक्षणों को पहचानने में देरी करना आपके स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के अपने पहले दिल के दौरे से बचने की संभावना कम होती है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि लक्षण लिंगों के बीच भिन्न होते हैं। महिलाओं में "साइलेंट" दिल का दौरा पड़ने या असामान्य लक्षण प्रदर्शित होने की संभावना अधिक होती है।

शरीर में एस्ट्रोजन महिलाओं को हार्ट अटैक और हृदय रोग से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है। एस्ट्रोजेन एचडीएल यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। और यह एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। लेकिन मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी कम हो जाता है। मेडिकल न्यूज टुडे के मुताबिक मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है ।

TOI के मुताबिक मणिपाल हॉस्पिटल गुरुग्राम के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी के प्रमुख डॉ. मनमोहन सिंह चौहान कहते हैं कि महिलाओं में मेनोपॉज 40 वर्ष की आयु के बाद किसी भी समय हो सकती है, लेकिन ज्यादातर महिलाओं में 50 वर्ष की उम्र में होती है। मेनोपॉज के बाद, महिलाओं में दिल के दौरे से मरने की संभावना अधिक होती है। ऐसा शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर में अचानक बदलाव के कारण हो सकता है। इसलिए दिल से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें।

हार्ट फेल होने की स्थिति में महिलाओं में दिखाई देते हैं ये लक्षण

जिन महिलाओं को दिल का दौरा पड़ता है उनमें गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, अपच, चक्कर आना, जी मिचलाना और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। महिलाएं अक्सर इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे हृदय रोग के शुरूआती लक्षणों को पहचानने में देरी हो जाती है। महिलाओं को हार्ट अटैक और मेनोपॉज के दौरान अनुभव होने वाले लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। दोनों ही मामलों में महिलाओं को दिल की धड़कन, रात को पसीना, सीने में तकलीफ, थकान, बेचैनी और सीने में दर्द का अनुभव हो सकता है।

डॉक्टर को कब दिखाना है?

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन 40 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को अपने डॉक्टर से नियमित जांच कराने की सलाह देता है। इससे जोखिम कारकों की जल्द पहचान करने में मदद मिलती है ताकि उनका इलाज किया जा सके। प्रारंभिक हस्तक्षेप से हृदय संबंधी घटना की संभावना कम हो जाती है। यदि कोई भी दिल के दौरे के चेतावनी संकेतों को नोटिस करता है, जैसे कि असामान्य थकान, सांस लेने में कठिनाई, ऊपरी शरीर में दर्द तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

दिल के दौरे के दौरान भ्रम घातक हो सकता है क्योंकि किसी की जान बचाने के लिए समय का अत्यधिक महत्व है। यही वजह है कि महिलाओं को अपने दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है। कुछ परीक्षण जो महिलाओं को 40 वर्ष की आयु तक पहुंचने के बाद करने चाहिए- ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी), इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी), (एमआरआई), इकोकार्डियोग्राम आदि।

प्रणव मिश्र
प्रणव मिश्रauthor

मीडिया में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत हैं। इस दौरान इन्होंने मुख्य रूप से टीवी प्रोग्राम के लिए रिसर्च, रिपोर्टिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए काम किया है। इससे पहले जनसत्ता, लोकसभा टीवी/संसद टीवी, पेबेल मीडिया नेटवर्क, टाइम 8, डीडी न्यूज़ के लिए काम कर चुके हैं। इस समय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पेशल करेस्पोंडेंट के पद पर कार्यरत हैं।

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