हार्ट अटैक एक जानलेवा स्थिति है जिससे आज बहुत से लोग परेशान दिखाई दे रहे हैं। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद तो हार्ट अटैक के मामले और भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हार्ट अटैक को जहां पहले बड़े बुजुर्गों की बीमारी कहा जाता था, वहीं आज इसकी चपेट में छोटे बच्चे भी आते दिखाई दे रहे हैं। पिछले दिनों कर्नाटक से सामने आई खबर के बाद अब गुजरात से एक छोटी बच्ची को हार्ट अटैक आने की खबर सामने आ रही है। जी हां गुजरात के अहमदाबाद के स्कूल से सामने आए वीडियो में एक 8 साल की बच्ची को हार्ट अटैक से मौत होते हुए देखा जा सकता है। देखा जा सकता है कि सुबह 7:30 बजे स्कूल पहुंचते ही बच्ची क्लास में एक कुर्सी पर बैठे हुए बेचैन होने लगती है। जहां से बच्ची को तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टर्स ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि आखिर छोटे बच्चों में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं।
कर्नाटक से सामने आया केस
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अभी कुछ दिन पहले कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित एक स्कूल परिसर में कक्षा 3 की बच्ची की हार्ट अटैक से जान चली गई थी। स्कूल में अचानक बिगड़ी तबीयत के बाद उसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। बीते कुछ दिनों में हुई इन हृदय विदारक घटनाओं ने लोगों को परेशानी में डाल दिया है। क्या आप जानते हैं कि इतनी कम आयु में बच्चों का हार्ट क्यों कमजोर हो रहा है? आइए जानते हैं क्यों बढ़ रहे बच्चों में हार्ट अटैक के मामले?
बच्चों में क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले?
अनहेल्दी डाइट
छोटे बच्चों में तेजी से बढ़ रही हार्ट की समस्याओं के पीछे उनका खानपान जिम्मेदार है। जी हां, फास्ट फूड और जंक फूड्स बच्चों में मोटापा और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं।
फिजिकल की कमी
आज बदलते लाइफस्टाइल में जब सभी बच्चे ऑनलाइन गेम खेलना पसंद करते हैं। ऐसे में उनकी फिजिकल एक्टिविटी काफी कम होती जा रही है। यही कारण है कि बच्चों को हार्ट काफी कमजोर होते जा रहे हैं।
तनाव
तनाव सभी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम की जनक माना जाता है। इससे बड़े लोगों से लेकर छोटे बच्चे तक कोई अछूता नहीं है। जी हां स्कूल में पढ़ाई और होमवर्क के बोझ तले दबे छोटे बच्चे अक्सर तनाव में रहते हैं, जिससे उनका हार्ट कमजोर होने लगता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
