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बिखर जाएगा INDIA गठबंधन या अभी बची है उम्मीद? कांग्रेस और AAP बनी दुश्मन; इस नेता ने की भविष्यवाणी

Congress vs AAP: विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA का भविष्य क्या होगा? इस सवाल के जवाब के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा। लेकिन एक बाद तो साफ है आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक दूसरे की दुश्मन बन चुकी हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता ने दावा किया है कि जिस भावना के साथ 'इंडिया' ब्लॉक बनी थी, वह कायम है।

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खतरे में इंडिया गठबंधन।

Future of Opposition Alliance INDIA: क्या INDIA गठबंधन में शामिल दलों का साथ यहीं तक था? इस तरह के सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि कई पार्टियों के बीच मनमुटाव गहरा गया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक दूसरे की दुश्मन बन गई हैं। इधर ममता बनर्जी और अखिलेश यादव ने भी अरविंद केजरीवाल की आप का साथ देने का फैसला किया है। ऐसे में विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) के भविष्य पर चिंता बनी हुई है। अब ये जगजाहिर हो गया है कि इंडिया गठबंधन में दो फाड़ हो चुका है।

क्या होगा INDIA गठबंधन का भविष्य?

ये सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्षी दलों के गठबंधन ने भले ही बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। लेकिन संसद में विपक्ष की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ था। अगर विपक्षी दल बिखर जाते हैं, तो जाहिर है कि भविष्य में इंडिया गठबंधन की क्षमता पर भी इसका असर पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस ये राग अलाप रही है कि जिस भावना के साथ 'इंडिया' ब्लॉक बनी थी, वह कायम है। मगर जिस तरह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सिरफुटव्वल चल रही है, असलियत हर कोई समझता है।

विपक्षी गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया

'इंडिया' ब्लॉक में शामिल दलों में कमजोर हो रही गठजोड़ को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं दिग्गज कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने विपक्षी गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कहा, "बहुत समय पर एक रूटीन में मीटिंग नहीं होती। लेकिन जो फैसला जो भावनाएं लोकसभा से पहले थीं, जिसके तहत गठबंधन को बनाया गया था, वह कायम है। भारतीय जनता पार्टी देश हित के लिए सही नहीं है और नीतियां उनका कैसे विरोध किया जाए, कैसे सरकार को एक ही रास्ते में चलने के लिए मजबूर किया जाए।"

उन्होंने कहा, "हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जो सोचकर हिंदुस्तान को बनाया था, उसको भाजपा तोड़-मरोड़ रही है। उसे रोकने के हमने अलायंस के अस्तित्व की जरूरत है। हो सकता है कि अलग-अलग जगह पर पार्टी अपना अकेले चुनाव लड़े, मुझे लगता है कि इसी हिसाब से चल रहा है। हम आपस में मिलकर लड़ेंगे, यह हर जगह संभव नहीं हो सकता।"

आम आदमी पार्टी पर कांग्रेस का प्रहार

दिल्ली चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस नेता ने कहा, "आम आदमी पार्टी लगातार दो बार टर्म में आई है। अब यह साफ हो गया है कि यह आम आदमी पार्टी सिर्फ उनका नाम है, वे आम आदमी नहीं हैं। अब इस बार उनको लोग ठुकराएंगे, दूसरी तरफ भाजपा है। उनकी सोच क्या है? वे हिंदुस्तान को बदल देना चाहते हैं। वे इसकी शुरुआत दिल्ली से करना चाहते हैं। हर बात पर दंगे फैला देते हैं। एक-दूसरे के प्रति ऐसी भावनाएं पैदा करते हैं कि एक भाई दूसरे भाई से अलग हो जाए। इन सब चीजों को देखते हुए दिल्ली में लोग कांग्रेस को लाएंगे। वहां के लोगों को शीला दीक्षित की सरकार याद है।"

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 5 फरवरी को मतदान प्रस्तावित है। वहीं इसके नतीजे एक साथ 8 फरवरी को सामने आएंगे।

अब ये सवाल है कि आखिर जब कांग्रेस को ये बात मालूम है कि बहुत समय पर एक रूटीन में मीटिंग नहीं होती। पार्टियां एक दूसरे का विरोध कर रही हैं, तो आखिर इसे सुधारने का प्रयास क्यों नहीं हो रहा है? अगर ऐसे ही चलता रहा, तो विपक्षी दलों का गठबंधन कितने दिन और चल पाएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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