SAVE America Act: अमेरिका में नवंबर 2026 में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव होने हैं। महंगाई, ईरान युद्ध समेत कई मुद्दों की वजह से अमेरिकी जनता में ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि उनकी सरकार बेहतरीन काम कर रही है और अमेरिकी जनता उनके साथ खड़ी है।
इसी बीच शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए ट्रंप ने कई अहम दावे किए। उन्होंने कहा कि 2.78 लाख ऐसे लोग वोटर बने हुए हैं, जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान अमेरिका के 22 करोड़ मतदाताओं का डेटा अवैध तरीके से हासिल किया। इस डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी अन्य जानकारियां शामिल थीं।
अमेरिका में अवैध वोटर्स के खिलाफ ट्रंप ने बड़ी कार्रवाई का ऐलान भी किया है। इसके लिए उनकी सरकार 'SAVE America Act' (Safeguard American Voter Eligibility Act) लाने जा रही है। इस प्रस्तावित कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल अमेरिकी नागरिक ही वोटर के रूप में पंजीकरण करा सकें। रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसका समर्थन कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी इसके कई प्रावधानों का विरोध कर रही है।
ट्रंप ने 'SAVE अमेरिका एक्ट' पास कराने की मांग की है।
अगर यह कानून लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
यदि यह बिल कानून बन जाता है, तो वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता साबित करने के लिए आधिकारिक दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इसके लिए अमेरिकी पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र (Naturalization Certificate) या अन्य मान्य सरकारी दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही राज्यों की जिम्मेदारी होगी कि वे मतदाता सूची की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि उसमें केवल योग्य अमेरिकी नागरिकों के नाम ही शामिल हों। यदि कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता है, तो उसका वोटर पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
सेव अमेरिका एक्ट और वोटर आईडी में क्या अंतर है?
अक्सर लोग एक्ट और वोटर आईडी कानून को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग हैं। एक्ट, वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का प्रमाण मांगता है। दूसरी ओर, वोटर आईडी कानून मतदान वाले दिन मतदाता की पहचान सत्यापित करने के लिए पहचान पत्र दिखाने से जुड़े नियम हैं। यानी एक्ट इस बात पर केंद्रित है कि कौन वोटर बन सकता है, जबकि Voter ID इस पर कि वोट डालने कौन आया है।
अमेरिकी नागरिकों की फाइल फोटो। istock
ट्रंप इस कानून पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि अमेरिकी चुनावी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। उनका कहना है कि लाखों गैर-नागरिक मतदाता सूची में शामिल हैं और 2020 के चुनाव के दौरान चीन ने करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं का डेटा अवैध रूप से हासिल किया था। ट्रंप का मानना है कि इन खामियों को दूर करने के लिए SAVE America Act जरूरी है। हालांकि, उनके इन दावों को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस जारी है और कई दावों पर स्वतंत्र रूप से सवाल भी उठाए गए हैं।
वोटर आईडी से इसका क्या संबंध है?
अक्सर एक्ट और वोटर आईडी कानून को एक ही समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग हैं। यह एक्ट वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का प्रमाण मांगता है, जबकि Voter ID कानून मतदान के दिन पहचान पत्र दिखाने से जुड़े नियमों से संबंधित हैं। यानी एक्ट का फोकस इस बात पर है कि "कौन वोटर बन सकता है", जबकि Voter ID का फोकस इस बात पर है कि "वोट डालने कौन आया है।"
इस कानून के समर्थक क्या कहते हैं?
रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि यह कानून चुनावी सुरक्षा को मजबूत करेगा। उनके मुताबिक इससे केवल अमेरिकी नागरिक ही वोटर बन पाएंगे, चुनावी धोखाधड़ी की आशंका कम होगी और मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय बनेगी। उनका दावा है कि इससे चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
सेव अमेरिका एक्ट, अमेरिका में प्रस्तावित एक चुनावी कानून है। istock
डेमोक्रेटिक पार्टी इसका विरोध क्यों कर रही है?
डेमोक्रेटिक नेताओं और कई नागरिक अधिकार संगठनों का कहना है कि अमेरिका में गैर-नागरिकों द्वारा मतदान पहले से ही कानूनन प्रतिबंधित है और ऐसे मामले बेहद कम सामने आते हैं। उनका तर्क है कि लाखों अमेरिकी नागरिकों के पास जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यह कानून पात्र नागरिकों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन को कठिन बना सकता है और कई लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा कर सकता है।
सीनेट में क्यों अटका हुआ है बिल?
यह एक्ट प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से पारित हो चुका है, लेकिन इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी भी जरूरी है। सीनेट में इस बिल को पर्याप्त समर्थन मिलना आसान नहीं माना जा रहा है। यदि यह सीनेट से पारित हो जाता है, तो इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ यह कानून बन जाएगा।
अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग की फाइल फोटो। istock
2026 के चुनावों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि एक्ट लागू हो जाता है, तो अमेरिका में वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त हो जाएगी। नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य होगा और मतदाता सूची की जांच भी अधिक कड़ी होगी। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि विरोधियों का कहना है कि इससे लाखों योग्य नागरिकों के लिए मतदान प्रक्रिया कठिन हो सकती है। यही वजह है कि यह बिल अमेरिका की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।
