Sonam Wangchuk: लद्दाख की वादियों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। '3 इडियट्स' फिल्म के फुंशुक वांगडू के किरदार को प्रेरित करने वाले वांगचुक के इस भूख हड़ताल आंदोलन का आज 19वां दिन है। उनके स्वास्थ्य के पैरामीटर्स फिलहाल स्थिर हैं लेकिन धीरे-धीरे गिर रहे हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के अभिजीत दिपके के अनुसार, वांगचुक ने सरकार से सीधा सवाल पूछा है: सरकार हमसे संवाद करने से भी क्यों कतरा रही है? यह पूरी कहानी उस 'दोस्ताना' रिश्ते के टूटने की है जो कभी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सोनम वांगचुक के बीच हुआ करता था। आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि क्या है और यह रिश्ता 'वंडरफुल' से 'दुश्मनी' तक कैसे पहुंचा। जिस सरकार के वांगचुक चहेते थे, अब रिश्तों में इतनी बेरुखी क्यों है।
1. एक सुखद मुलाकात और फिर जमी बर्फ
साल 2023 के मार्च महीने में सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दिल्ली में मुलाकात की थी। तब मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को वंडरफुल यानी अद्भुत बताया था। लेकिन यह गर्माहट ज्यादा दिन नहीं टिकी। गीतांजलि आंगमो का आरोप है कि जब वह नवंबर 2024 में दोबारा धर्मेंद्र प्रधान से मिलीं, तो उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि जब तक वांगचुक लद्दाख की मांगों को उठाते रहेंगे, तब तक उनके संस्थान 'हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख' (HIAL) की यूजीसी (UGC) फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
जमीन का लीज रद्द: अगस्त 2025 में लद्दाख प्रशासन ने HIAL की 40 साल की भूमि लीज को रद्द कर दिया। वांगचुक ने इसे लद्दाख के लिए राज्य के दर्जे की आवाज उठाने के कारण सरकार द्वारा किया गया "विच-हंट" यानी जानबूझकर निशाना बनाना करार दिया।
2. 'कॉकरोच जनता पार्टी' का साथ और NEET विवाद
आज जंतर-मंतर पर वांगचुक जिस आंदोलन में बैठे हैं, वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। इस मांग के पीछे NEET-UG पेपर लीक और CBSE पेपर-चेकिंग में कथित गड़बड़ियों का हालिया विवाद तो है ही, साथ ही वांगचुक का व्यक्तिगत संघर्ष भी जुड़ा है। हालांकि, सरकार का रुख अब काफी कड़ा है। खुद धर्मेंद्र प्रधान ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली CJP को "आतंकवादियों की बी-टीम" करार दिया है, वहीं भाजपा नेता नितिन नबीन ने इन्हें देश को बांटने वाली वायरस और कॉकरोच जैसी पार्टियां कहा है।
3. धारा 370 के समर्थन से NSA के तहत जेल तक
साल 2019 में जब लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाया गया था, तब वांगचुक ने इसका स्वागत किया था और प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया था। लेकिन धीरे-धीरे स्थितियां बदलीं। जब लद्दाख के लोगों को अपनी जमीन और नौकरियों के छिनने का डर सताने लगा, तो वहां के संगठनों (LAB और KDA) ने चार मुख्य मांगें उठाईं—पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, लोकसभा सीटें और एक समर्पित लोक सेवा आयोग।
हिंसा और जेल: सितंबर 2025 में लेह में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और भाजपा दफ्तर को फूंक दिया गया। गृह मंत्रालय ने वांगचुक के भाषणों को नेपाल-बांग्लादेश जैसे 'यूथ-प्रोटेस्ट' को भड़काने वाला माना और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया। वांगचुक को करीब 6 महीने जोधपुर जेल में गुजारने पड़े और वह मार्च 2026 में रिहा हुए।
4. लद्दाख की स्वायत्तता पर समझौते की उम्मीद
इस साल अप्रैल-मई में गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे और उसके बाद हुई बैठकों में सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा: केंद्र सरकार और लद्दाख के संगठनों के बीच 'अनुच्छेद 371' (Article 371) के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।
एक अनूठा ढांचा
हाल ही में केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि लद्दाख के सभी सात जिलों के लिए एक-एक हिल काउंसिल (पर्वतीय परिषद) होगी और एक शीर्ष 'UT-स्तरीय निकाय' बनाया जाएगा, जो देश में अपनी तरह का पहला और अनूठा ढांचा होगा। हालांकि वांगचुक ने अभी तक सरकार के इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है और वह अब भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं।