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हिमाचल के सरकारी स्कूल अगले शैक्षणिक सत्र से अपनाएंगे CBSE सिलेबस, पढ़ें पूरी खबर

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया है कि राज्य सरकार अब सरकारी स्कूलों में भी CBSE का पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है। इस निर्णय से सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी प्राइवेट स्कूलों जैसी अच्छी शिक्षा मिल सकेगी।

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HP Schools to Adopt CBSE Curriculum

Himachal Government Schools to Adopt CBSE Curriculum: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बहुत अच्छी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया है कि राज्य सरकार अब सरकारी स्कूलों में भी सीबीएसई (CBSE) का पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है और सोलन जिले के दून विधानसभा क्षेत्र के तीन सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर अपग्रेड कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी प्राइवेट स्कूलों जैसी अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। इस बारे में और जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि प्रदेश भर के 151 सरकारी स्कूलों को अगले पढ़ाई के सीजन यानी शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम चलाने के लिए मान्यता मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि दून के जिन तीन स्कूलों को अपग्रेड किया गया है, उसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण इलाकों के बच्चों को होगा। उन्हें अब प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस दिए बिना ही, बहुत कम खर्च पर सीबीएसई की क्वालिटी वाली शिक्षा अपने घर के पास ही मिल जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है और बाकी खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों को आधुनिक बनाने और हर बच्चे तक संतुलित शिक्षा पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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शिक्षकों की ट्रेनिंग और मानसिकता में बदलाव की चुनौती

सीबीएसई का पाठ्यक्रम राज्य बोर्ड (एचपी बोर्ड) से काफी अलग और ज्यादा एक्टिविटी पर आधारित होता है। सिर्फ किताबें बदल देने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा। सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा सरकारी शिक्षकों को सीबीएसई के पैटर्न के हिसाब से पढ़ाने के लिए तैयार करना है। इसके लिए उन्हें बड़े स्तर पर स्पेशल ट्रेनिंग देनी होगी। साथ ही, शिक्षकों को अपनी पुरानी शिक्षण पद्धति को छोड़कर नए और आधुनिक तरीकों को अपनाना होगा, जो एक लंबी प्रक्रिया है।

ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच की खाई (डिजिटल डिवाइड)

सीबीएसई पाठ्यक्रम में अक्सर प्रोजेक्ट वर्क, इंटरनेट रिसर्च और डिजिटल टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल होता है। शहरों के बच्चों के पास तो ये सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में इंटरनेट और कंप्यूटर की भारी कमी है। अगर सरकार ने पाठ्यक्रम लागू करने से पहले गांवों के स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं किया, तो ग्रामीण छात्र शहरों के मुकाबले पिछड़ सकते हैं और इस फैसले का असली मकसद पूरा नहीं हो पाएगा।

प्राइवेट स्कूलों के दबदबे को सीधी टक्कर

अब तक ग्रामीण इलाकों के जो अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए अपनी क्षमता से बाहर जाकर प्राइवेट स्कूलों की महंगी फीस भरते थे, उनके लिए यह फैसला एक बड़ी राहत है। अगर सरकारी स्कूल सचमुच सीबीएसई पैटर्न पर अच्छी पढ़ाई देने में कामयाब रहे, तो इससे प्राइवेट स्कूलों का दबदबा कम होगा और शिक्षा के क्षेत्र में एक स्वस्थ मुकाबला शुरू होगा। इससे अंततः आम जनता को ही फायदा पहुंचेगा।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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