FIFA World Cup Trophy: फीफा विश्व कप ट्रॉफी सिर्फ सोने का एक कप नहीं है, बल्कि करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों के सपनों, खिलाड़ियों की मेहनत और जीत की सबसे बड़ी पहचान है। हर चार साल में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम इसे उठाने के लिए मैदान पर अपना सबकुछ झोंक देती है।
अमेरिका में चल रहे मौजूदा विश्व कप में रविवार को यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी अर्जेंटीना और स्पेन में से किसी एक के हाथों में होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ट्रॉफी का इतिहास भी उतना ही रोमांचक है जितना विश्व कप का फाइनल? यह ट्रॉफी दो बार चोरी हो चुकी है, एक बार इसे एक कुत्ते ने ढूंढ़ निकाला था और एक ट्रॉफी आज तक लापता है।
फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी की फाइल फोटो।
एक कलाकार ने ट्रॉफी में समेट दीं जीत की तीन भावनाएं
मौजूदा फीफा विश्व कप ट्रॉफी का डिजाइन इटली के प्रसिद्ध मूर्तिकार सिल्वियो गजानिगा ने तैयार किया था। उन्होंने इस सर्पिलाकार आकृति में फुटबॉल की तीन सबसे बड़ी भावनाओं को दिखाने की कोशिश की खिलाड़ियों का संघर्ष, प्रशंसकों का उल्लास और जीत का यादगार क्षण।
जब 1970 में ब्राजील ने अपना तीसरा विश्व कप जीतकर पुरानी ट्रॉफी पर स्थायी अधिकार हासिल कर लिया, तब फीफा ने नई ट्रॉफी के डिजाइन के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की। इसी प्रतियोगिता में सिल्वियो गजानिगा का डिजाइन चुना गया। उन्होंने इटली के मिलान शहर के ब्रेरा इलाके स्थित अपने स्टूडियो में इस ट्रॉफी को डिजाइन किया था।
इटली के प्रसिद्ध मूर्तिकार सिल्वियो गजानिगा ने तैयार किया था मौजूदा ट्रॉफी का डिजाइन।
दो इंसान... और उनके हाथों में पूरी दुनिया
आज यह ट्रॉफी दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की पहचान बन चुकी है। इसका डिजाइन बेहद खास है। इसमें दो मानव आकृतियां पृथ्वी को अपने हाथों में उठाए हुए दिखाई देती हैं, जो पूरी दुनिया को एकजुट करने वाले फुटबॉल के संदेश का प्रतीक मानी जाती हैं। सिल्वियो गजानिगा का 2016 में निधन हो गया था। उनके बेटे जियोर्जियो गजानिगा ने बताया कि ट्रॉफी का अंतिम डिजाइन तैयार करने से पहले उनके पिता ने कई अलग-अलग स्केच बनाए थे। कई प्रयोगों के बाद उन्होंने वही डिजाइन चुना, जो आज दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित खेल ट्रॉफी बन चुका है।
अर्जेंटिना ने जीता था फीफा वर्ल्ड कप 2022 का खिताब। AP
पहले कैसी थी विश्व कप ट्रॉफी?
पहले विश्व कप (1930) के लिए बनाई गई ट्रॉफी आज की ट्रॉफी से बिल्कुल अलग थी। उस ट्रॉफी पर यूनान की विजय की देवी 'नाइकी' की आकृति बनी हुई थी। टूर्नामेंट के संस्थापक के सम्मान में इसका नाम 'जूल्स रिमेट ट्रॉफी' रखा गया था। ब्राजील ने तय नियमों के अनुसार तीन बार विश्व कप जीतने वाला पहला देश बनकर इस ट्रॉफी पर हमेशा के लिए अधिकार हासिल कर लिया। इसके बाद फीफा को नई ट्रॉफी बनानी पड़ी।
जब विश्व कप ट्रॉफी पहली बार चोरी हो गई...
विश्व कप ट्रॉफी का इतिहास सिर्फ जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चोरी की भी दिलचस्प कहानियां शामिल हैं। 1966 में इंग्लैंड में विश्व कप आयोजित हुआ था। पहली बार ट्रॉफी को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया, लेकिन वहीं से वह चोरी हो गई। इसके बाद फीफा के मुताबिक, 'पिकल्स' नाम के एक कुत्ते ने दक्षिण लंदन की एक झाड़ी के नीचे ट्रॉफी को खोज निकाला।
देखते ही देखते यह कुत्ता दुनिया भर में मशहूर हो गया। 1970 में ब्राजील के ट्रॉफी पर स्थायी अधिकार मिलने के बाद उसे ब्राजील फुटबॉल महासंघ के मुख्यालय में रखा गया, लेकिन 1983 में यह ट्रॉफी वहां से भी चोरी हो गई।सबसे हैरानी की बात यह है कि आज तक वह ट्रॉफी बरामद नहीं हो सकी। माना जाता है कि चोरों ने उसे पिघला दिया था।
18 कैरेट सोने से बनी है फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी।
आज की ट्रॉफी में क्या है खास?
विश्व कप फाइनल जीतने के बाद कप्तान जिस ट्रॉफी को उठाता है, उसकी अपनी अलग खासियत है।
- ऊंचाई 36 सेंटीमीटर (14 इंच)
- 18 कैरेट सोने से बनी
- नीचे हरे रंग के दो छल्ले, जो फुटबॉल के मैदान का प्रतीक माने जाते हैं।
क्या विजेता टीम ट्रॉफी अपने पास रख सकती है?
इस सवाल का जवाब है नहीं है। विश्व कप खत्म होने के बाद मूल ट्रॉफी फीफा को वापस करनी होती है। इसे फीफा अपने स्विट्जरलैंड स्थित मुख्यालय में सुरक्षित रखता है। विजेता टीम को अपने देश ले जाने के लिए सोने की परत चढ़ी हुई एक प्रतिकृति (Replica) दी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि पहले नियम था कि जो टीम तीन बार विश्व कप जीतेगी, वह मूल ट्रॉफी अपने पास रख सकेगी। इसी नियम के तहत ब्राजील ने जूल्स रिमेट ट्रॉफी अपने पास रखी थी। हालांकि, फीफा ने अब यह नियम बदल दिया है। अब कोई भी टीम, चाहे कितनी भी बार विश्व कप जीते, मूल फीफा विश्व कप ट्रॉफी अपने पास स्थायी रूप से नहीं रख सकती।
