चांद पर जाने की होड़ लगी है, इंसानी बस्तियां बसाने की तैयारियां चल रही है। ऐसे में जब ये खबर आती है कि चांद से एक रॉकेट टकरा गया तो अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सुरक्षा और भविष्य पर सवाल उठने लगता है, ये रॉकेट उस स्पेसएक्स (SpaceX) का था, जो NASA के साथ मिलकर चांद और मंगल पर बस्तियां, स्थाई बेस बनाने जा रहा है। ऐसे रॉकेट बना चुका है जो अंतरिक्ष में जाकर वापस धरती पर आ सके, लेकिन उसी का रॉकेट अनियंत्रित होकर चांद से टकरा जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। यह सवाल जितना स्पेसएक्स के मिशनों पर है, उतना ही चांद पर स्पेस कचरे, रॉकेट के टकराने से पैदा होने वाले दुष्प्रभाव को लेकर भी है। आइए इसी को समझने का प्रयास करते हैं।
क्यों और कैसे चांद से टकराया स्पेस एक्स का रॉकेट?
AP की रिपोर्ट के अनुसार स्पेसएक्स का एक पुराना रॉकेट, जो करीब एक साल से अंतरिक्ष में भटक रहा था, आखिरकार चांद से टकरा गया। यह हादसा भले ही पहले से अनुमानित था, लेकिन इसने एक बार फिर 'लूनर लिटर' (Lunar Litter) यानी चांद पर बढ़ते अंतरिक्ष कचरे की समस्या को चर्चा में ला दिया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जनवरी 2025 में स्पेसएक्स के फाल्कन रॉकेट ने दो निजी चंद्र मिशनों-ब्लू घोस्ट और रेजिलिएंस-को लॉन्च किया था। मिशन पूरा करने के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया। समय के साथ सूर्य की गतिविधियों और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उसका रास्ता बदल गया और वह चांद की ओर बढ़ने लगा। आखिरकार बुधवार को वह करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद से टकरा गया।

जहां टकराया स्पेस एक्स का रॉकेट (फोटो- NASA)
क्या किसी ने यह टक्कर देखी?
नहीं। इतनी तेज रफ्तार से हुई इस टक्कर को किसी ने सीधे नहीं देखा। हालांकि, चिली में स्थित एक शक्तिशाली टेलीस्कोप ने टक्कर के बाद उठे मलबे के गुबार को रिकॉर्ड किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि रॉकेट चांद से टकराया। यह पहली बार नहीं है जब कोई रॉकेट चांद से टकराया हो। साल 2022 में चीन के एक पुराने रॉकेट का हिस्सा भी अनजाने में चांद से टकरा गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले कई दशकों में भी कई रॉकेट चांद पर गिरे होंगे, लेकिन उस समय उनकी जानकारी नहीं मिल पाई। बोस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि टक्कर के बाद सोडियम और लिथियम गैसों की एक लंबी धारा अंतरिक्ष में दिखाई दी, जो लगभग 5 से 10 मिनट तक बनी रही। इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने रॉकेट की दिशा का अध्ययन कर अनुमान लगा लिया था कि वह सीधे चांद की ओर बढ़ रहा है।
आखिर रॉकेट चांद से टकराया क्यों?
स्पेसएक्स के मुताबिक यह कोई योजनाबद्ध टक्कर नहीं थी। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में छोड़ दिया गया था। बाद में सूर्य की गतिविधियों और चंद्रमा व पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के संयुक्त प्रभाव से उसकी कक्षा बदल गई और वह चांद से टकरा गया।
'लूनर लिटर' क्या है?
जिस तरह पृथ्वी की कक्षा में हजारों निष्क्रिय उपग्रह और रॉकेट के टुकड़े घूम रहे हैं, उसी तरह अब चांद पर भी मिशनों का मलबा जमा होने लगा है। इसे लूनर लिटर कहा जाता है। इसमें पुराने रॉकेट, लैंडर, उपकरण और मिशनों के छोड़े गए हिस्से शामिल होते हैं।

स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट की लॉन्चिंग (फोटो- AP)
क्यों बढ़ रही चिंता?
आने वाले वर्षों में अमेरिका, चीन और कई निजी कंपनियां चांद पर लगातार मिशन भेजने वाली हैं। नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अगर अंतरिक्ष में छोड़े गए पुराने रॉकेट और अन्य मलबा लगातार चांद से टकराता रहा, तो भविष्य के मिशनों के लिए खतरा बढ़ सकता है। टक्कर से उठने वाली धूल और चट्टानों के टुकड़े आसपास के उपकरणों और लैंडरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
क्या स्पेसएक्स भविष्य में ऐसे हादसे रोकेगा?
स्पेसएक्स ने कहा है कि वह नासा के साथ मिलकर ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे भविष्य में इस्तेमाल किए गए रॉकेट सुरक्षित तरीके से नष्ट किए जा सकें या नियंत्रित ढंग से उनकी यात्रा समाप्त हो। कंपनी का कहना है कि यह हादसा पूरी तरह अनजाने में हुआ।
आगे क्या होगा?
अब वैज्ञानिकों की नजर नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर पर है। यह अंतरिक्ष यान जल्द ही उस जगह के ऊपर से गुजरेगा, जहां रॉकेट के टकराने का अनुमान है। उसके द्वारा भेजी गई तस्वीरों से यह पता चल सकेगा कि टक्कर के बाद चांद की सतह पर कितना बड़ा गड्ढा बना और कितना मलबा फैला।
