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अमेरिका में बनेगी 'AI Force', तैनात होगा AI Czar; क्या है ट्रंप का 'एआई फौज' बनाने वाला प्लान

AI Force: अमेरिका एआई, को आर्थिक, सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा की रणनीतिक ताकत बना रहा है। इसी बीच ट्रंप ने एआई फोर्स और एआई जार (AI Czar) बनाने का ऐलान किया है। एआई के सैन्य इस्तेमाल और स्वायत्त हथियारों को लेकर बहस जारी है। आइए जानते हैं कि आखिर ट्रंप का एआई फोर्स प्लान क्या है।

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Trump AI Force: Space Force की तर्ज पर बनेगी एआई फोर्स। AI IMAGE
Authored by: पीयूष कुमार
Updated Sep 20, 2026, 13:27 IST
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दुनिया के सभी देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की रेस में पीछे नहीं रहना चाहते क्योंकि भविष्य में एआई एक ऐसा हथियार बनने जा रहा है, जिसके जरिए कोई भी देश शक्तिशाली होने का दम भर सकता है।

एआई अब सिर्फ चैटबॉट, तस्वीर बनाने वाले टूल या ऑफिस का काम आसान करने वाली तकनीक नहीं रह गई है। अमेरिका इसे आने वाले दौर की आर्थिक, तकनीकी और राष्ट्रीय सुरक्षा की ताकत के तौर पर देख रहा है। दुनिया के सभी देश एआई की रेस में पीछे नहीं छूटना चाहते क्योंकि भविष्य में एआई एक ऐसा हथियार बनने जा रहा है, जिसके जरिए कोई भी देश शक्तिशाली होने का दम भर सकता है।

यही वजह है कि वॉशिंगटन एआई को लेकर एक साथ कई मोर्चों पर तैयारी कर रहा है। एआई कंपनियों को बढ़ावा देने से लेकर बड़े डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक, सेना और इंटेलिजेंस में एआई के इस्तेमाल से लेकर चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा तक।

ट्रंप का AI फोर्स वाला प्लान

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका एक एआई फोर्स (AI Force) बनाएगा, जिसकी तुलना उन्होंने अपनी पहली राष्ट्रपति अवधि में बनाई गई स्पेस फोर्स (Space Force) से की है। इसके साथ ही ट्रंप जल्द ही एक “AI Czar” नियुक्त करने की बात भी कह चुके हैं, जो देश में एआई से जुड़े विकास और नीतियों की निगरानी करेगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित एआई फोर्स का वास्तविक ढांचा, बजट, अधिकार और सरकारी व्यवस्था में स्थान क्या होगा।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि वह AI को खत्म या कमजोर करने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इसके लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका में AI के खिलाफ ऐसी कोशिशें हो रही हैं, जिन्हें वह रोकेंगे।

ट्रंप ने अपनी नई योजना की तुलना स्पेस फोर्स से की, जिसे उनके पहले कार्यकाल के दौरान बनाया गया था। उन्होंने स्पेस फोर्स को सफल बताते हुए कहा कि AI के क्षेत्र में भी अमेरिका को इसी तरह की एक विशेष व्यवस्था की जरूरत है। ट्रंप के मुताबिक जल्द ही AI फोर्स की कमान संभालने वाले AI Czar के नाम की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पद के लिए ऐसे लोगों को चुना जाएगा जो बेहद हाई लेवल की इंटेलिजेंस रखते हों।

ट्रंप ने नया एआई सलाहकार यानी एआइ जार नियुक्त करने का ऐलान किया है। (AI-generated)

ट्रंप ने नया एआई सलाहकार यानी एआइ जार नियुक्त करने का ऐलान किया है। (AI-generated)

स्पेस फोर्स से अलग है एआई फोर्स

आसान भाषा में समझें तो ट्रंप अमेरिका में एआई को सिर्फ एक तकनीकी या कारोबारी क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक क्षमता के तौर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनका प्रस्तावित एआई फोर्स (AI Force) इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

ट्रंप ने एआई फोर्स की तुलना स्पेस फोर्स से की है। स्पेस फोर्स, अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं की एक अलग शाखा है, जिसे ट्रंप के पहले कार्यकाल में कांग्रेस की मंजूरी के बाद बनाया गया था। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि नया एआई फोर्स भी सेना की एक स्वतंत्र शाखा होगा या फिर किसी मौजूदा सरकारी एजेंसी के तहत काम करने वाला संगठन।

AI Czar कौन होगा और उसका काम क्या हो सकता है?

ट्रंप ने एक एआई जार (AI Czar) नियुक्त करने की भी घोषणा की है। जार (Czar) शब्द अमेरिका में आमतौर पर ऐसे वरिष्ठ अधिकारी के लिए इस्तेमाल होता है, जिसे किसी खास क्षेत्र में सरकार की नीतियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी जाती है।

एआई जार की संभावित भूमिका AI से जुड़ी सरकारी नीतियों को एक दिशा देना, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल कराना और AI के विकास से जुड़े फैसलों की निगरानी करना हो सकती है। हालांकि, ट्रंप ने अभी इस पद की विस्तृत जिम्मेदारियां या नियुक्ति की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है।

अमेरिका एआई को लेकर इतना गंभीर क्यों है?

दरअसल, एआई अब केवल चैटबॉट या कंटेंट बनाने वाली तकनीक तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल साइबर सुरक्षा, खुफिया जानकारी, सैन्य योजना, लॉजिस्टिक्स, लक्ष्य पहचान और हथियार प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।

जून 2026 में ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने के लिए एक नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरैंडम जारी किया था। इसमें अमेरिकी सैन्य और खुफिया तंत्र में अत्याधुनिक एआई सिस्टम तेजी से अपनाने, हाई-सिक्योरिटी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और AI विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया था। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि एआई का प्रभाव भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा हो सकता है।

OpenAI, Anthropic, Google और xAI जैसे कंपनियों के प्रमुखों की फोटो।  (AI-generated)

OpenAI, Anthropic, Google और xAI जैसे कंपनियों के प्रमुखों की फोटो। (AI-generated)

एआई से युद्ध का तरीका कैसे बदल सकता है?

एआई सेना के लिए कई काम बेहद तेजी से कर सकता है। उदाहरण के लिए, बड़ी मात्रा में खुफिया डेटा का विश्लेषण, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, सैनिकों और हथियारों की लॉजिस्टिक्स तथा संभावित लक्ष्यों की पहचान में एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिकी प्रशासन ने भी कहा है कि एआई का इस्तेमाल युद्ध के मैदान में निर्णय लेने में सहायता देने और ऑपरेशन की गति बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा होता है। अगर एआई किसी लक्ष्य की पहचान करे तो अंतिम फैसला इंसान करेगा या मशीन?

ट्रंप प्रशासन के जून 2026 के निर्देश में एआई सिस्टम के इस्तेमाल में कमांड की स्पष्ट जिम्मेदारी और नियंत्रण बनाए रखने पर जोर दिया गया था। साथ ही ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम्स से जुड़े नियमों को अपडेट करने का निर्देश भी दिया गया।

एआई फोर्स से जुड़ी अहम जानकारी। AI IMAGE

एआई फोर्स से जुड़ी अहम जानकारी। AI IMAGE

क्या एआई खुद तय करेगा कि किस पर हमला करना है?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि प्रस्तावित एआई फोर्स का मतलब AI को स्वतंत्र रूप से युद्ध करने की शक्ति देना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस योजना का ढांचा अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

हालांकि, एआई के सैन्य इस्तेमाल को लेकर यह बहस पहले से चल रही है कि मशीन किसी लक्ष्य को पहचान सकती है, लेकिन घातक बल इस्तेमाल करने का अंतिम अधिकार इंसान के नियंत्रण में रहना चाहिए या नहीं और उस नियंत्रण की सीमा क्या होनी चाहिए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने भी एआई के इस्तेमाल में मानव नियंत्रण और सावधानी की जरूरत पर जोर दिया है।

एआई फोर्स के पीछे चीन का फैक्टर भी अहमअमेरिका और चीन के बीच एआई को लेकर वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। एआई में बढ़त का मतलब सिर्फ बेहतर चैटबॉट बनाना नहीं है। इसका असर सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा, सैन्य तकनीक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा तक हो सकता है। ट्रंप की एआई नीति में अमेरिकी एआई उद्योग को तेजी से आगे बढ़ाने की सोच दिखाई देती है।

उनका प्रशासन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। यही वजह है कि एआई फोर्स को केवल तकनीकी पहल के बजाय अमेरिका की व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

क्या एआई मुसीबत भी बढ़ा सकता है?

एआई की क्षमता जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इसके जोखिमों पर भी चर्चा हो रही है। कुछ एआई विशेषज्ञों और टेक इंडस्ट्री के नेताओं ने अधिक शक्तिशाली AI सिस्टम के संभावित खतरों और सुरक्षा उपायों की जरूरत पर चिंता जताई है। खास चिंता उन सिस्टम को लेकर है, जो इंसानी निर्देश के बिना कुछ कार्य करने में सक्षम हों। सैन्य क्षेत्र में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होने पर गलती की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी चुनौती बन सकता है।

दूसरी तरफ, ट्रंप एआई विकास पर ज्यादा प्रतिबंध लगाने के विचार के आलोचक रहे हैं। उनके हालिया प्रस्ताव में एआई के विकास को बाधित न करने की बात सामने आई है, जबकि कानून और मौजूदा आपराधिक तथा सिविल न्याय व्यवस्था के जरिए गलत इस्तेमाल से निपटने की बात कही गई है।

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