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Uttarakhand Uniform Civil Code: सभी धर्मों के लिए तलाक और बहु-विवाह के नए नियम; जानिए उत्तराखंड में अब क्या बदलेगा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 6, 2024, 04:13 PM IST

uniform civil code divorce Law, Multiple Marriage Law in india: समान नागरिक संहिता में किए गए प्रावधानों के तहत सभी धर्मों के लिए तलाक का एक समान अधिकार होगा। आइए जानते हैं इसमें और क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं।

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समान नागरिक संहिता

Photo : Times Now Digital

uniform civil code on marriage in Uttarakhand: समान नागरिक संहिता विधेयक को उत्तराखंड विधानसभा में पेश कर दिया गया है। इस विधेयक के कानून में बदल जाने के बाद सभी धर्मों, समुदायों के लिए तलाक देने का तरीका एक समान हो जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो किसी भी धर्म या समुदाय के पति-पत्नि को तलाक लेने के लिए कोर्ट का ही रुख करना होगा। विधानसभा में पेश किए गए विधेयक में सभी के लिए तलाक का समान आधार रखा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) एक ऐसा कानून होगा, जो जाति से परे, धर्म से परे, यहां तक कि आप स्त्री हैं या पुरुष, इससे भी परे होगा। यह सभी के लिए एक समान होगा।

आइए जानते हैं उत्तराखंड विधानसभा में पेश किए गए समान नागरिक संहिता विधेयक तलाक के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं? सभी धर्मों के लिए तलाक का आधार क्या होगा? तलाक को लेकर बना कानून किन लोगों पर और कैसे लागू होगा? आइए प्वाइंटर्स के माध्यम से समझते हैं

  • किसी भी लड़के या लड़की को शादी के तुरंत बाद तलाक की सुविधा नहीं होगी। चाहें वे किसी भी धर्म-जाति के हों।
  • तलाक के लिए शादी की एक साल की अवधि पूरी करनी होगी, उसके बाद ही कोर्ट में अर्जी दायर की जा सकेगी।
  • कानूनी तौर पर हिंदू या मुसलमान को तलाक के लिए एक प्रकार की प्रक्रिया से गुजरना होगा। कूलिंग पीरियड 6 महीने का होगा।
  • न्यायालय द्वारा तलाक का भी पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। कानून लागू होने से पहले हुए तलाक का भी पंजीकरण किया जा सकता है।
  • पहले से शादीशुदा व्यक्ति को बिना तलाक लिए दूसरी शादी की इजाजत नहीं दी जाएगी।
  • अगर कोई व्यक्ति बिना तलाक के शादी करता है तो उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
  • तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग अलग ग्राउंड हैं।
  • तलाक-ए-हसन , तलाक-ए-अहसन, तलाक-ए-बाईन, तलाक-ए-किनाया खत्म होंगे।

कानून के उल्लंघन पर क्या है प्रावधान

  • कानून की धारा 4 के उल्लंघन पर छह महीने की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माना।
  • धारा 29 के उल्लंघन पर तीन साल की कैस व जुर्माना।
  • तलाक लिए बिना पुनर्विवाह करने पर तीन साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना।
  • जुर्माना न देने पर छह महीने कैद की अवधि बढ़ाई जाएगी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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