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ट्रंप जीतें या कमला हैरिस... दुनिया की एक ताकतवर कुर्सी पर होगी भारत की छाप; जानिए क्या हैं अमेरिका के समीकरण

US Presidential Election 2024: अगर कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बनती हैं दो बड़ी घटनाएं होंगी-पहली यह कि ऐसा पहली बार होगा, जब अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई महिला बैठेगी और दूसरी यह कि पहली बार कोई भारतवंशी अमेरिका का राष्ट्रपति बनेगा। वहीं, अगर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनते हैं तो उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस होंगे, जिनका भारत से गहरा कनेक्शन है।

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US Presidential Election

Photo : AP

US Presidential Election 2024: अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर दुनिया की नजर है। राष्ट्रपति की दौड़ से जो बाइडन के हटने के बाद यह जंग और भी दिलचस्प हो गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से भारतवंशी कमला हैरिस राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार की रेस में सबसे आगे हैं। जो बाइडन ने भी उनका समर्थन किया है। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और अमेरिकी संसद की पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी ने भी उनका समर्थन किया है। कमला हैरिस राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनती हैं तो उनका मुकाबला डोनाल्ड ट्रंप से होगा, जिन पर हमले के बाद उनकी लोकप्रियता और भी ज्यादा बढ़ गई है।

हालांकि, कमला हैरिस के लिए यह मुकाबला आसान नहीं होगा। क्योंकि, ट्रंप ने बीते दिनों एक लाइव डिबेट में जिस तरह बाइडन को पछाड़ा था, उससे उनका उत्साह चरम पर है। वहीं, खुद पर हुए हमले के बाद वह और भी ज्यादा आक्रामक और लोकप्रिय हो गए हैं। बरहराल, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में कोई भी जीते, दुनिया की एक ताकतवर कुर्सी पर भारत की छाप रहने वाली है। आइए समझते हैं कैसे...

राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति एक का कनेक्शन भारत से ही

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव नवंबर में होने हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से कमला हैरिस के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनने की सबसे ज्यादा संभावना है। कमला भारतीय मूल की हैं और उनकी मां का नाम श्यामा गोपालन है, जो तमिल बायोलॉजिस्ट हैं। अगर वह राष्ट्रपति का चुनाव जीतती हैं तो दो बड़ी घटनाएं होंगी। पहली यह कि ऐसा पहली बार होगा, जब अमेरिका के राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई महिला बैठेगी और दूसरी यह कि पहली बार कोई भारतवंशी अमेरिका का राष्ट्रपति बनेगा। वहीं, अगर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनते हैं तो उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस होंगे, जिनका भारत से गहरा कनेक्शन है।

जेसी वेंस का भारत से कनेक्शन

डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की ओर से जेडी वेंस उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। उनकी पत्नी ऊषा चिलुकुरी भारतीय मूल की हैं। ऊषा चिलुकुरी आंध्र प्रदेश के भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं, जो कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में बस गए थे। उनके पिता के एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीव विज्ञानी हैं। 2014 में जेडी वेंस ने ऊषा चिलुकुरी से भारतीय रीति-रिवाज से शादी कर ली थी। दोनों के तीन बच्चे हैं। जिसमें दो बेटे इवान और विवेक हैं और एक बेटी, जिसका नाम मिराबेल है।

कमला हैरिस को मिला पर्याप्त समर्थन

वहीं, कमला हैरिस ने राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित उम्मीदवार बनने के लिए पर्याप्त डेलीगेट (प्रतिनिधि) का समर्थन हासिल कर लिया है। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति को संभावित प्रतिद्वंद्वियों, सांसदों, गवर्नर और प्रभावशाली समूहों से समर्थन मिला था। सीएनएन की खबर के मुताबिक, भारतीय-अफ्रीकी मूल की हैरिस को 1976 डेलीगेट का समर्थन मिल गया है जो राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा है। हैरिस ने कहा, जब मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपने अभियान की घोषणा की थी, तो मैंने कहा था कि मैं यह नामांकन हासिल करना चाहती हूं। आज रात, मुझे इस बात पर गर्व है कि मुझे हमारी पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए आवश्यक समर्थन मिल गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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