US Iran Conflict: न मांझी, न रहबर, न हक में हवाएं, है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है। मौजूदा दौर में दीक्षित दनकौरी की ये शेर अमेरिका और ईरान के रिश्तों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। आठ दिन भी नहीं हुए और अमेरिका-ईरान शांति समझौते की धज्जियां उड़ गईं। दोनों देशों ने एक दूसरे पर हमले की शुरुआत कर दी। ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया है कि ईरानी तटों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में उसकी नौसेना ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर की गई जवाबी एयरस्ट्राइक के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दे दी। जेडी वेंस ने दो टूक कहा, "हिंसा का जवाब हमेशा हिंसा से ही दिया जाएगा।"
संघर्ष के साये में शांति कैसे स्थापित होगी? इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है, लेकिन ये जरूर है कि बहरीन में मौजूद यूएस बेस पर ईरानी हमलों ने 'सुपरपावर अमेरिका' को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया। हाल ही में बहरीन में मौजूद अमेरिका के एक बेहद अहम सैन्य ठिकानों पर ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमलों किए। गनीमत रही कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई।
बता दें कि बहरीन में मौजूद नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन (NSA Bahrain) अमेरिका की नौसेना के फिफ्थ फ्लीट (US Fifth Fleet) का मुख्यालय है। यही ठिकाना खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी समुद्री अभियानों, सैन्य निगरानी और ऑपरेशनल फैसलों का बड़ा केंद्र माना जाता है। इसे अमेरिका के सबसे अहम विदेशी सैन्य ठिकानों में गिना जाता है।

ईरानी मिसाइल ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी बेस को बनाया निशाना। AP
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी से जून के बीच ईरान ने कई चरणों में ड्रोन और मिसाइल हमले किए। अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को रोका, लेकिन कुछ हमले लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। रिपोर्टों में दावा किया गया कि बेस के कमांड क्षेत्र, कई इमारतों और कुछ संचार प्रणालियों को नुकसान पहुंचा। नुकसान की पूरी सीमा पर आधिकारिक पुष्टि सीमित रही है। अमेरिकी सेना का कहना है कि पहले से सतर्कता बरतते हुए सैनिकों और स्टाफ का बड़ा हिस्सा सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया था, इसलिए जनहानि सीमित रही।
यूएस मुख्यालय को हुआ भारी नुकसान
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी से जून के बीच हुए हमलों में बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के प्रमुख अड्डे, नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन को भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमलों में कमांड मुख्यालय, कम से कम 12 इमारतें और दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने नुकसान की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
यह बेस अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट का प्रमुख संचालन केंद्र है और पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी के लिए बेहद रणनीतिक माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के बावजूद किसी बड़े सैन्य अभियान पर सीधा असर नहीं पड़ा, क्योंकि एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में सैनिकों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बहरीन के अलावा क्षेत्र में मौजूद करीब 20 अमेरिकी सैन्य और राजनयिक ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिका अब अपनी पूरी रक्षा और तैनाती रणनीति का नए सिरे से आकलन कर रहा है।

बहरीन में मौजूद अमेरिकी एयरबेस की फोटो। AP
क्या बदल सकती है पेंटागन की रणनीति?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हालात को देखते हुए कई बड़े रणनीतिक बदलावों पर चर्चा चल रही है। इनमें बहरीन स्थित सैन्य बेस के ढांचे को नए सिरे से तैयार करना, कुवैत और सऊदी अरब में तैनात सैनिकों की संख्या का पुनर्मूल्यांकन करना और कुछ सैन्य अभियानों को अपेक्षाकृत सुरक्षित पश्चिमी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित करना शामिल है। इसके अलावा, संवेदनशील कमांड और कंट्रोल सेंटर को संभावित हमलों से बचाने के लिए उन्हें भूमिगत (अंडरग्राउंड) बनाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका अपनी कुछ महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं और संसाधनों को इजरायल में शिफ्ट करने की संभावना पर मंथन कर रहा है, हालांकि इस दिशा में अभी तक कोई आधिकारिक या अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हाल के तनाव के दौरान बहरीन, कुवैत और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी कई घटनाएं दर्ज की गईं। अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी।
