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UP Election 2027: सपा-कांग्रेस गठबंधन में 'मिशन 403' का आगाज, पर सीट शेयरिंग की डगर बेहद पेचीदा

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) के बीच गठबंधन की तैयारी होने लगी है, लेकिश सीट शेयरिंग का मुद्दा दोनों पार्टियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

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यूपी चुनाव 2027: कहां फंस रही है सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बात

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल अभी से बजने लगा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी सफलता से उत्साहित समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से बिसात बिछानी शुरू कर दी है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अंदरूनी मंथन और गुणा-भाग का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन गठबंधन की यह राह जितनी आसान दिखती है, जमीनी स्तर पर उतनी ही चुनौतीपूर्ण है।

अखिलेश यादव का जमीनी फीडबैक

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के सांसदों, विधायकों और जिला स्तर के बड़े नेताओं से गुप्त सुझाव मांगे हैं। उन्होंने नेताओं से पूछा है कि उनके संबंधित जिलों में कांग्रेस का सांगठनिक ढांचा कैसा है और वहां कांग्रेस को कौन-कौन सी सीटें दी जा सकती हैं। फिलहाल जो रणनीति सामने आ रही है, उसके अनुसार अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव 2027 में गठबंधन के लिए दो रणनीति तय की है।

  • सपा का प्लान: समाजवादी पार्टी अंदरूनी तौर पर कांग्रेस के लिए 60 से 80 सीटों की एक सूची तैयार कर रही है।
  • बैकअप प्लान: इसके साथ ही, सपा उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपने संभावित उम्मीदवारों की भी पहचान कर रही है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटा जा सके।

कांग्रेस की कितनी है मांग?

दूसरी ओर, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी यूपी में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बेताब है। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस शुरुआती बातचीत में लगभग 120 सीटों की बड़ी मांग सामने रख सकती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों और दोनों पार्टियों के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि अंतिम समझौता 80 सीटों के आसपास जाकर टिक सकता है।

कांग्रेस इस बार सिर्फ सीटों की 'संख्या' पर नहीं, बल्कि जीत पर जोर दे रही है। कांग्रेस आलाकमान का पूरा ध्यान ऐसी सीटों पर है जो 'जीतने योग्य' हों और जहां सामाजिक समीकरण (जातीय और धार्मिक समीकरण) कांग्रेस के पक्ष में मजबूत हों। यही 'सीटों की गुणवत्ता' का मुद्दा आगे चलकर दोनों दलों के बीच सबसे बड़ा पेच बन सकता है।

शीर्ष नेतृत्व में 'यारी', पर जमीनी स्तर पर 'बेचैनी'

अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच का तालमेल जगजाहिर है और दोनों ही शीर्ष नेता गठबंधन के पक्ष में हैं। लेकिन इस गठबंधन से जमीनी स्तर के नेता पूरी तरह सहज नहीं हैं। दोनों दलों के स्थानीय नेताओं को डर है कि गठबंधन होने से उनके हिस्से की सीटें कट जाएंगी, जिससे उनका राजनीतिक भविष्य अधर में लटक सकता है। सपा नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का सांगठनिक आधार बेहद कमजोर है, इसलिए उसे ज्यादा सीटें देना आत्मघाती हो सकता है। इसके विपरीत, कांग्रेस नेताओं का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन को जो भारी सफलता मिली, उसमें कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी।

रिश्तों का इतिहास: उतार-चढ़ाव से भरा सफर

सपा और कांग्रेस के रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं। साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की सीधी बातचीत के बाद बर्फ पिघली और 2024 लोकसभा चुनाव में दोनों ने मिलकर कमाल कर दिखाया।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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