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जंतर-मंतर से दूर एक और भूख हड़ताल, केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ 21 गांव; जल सत्याग्रह' का 15वां दिन

Bundelkhand Jal Satyagraha : मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और अन्य सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित परिवार पुनर्वास की मांगों को लेकर 15 दिनों से धरने पर हैं। प्रशासन ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में जल सत्याग्रह

Bundelkhand Jal Satyagraha : बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में जारी अनिश्चितकालीन अनशन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधी सरकार और प्रशासन के वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की भागीदारी वाला यह आंदोलन छतरपुर जिले के कूपी गांव के पास बराना नदी के तट पर जारी है। प्रदर्शनकारी ’जल सत्याग्रह’, ’चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ’फांसी सत्याग्रह’ भी कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं, जो पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर का केवल एक बार औपचारिक चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित कर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, परियोजना से प्रभावित कुछ परिवारों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने विस्थापन, पुनर्वास तथा पन्ना बाघ अभयारण्य के हिस्सों सहित जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर इसका विरोध किया है।

वर्तमान आंदोलन में रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं। उनका कहना है कि पुनर्वास को लेकर प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोग

छतरपुर जिला प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल 176 लोग पड़ोसी पन्ना जिले की रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित हैं तथा उनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजा प्रक्रिया से संबंध नहीं है। प्रशासन ने एक बयान में प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटकर वहां के जिला प्रशासन से पुनर्वास का लाभ लेने का आग्रह किया।

बयान के अनुसार, राज्य सरकार ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए पुनर्वास सहायता राशि पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि इससे पात्र परिवारों का समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर धरनास्थल पर पेयजल, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्साकर्मियों और दवाओं की भी व्यवस्था की गई है तथा स्थानीय अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन ने कहा कि जनप्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच तथा अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटकर पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करने के लिए समझा रहे हैं। बयान में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग परियोजना के बारे में भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।

न्याय के इंतजार में लोग

प्रशासन का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ-साथ मझगांव और रुनझ सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को अब तक न्याय नहीं मिला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है। उनका यह भी आरोप है कि कुछ लोगों के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, उनकी बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूलों को ध्वस्त कर दिया गया।

भटनागर ने प्रशासन से ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करने और प्रत्येक गांव में परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की। बिजावर के अनुमंडलीय दंडाधिकारी विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को इस आंदोलन की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने पहले कोई सूचना या ज्ञापन नहीं दिया था। वह शुक्रवार को धरनास्थल पर भी गए। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उनकी लंबित मांगों का आकलन किया।

द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के प्रभावित लोगों की शिकायतों का निराकरण वहां का जिला प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर जिले के निवासियों से जुड़े मामलों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा। उन्होंने विशेष रूप से मानसून के मद्देनजर प्रदर्शनकारियों से अपने घर लौटने की अपील की और इस आरोप को खारिज किया कि पुनर्वास के लाभ चयनात्मक तरीके से दिए गए हैं। यदि ऐसे किसी मामले की ठोस जानकारी दी जाती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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