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राष्ट्रपति ट्रंप बना रहे पाकिस्तान पर गाजा में सैनिक भेजने का दबाव, आखिर कैसे अमेरिका के प्लान में फंसेंगे मुनीर?

US presses Pakistan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 20-पॉइंट शांति प्लान के तहत चाहते हैं कि दर्जनों मुस्लिम देशों की सेनाएं गाजा के पुनर्निर्माण की देखरेख करें। हालांकि, पाकिस्तानी सैनिकों की उनकी मांग ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। जानिए क्यों? आखिर क्या चुनौती होगी?

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आखिर कैसे अमेरिका के प्लान में फंसेंगे मुनीर?

Trump Gaza Plan: पाकिस्तान के दशकों के सबसे ताकतवर मिलिट्री चीफ को अपनी नई मिली शक्तियों की सबसे बड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, वॉशिंगटन इस्लामाबाद पर गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में सैनिक भेजने का दबाव डाल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से देश में विरोध हो सकता है।

ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अगले कुछ समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के लिए वॉशिंगटन जा सकते हैं। यह छह महीनों में उनकी तीसरी मुलाकात होगी और इसमें गाजा फोर्स पर चर्चा होने की संभावना है।

ट्रंप की 20-पॉइंट गाजा योजना में एक इंटरनेशनल फोर्स की बात कही गई है जो युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में पुनर्निर्माण और आर्थिक रिकवरी के लिए ट्रांजिशन पीरियड की देखरेख करेगी। बता दें कि दो साल से ज्यादा समय से चले आ रहे युद्ध से गाजा बर्बाद हो गया है।

सेना की तैनाती ट्रंप के गाजा शांति प्लान के अगले चरण का एक अहम हिस्सा है। पहले चरण के तहत, दो साल की जंग में 10 अक्टूबर को एक कमजोर सीजफायर शुरू हुआ, जिसमें हमास ने बंधकों को रिहा किया और इजरायल ने हिरासत में लिए गए फिलिस्तीनियों को आजाद किया। हालांकि, इजरायल नहीं चाहता है कि सीजफायर आगे बढ़े। वह गाजा में हमास के खिलाफ कोई साफ ऑपरेशनल प्लान चाहता है और आखिर मृत बंधक मास्टर सार्जेंट रैन गविली का शव भी अभी उसे नहीं मिला है।

बात मुनीर की परेशानी की

वहीं, मुनीर ने वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच सालों के अविश्वास को खत्म करने के लिए ट्रंप के साथ एक करीबी रिश्ता बनाया है। जून में उन्हें व्हाइट हाउस में लंच का इनाम मिला यानी यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख की अकेले, बिना राष्ट्र प्रमुख के मेजबानी की थी।

वॉशिंगटन स्थित अटलांटिक काउंसिल में साउथ एशिया के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा, 'गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में योगदान न देने से ट्रंप नाराज हो सकते हैं, लेकिन यह पाकिस्तानी सरकार के लिए कोई छोटी बात नहीं है, जो ट्रंप की नजरों में अच्छा बने रहने के लिए काफी उत्सुक दिखती हैस खासकर अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहायता हासिल करने के लिए।'

'नतीजे देने का दबाव'

पाकिस्तान दुनिया का ऐसा एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। पाकिस्तान की सेना युद्ध लड़ना जानती है। वह भारत के साथ तीन बार युद्ध लड़ चुकी है, हालांकि, सभी में उसे हार मिली, लेकिन यहां बात युद्ध के अनुभव की हो रही है। पाकिस्तान ने अपने दूर-दराज के इलाकों में विद्रोहियों से भी मुकाबला किया है और वह फिलहाल इस्लामी आतंकवादियों के साथ एक मुश्किल युद्ध में फंसा हुआ है। इस मामले में वह अफगानिस्तान पर आरोप लगाता है।

लेखक और रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत का मतलब है कि 'मुनीर पर अपनी क्षमता साबित करने का ज्यादा दबाव है।'

पाकिस्तान की सेना, विदेश मंत्रालय और सूचना मंत्रालय ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया। व्हाइट हाउस ने भी टिप्पणी के अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दिया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पिछले महीने कहा था कि इस्लामाबाद शांति बनाए रखने के लिए सैनिक भेजने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास को निहत्था करना 'हमारा काम नहीं है।'

मुनीर को मिली पावर

इस महीने की शुरुआत में मुनीर को रक्षा बलों का प्रमुख बनाया गया, जिसमें वायु सेना और नौसेना की कमान भी शामिल थी और उनकी नौकरी 2030 तक बढ़ा दी गई। वह अपना फील्ड मार्शल का टाइटल हमेशा के लिए बरकरार रखेंगे, साथ ही पाकिस्तान की सिविलियन सरकार द्वारा पिछले महीने संसद में पास किए गए संवैधानिक संशोधनों के तहत किसी भी आपराधिक मुकदमे से उन्हें जीवन भर की छूट भी मिल गई है।

कुगेलमैन ने आगे कहा, 'पाकिस्तान में बहुत कम लोग मुनीर जितनी आजादी से रिस्क लेने का मजा ले पाते हैं। उनके पास बेहिसाब ताकत है, जो अब संवैधानिक रूप से सुरक्षित है।' 'आखिरकार, नियम मुनीर के ही चलेंगे, और सिर्फ उनके ही।'

घरेलू मोर्चे पर खतरा

सेना के बयानों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में मुनीर ने इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन, मिस्र और कतर जैसे देशों के सैन्य और नागरिक नेताओं से मुलाकात की है, जिसके बारे में सिद्दीका ने कहा कि यह गाजा फोर्स पर सलाह-मशविरा लग रहा था।

लेकिन घर पर सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका समर्थित योजना के तहत गाजा में पाकिस्तानी सैनिकों की भागीदारी से पाकिस्तान की इस्लामी पार्टियों का विरोध फिर से भड़क सकता है, जो अमेरिका और इजरायल के घोर विरोधी हैं।

पार्टियों के पास हजारों लोगों को सड़कों पर उतारने की ताकत है। एक शक्तिशाली और हिंसक इजरायल विरोधी इस्लामी पार्टी, जो पाकिस्तान के बेहद सख्त ईशनिंदा कानूनों को बनाए रखने के लिए लड़ रही थी उसपर अक्टूबर में प्रतिबंध लगा दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि अधिकारियों ने उसके नेताओं और 1,500 से ज्यादा समर्थकों को गिरफ्तार किया और चल रही कार्रवाई में उसकी संपत्ति और बैंक खाते जब्त कर लिए। हालांकि इस्लामाबाद ने इस ग्रुप को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन इसकी विचारधारा अभी भी जिंदा है।

जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी, जिसके समर्थकों ने 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में सबसे ज्यादा सीटें जीतीं और जिसे जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है वे भी मुनीर के खिलाफ हैं।

सिंगापुर में एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर एसोसिएट फेलो अब्दुल बासित ने कहा कि अगर गाजा में सेना के पहुंचने के बाद हालात बिगड़ते हैं, तो इससे जल्दी ही समस्याएं पैदा होंगी। 'लोग कहेंगे 'आसिम मुनीर इजरायल के इशारों पर काम कर रहा है'

पाकिस्तान-इजरायल संबंध

पाकिस्तान लगातार इजरायल का विरोध करता रहा है और उसने फिलिस्तीनियों के मुद्दे का समर्थन किया है। यह विरोध 1948 में शुरू हुआ, जब मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में नए बने पाकिस्तान ने एक यहूदी राज्य के गठन का विरोध किया। उस समय, इसे पश्चिमी देशों के खिलाफ मुस्लिम देशों को एकजुट करने के तरीके के रूप में देखा गया था।

पाकिस्तान ने इजरायल राज्य को मान्यता नहीं दी है। नतीजतन, दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर साफ तौर पर लिखा है कि यह दस्तावेज इजरायल यात्रा के लिए मान्य नहीं है। पाकिस्तान इजरायल को भारत का करीबी, रणनीतिक साझेदार भी मानता है।

UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे अन्य मुस्लिम देशों के विपरीत, पाकिस्तान US समर्थित अब्राहम समझौते में शामिल नहीं हुआ, जिसका मकसद मुस्लिम देशों और पश्चिम एशिया और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। ऐसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान अभी भी पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक अलग फिलिस्तीनी राज्य पर जोर देता है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इस्लामाबाद को शायद अपने रुख पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, लेकिन यह आसान नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इजरायल के प्रति पाकिस्तान का लंबा विरोध और एक अलग फिलिस्तीनी राज्य की मांग लोगों के मन में गहराई से बैठ गई है।

इस्लामाबाद ने गाजा में हो रही घटनाओं को लगातार नरसंहार बताया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आतंकवादी कहा है और उन पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है। हालांकि, इन दावों को इजरायल ने खारिज कर दिया है।

इजरायल विरोधी भावना कई इस्लामी पार्टियों और उनके समर्थकों के बीच खास तौर पर फैली हुई है, जिनकी संख्या करोड़ों में है और वे मुनीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

मुनीर मुश्किल में क्यों?

पाकिस्तानी सेना प्रमुख बनने के बाद से, मुनीर ने लगातार खुद को एक पक्के मुसलमान और धर्म के रक्षक के तौर पर पेश किया है। ऐसे में अगर वह पलटकर पाकिस्तानी सैनिकों को गाजा भेजते हैं, तो देश में बहुत से लोग इसे धोखा मानेंगे।

लोगों की भावनाएं, जो पहले से ही इमरान खान के जेल जाने को लेकर डगमगा रही हैं, वह मुनीर के खिलाफ भड़क सकती हैं। इस्लामी पार्टियां और मौलवी भी मुनीर के खिलाफ उठ खड़े हो सकते हैं।

पाकिस्तान को तुर्की, ओमान और कतर जैसे देशों से अंतरराष्ट्रीय विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है, जिन्होंने हमास का समर्थन किया है और इजरायल विरोधी रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर मुश्किल में हैं।

 Nitin Arora
Nitin Arora author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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