Israel Hezbollah Ceasefire: मध्य पूर्व में युद्ध की जो आग लगी हुई है, उसमें से एक बुझ गई है। इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच सीजफायर यानी सुलह हो गया है। इस युद्ध का रुकना इजरायल और लेबनान दोनों देशों के लिए बहुत बड़ी बात है। बहुत बड़ी बात अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए भी है, जो 20 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं। राष्ट्रपति चुनाव की रेस से पीछे हटने, अपनी बनती-बिगड़ती सेहत और युद्धों को लेकर बाइडेन आलोचनाओं का शिकार होते आए हैं। अक्सर भूल जाने और अनमने स्वभाव को लेकर उन पर टीका टिप्पणी होती रही है। ऐसे में व्हाइट हाउस से रुखसत होने से पहले वह कुछ ऐसा चाह रहे थे जिससे उनकी प्रेसिडेंसी खास तौर से याद की जाए। अब सीजफायर के रूप में उन्हें यह उपलब्धि मिल गई है। इजरायल-लेबनान सीजफायर डील को विदेश नीति के मोर्चे पर बाइडेन की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। क्योंकि दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में उनकी भूमिका काफी अहम है। हालांकि, इस समझौते में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भी योगदान है।
इलाके में शांति लौटनी शुरू होगी
इस सीजफायर की घोषणा होते ही दक्षिण लेबनान और उत्तर इजरायल के इलाकों को छोड़ चुके दोनों देशों के नागरिकों के चेहरे पर खुशियां लौट आईं। वे जश्न मना रहे हैं। करीब एक साल से अपना घर-बार छोड़कर शरणार्थी की तरह जिंदगी बिता रहे इन लोगों के लिए घर वापसी की उम्मीद एक बड़े सौगात से कम नहीं है। जिंदगी दोबारा पटरी पर आने की खुशी इनके चेहरों पर साफ देखी जा सकती है। उम्मीदों के सपनों पर सवार होकर वे घर जा रहे हैं। जाहिर है कि इस पीस डील के बाद उत्तर इजरायल और लेबनान के दक्षिण इलाके में शांति लौटनी शुरू होगी। आने वाले दो महीनों में इजरायल अपने सैनिक लेबनान से वापस बुलाएगा और हिज्बुल्ला दक्षिण लेबनान को खाली करेगा। इन इलाकों में यूएन की शांति सेना और लेबनान के सैनिक तैनात होंगे।
नेतन्याहू ने हिज्बुल्ला को दी चेतावनी
यही नहीं, सीजफायर लागू हो रहा है कि नहीं इस पर अमेरिका की अगुवाई वाला एक पैनल अपनी नजर रखेगा। लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने इस समझौते का स्वागत किया है। तो इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी से आगाह कर दिया है। उन्होंने कहा है कि सीजफायर लागू रहेगा या नहीं, यह सब हिज्बुल्ला पर निर्भर करेगा। नेतन्याहू ने कहा है कि हिज्बुल्ला ने यदि फिर से घातक हथियार जुटाए या शर्तों का उल्लंघन किया तो उस पर फिर भीषण हमला होगा। यानी कि सीजफायर के भविष्य को लेकर नेतन्याहू ने अपना इरादा और रुख साफ कर दिया है।
1 अक्टूबर को इजरायल पर ईरान ने किया हमला
दिलचस्प बात यह है कि इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच पीस डील होने के बाद हमास भी ऐसी डील की उम्मीद कर रहा है। दरअसल, कल तक यहूदियों से बदला लेने और जिहाद करने की बात करने वाले इन दोनों मिलिशिया ग्रुप के तेवर और सुर अचानक से बदल गए। तो इसके पीछे अमेरिकी चुनाव का रिजल्ट है। यह बात सभी को पता है कि 20 जनवरी को व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप का आगमन हो जाएगा। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह मध्य पूर्व में शांति लाएंगे। ट्रंप का यह बयान तब था जब ईरान ने भारी मिसाइलों से इजरायल पर हमला नहीं किया था लेकिन बीते एक अक्टूबर को ईरान ने इजरायल को निशाना बनाते हुए करीब 200 मिसाइलें दांगी। तो इस हमले के बाद ट्रंप ने जो बयान दिया, उसे सुनकर ईरान के होश उड़ गए।
ईरान के तीन प्रॉक्सी
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि इजरायल को ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला कर देना चाहिए। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच केमेस्ट्री भी बहुत अच्छी मानी जाती है। ईरान, हिज्बुल्ला और हमास इन तीनों को लग रहा होगा कि व्हाइट हाउस में आ जाने के बाद ट्रंप, उनके खिलाफ हमला करने के लिए नेतन्याहू को खुली छूट दे सकते हैं। इजरायल पहले ही उनका काफी हद तक नुकसान कर चुका है। हमास और हिज्बुल्ला के शीर्ष कमांडरों का सफाया हो चुका है, जो बचे-खुचे हैं, वे शांति चाहते हैं। उन्हें पता है कि सीजफायर नहीं हुआ तो ट्रंप के आने के बाद बहुत मार पड़ेगी। एक बात और यह है कि हमास, हिज्बुल्ला और यमन वाले हूती, यानी कि तीनों H, ईरान के प्रॉक्सी हैं। इन्हीं के जरिए ईरान मध्य एशिया के अपने दुश्मन देशों जैसे कि इजरायल, सऊदी अरब पर हमले कराता आया है। इन प्रॉक्सीज की वजह से बाकी देश ईरान से डरते हैं। हिज्बुल्ला, हमास और हैती का अगर आईएसआईएस की तरह यदि पूरी तरह से सफाया हो जाता है तो इससे सबसे बड़ा धक्का ईरान को लगेगा। क्योंकि ईरान खुद तो किसी से लड़ता नहीं, वह इन्हीं के जरिए इस पूरे इलाके में अपनी अपनी हेकड़ी चलाता है। ऐसे में पीस डील ईरान के भी हक में है। हिज्बुल्ला की तरह यदि हमास के साथ भी यदि इजराल का सीजफायर हो जाता है तो यह ईरान के लिए राहत लेकर आएगा। और अगर नहीं हुआ तो ईरान का भविष्य बहुत हद तक ट्रंप के रहमोकरम पर निर्भर करेगा।
गाजा में अमानवीय हालात के बीच लोग
चूंकि हिज्बुल्ला के साथ सीजफायर हो गया है तो अब सबकी नजर गाजा में युद्ध विराम लागू कराने पर होगी। क्योंकि 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजरायल के निशाने पर सबसे ज्यादा गाजा रहा है। गाजा के कई हिस्से पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं, इमारतें पार्किंग लॉट बन चुकी हैं। जहां तक बात हमास की है तो उसके सिर को इजरायल कुचल चुका है। लेकिन गाजा का एक दूसरा पहलू भी है। 13 महीने के इस युद्ध और संघर्ष ने यहां के आम लोगों का जीवन नरक जैसा बना दिया है। लाखों लोग आज भी राहत शिविरों में बेहद अमानवीय हालात के बीच हैं। भुखमरी जैसी स्थिति है। ऐसे में मानवीय पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए गाजा में सीजफायर की गुंजाइश बनती है। सीजफायर की अगर सूरत बनती भी है तो इजरायल चाहेगा कि यह समझौता पूरी तरह से उसकी शर्तों पर हो क्योंकि वह आगे किसी तरह की जोखिम या खतरा उठाना नहीं चाहेगा। हो सकता है कि हमास के साथ सीजफायर को लेकर बैक चैनल किसी प्लान पर चर्चा हो रही हो। हो सकता है कि बाइडेन यहां भी शांति लाने की कोशिश करें। बहरहाल, लंबे समय बाद मध्य पूर्व से अच्छी खबर आई है। सभी चाहते हैं कि पूरे मध्य एशिया में युद्ध की लपटें शांत हों और आम जन-जीवन दोबारा पटरी पर आए।
