Bangladesh : ज्यादा समय नहीं बीता जब बांग्लादेश की पहचान दक्षिण एशिया के एक उभरते और आर्थिक रूप से मजबूत होते एक देश के रूप में हो रही थी लेकिन पांच अगस्त के बाद से यह देश तख्तापलट, हिंसा, उपद्रव, आगजनी और सांप्रदायिक हिंसा की गर्त में डूबता चला गया। आठ अगस्त को अंतरिम सरकार के आने और मोहम्मद यूनुस के सरकार का मुखिया बनने के बाद ये उम्मीद जताई जा रही थी कि बांग्लादेश में व्यवस्था पटरी पर उतरेगी और हिंसा पर लगाम लगेगी लेकिन अंतरिम सरकार के आने के बाद देश भर में हिंदुओं के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा रूकी नहीं..बल्कि यह बढ़ भी गई।
हिंदुओं को निशाना बनाकर हुए हमले
रिपोर्टों की मानें तो 4 अगस्त से 20 अगस्त के बीच बांग्लादेश के 49 जिलों में सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस उठे। इसे सांप्रदायिक हिंसा कहना गलत होगा क्योंकि सांप्रदायिक हिंसा तब होती है जब दो अलग-अलग धर्मों या संप्रदायों के लोग एक-दूसरे को निशाना बना रहे हों, लेकिन यहां तस्वीर दूसरी थी, बांग्लादेश में हिंदू परिवारों, उनके मंदिरों, उनके कारोबार, उनकी संपत्तियों और उनकी पहचान मिटाने के लिए उन्हें टार्गेट करके हिंसा हुई, वह दूसरी कहानी पेश करता है, हिंदुओं के खिलाफ ये हिंसा, घृणा, नफरत उसी कट्टरपंथी सोच का नतीजा है, जिसने शेख हसीना का तख्तापलट करने में बड़ी भूमिका निभाई।
शेख मुजीबुर्रहमान की यादें मिटाई जा रहीं
बांग्लादेश में जो चीजें हो रही हैं, वह उसे अंधेरें की तरफ ले जा रही हैं। 1971 में शेख मुजीबुर रहमान ने नए बंग देश का जो सपना देखा था, उसे सोच और सपने को पलीता लगा दिया गया है। मुक्ति संग्राम की अगुवाई करने वाले और देश के पहले राष्ट्रपति के प्रति इतनी घृणा भर गई है कि देश भर में उनकी प्रतिमाओं, स्मारकों को तोड़ा गया। यहां तक कि हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय से उनकी तस्वीर हटा दी गई। शेख मुजीबुर्रहमान की हर एक याद और उनसे जुड़ी चीजों को हटाया और मिटाया जा रहा है। आप यह सोच रहे होंगे कि अचानक से हम शेख मुजीबुर्रहमान की बात क्यों कर रहे हैं, तो इसका एक संदर्भ है, यह संदर्भ बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां के उस बयान से है जिसे उन्होंने बीते बुधवार को ढाका हाईकोर्ट में दिया।
बांग्लादेश की 90 फीसदी आबादी मुस्लिम
एक याचिका की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने कहा कि देश के संविधान से ‘समाजवाद’ और ‘सेक्युलर’ शब्द को हटा देना चाहिए। AG ने कहा कि चूंकि बांग्लादेश की 90 फीसदी आबादी मुस्लिम है इसलिए संविधान में सेक्युलर शब्द रखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संविधान से ऑर्टिकल 7ए को खत्म करने की बात भी कही है। वही, सेक्युलरिज्म जो उसके संविधान के चार प्रमुख स्तंभों में से एक है। संविधान में इसी धर्मनिरपेक्षता को अपनाने के बाद वह दुनिया भर में सीना ठोककर कहता आया है कि मुस्लिम बहुल देश होने के बाद भी वह सेक्युलर है लेकिन आज उसी बांग्लादेश को खुद धर्मनिरपेक्ष देश होने में शर्म महसूस हो रही है। इस शब्द से उसे चिढ़ और धर्मनिरपेक्ष देश कहलाने में दिक्कत होने लगी है।
संविधान की प्रस्तावना में शामिल है धर्मनिरपेक्षता
कोई भी आजाद एवं संप्रभु देश कैसा होगा या आगे चलकर कैसा बनेगा, उसकी झलक उसके संविधान की प्रस्तावना जिसे प्रियांबल कहा जाता है, उसमें देखने को मिल जाती है। बांग्लादेश के संविधान के प्रियांबल में लिखा है-'हम बांग्लादेश के लोग, जो कि 26 मार्च 1971 को अपनी आजादी प्राप्त की, एक एतिहासिक संघर्ष के बाद एक देश के रूप में आजाद हुए हैं, हमने अपने लिए एक स्वतंत्र, संप्रभु देश पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ बांग्लादेश की स्थापना की है। हम संकल्प लेते हैं कि राष्ट्रवाद, समाजवाद, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के वे उच्च विचार जिन्होंने हमारे बहादुर लोगों और हमारे वीर शहीदों को मुक्ति संग्राम के लिए प्रेरित किया, ये हमारे संविधान के आधारभूत सिद्धांत होंगे।' बांग्लादेश के संविधान की प्रस्तावना में ये बातें लिखी हैं और संविधान के चार आधारभूत सिद्धांतों में शामिल समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को हटाने और उन्हें तिलांजलि देने की कोशिश हो रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि संविधान से धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने से कट्टरपंथी तत्वों के इरादे मजबूत होंगे और हिंदुओं पर हमले और बढ़ेंगे। इस तरह की चीजें बांग्लादेश को खतरनाक टर्न लेने की ओर इशारा कर रही हैं।
आंच भारत तक पहुंचेगी
कहना यह है कि किसी देश को कैसा बनना या होना है, यह बात वहां के लोगों और सरकार को सोचनी होती है। सरकार बनानी है -बिगाड़नी है, संविधान में बदलाव करना है या उसे डस्टबिन में डालना है, यह सब उस देश का आंतरिक मामला है, बाहरी देश में इसमें हस्तक्षेप नहीं करता। बांग्लादेश को गिफ्ट में देने वाला भारत भी नहीं करेगा लेकिन इसकी आंच अगर उस तक आएगी, या राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी तरह का खतरा महसूस होगा तो वह हाथ पर हाथ धरकर भी नहीं बैठेगा।
