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Explained: क्या Iran War से पुतिन को मिल रहा है फायदा?

ईरान ने पहले ही पश्चिम एशिया के एक अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए किया जाता है। उधर, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल बेचने की इजाजत वाला कदम वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने में सक्षम बनाने के लिए उठाया गया है। लेकिन इसका क्या असर हो रहा है?

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ईरान युद्ध को पुतिन को कैसे फायदा?

Photo : AP

ईरान युद्ध के नतीजों का असर दुनिया पर लगातार पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी बंद है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, दुनिया भर के बाजार धराशायी हो गए हैं और पश्चिम एशिया में उथल-पुथल मची हुई है। दुनियाभर में हाहाकार मचा हुआ है। लेकिन एक देश ऐसा है जिसे इस युद्ध से फायदा मिलता दिख रहा है। ऐसा लगता है कि रूस इस युद्ध से शुरुआती विजेता के रूप में उभर रहा है। अमेरिका ने अस्थायी रूप से 11 अप्रैल तक समुद्र में मौजूद रूसी तेल की बिक्री की अनुमति दी, तो इस पर एक तरह से मुहर भी लग गई। वाशिंगटन ने यह कदम तेहरान की उन धमकियों के बाद उठाया है कि अगर उसकी ऊर्जा संयंत्रों पर हमला हुआ तो वह क्षेत्र के तेल और गैस भंडारों को जला देगा।

ईरान ने पहले ही पश्चिम एशिया के एक अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए किया जाता है। उधर, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल बेचने की इजाजत वाला कदम वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने में सक्षम बनाने के लिए उठाया गया है। लेकिन इसका क्या असर हो रहा है? ईरान युद्ध से रूस को कैसे फायदा हो रहा है? आइए इस पर गहराई से नजर डालते हैं।

रूस का यूक्रेन पर हमला

2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल, एलएनजी और कोयले के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। यूरोपीय संघ और जी7 देशों ने रूसी कच्चे तेल की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन उन्होंने प्रति बैरल 60 डॉलर (5,544.60 रुपये) की मूल्य सीमा निर्धारित कर दी। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित न हो, जिससे दुनिया भर के देशों को नुकसान हो सकता था। इससे यह भी सुनिश्चित हुआ कि रूस बाजार दर पर तेल बेचकर यूक्रेन के साथ युद्ध के लिए अपने खजाने को अनिश्चित काल तक भर न सके।

मॉस्को ने इसके जवाब में अपने कच्चे तेल के लिए नए खरीदार ढूंढे, विशेष रूप से चीन और भारत। अगले कुछ वर्षों में उसने अपने 'गुप्त बेड़े' का इस्तेमाल करके दोनों देशों को कच्चा तेल पहुंचाया और सौदे को और आकर्षक बनाने के लिए तेल पर भारी छूट की पेशकश की। इससे भारत और चीन, जो दोनों तेल के बड़े उपभोक्ता हैं, अपने तेल बिल पर अरबों डॉलर की बचत कर पाए। यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद के कुछ वर्षों में भारत विशेष रूप से रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। यह युद्ध से पहले की स्थिति से बिल्कुल उलट था, जब भारत अपना अधिकांश तेल पश्चिम एशिया से हासिल करता था।

रूस को कैसे फायदा हो रहा है?

पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर (10,996.79 रुपये) प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई - जो 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से उच्चतम स्तर था। लेकिन बाद में गिरकर 90 डॉलर (8,316.90 रुपये) प्रति बैरल हो गई। पेरिस स्थित अंतर-सरकारी संगठन, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने सदस्य देशों द्वारा 40 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति के समन्वय का वादा किया, इसके बावजूद तेल की कीमतों में कमी नहीं आई है।

छूट देने से तेल की कीमतें कम होंगी?

गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 102.45 डॉलर (9,466.45 रुपये) पर स्थिर हुई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 97 डॉलर (8,963.77 रुपये) प्रति बैरल रही। व्हाइट हाउस को उम्मीद है कि रूस को छूट देने से तेल की कीमतें कम होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान युद्ध जितना लंबा चलेगा, रूस द्वारा दी जा रही छूट की राशि उतनी ही कम होती जाएगी। लंदन स्थित थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट में जलवायु, ऊर्जा और रक्षा के शोधकर्ता पेट्रास कटिनास ने एनबीसी न्यूज को बताया, इसलिए कीमतें जितनी देर तक स्थिर रहेंगी, रूस वैश्विक बाजार में अपने कच्चे तेल को उतनी ही कम छूट पर बेच सकेगा। पॉलिटिको के अनुसार, रूसी वित्त मंत्रालय की इस वर्ष की बजट योजना में यह अनुमान लगाया गया था कि उसका यूराल्स क्रूड कम से कम 59 डॉलर (5,452.19 रुपये) प्रति बैरल पर स्काई न्यूज ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के हवाले से कहा कि 2025 में मॉस्को के तेल राजस्व में 18 प्रतिशत की गिरावट आई थी। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में ही रूस के राजस्व में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उत्तरी रूसी बंदरगाहों से निर्यात में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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