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क्या ट्रंप अब रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए बोझ बन रहे हैं? मिडटर्म चुनाव से पहले नाम और फोटो गायब

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के मुहाने पर खड़े रिपब्लिकन प्रत्याशी अब डोनाल्ड ट्रंप से दूरी बनाते दिख रहे हैं। जानिए प्राइमरी और आम चुनाव की रणनीति में आए इस साइलेंट बदलाव की पूरी कहानी।

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? रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने कैंपेन वेबसाइट्स से हटाए ट्रंप के नाम और फोटो
Authored by: Nishant Tiwari
Updated Aug 28, 2026, 13:55 IST
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टेक्सस से रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस प्रत्याशी कार्लोस दे ला क्रूज (Carlos De La Cruz) की कैंपेन वेबसाइट पर कुछ समय पहले तक जो हेडलाइन चमक रही थी, वो बदल गई है। "एयरफोर्स का पूर्व जवान। छोटा कारोबारी। ट्रंप समर्थक कंजर्वेटिव।"- इस स्लोगन का मकसद साफ था, खुद को सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे वफादार सिपाही दिखाना। लेकिन प्राइमरी चुनाव जीतते ही यह लाइन बदलकर अब हो गई है- "टेक्सास का मूल निवासी। एयरफोर्स का पूर्व जवान। छोटा कारोबारी। साबित हो चुका कंजर्वेटिव।"

अब वेबसाइट में ये बदलाव भले ही छोटा दिखता हो, लेकिन इसके पीछे अमेरिकी राजनीति का एक बड़ा और गहरा सच छिपा है। एपी की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जब से ही मिडटर्म चुनाव का अंतिम दौर शुरू हुआ है, रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के कई प्रत्याशियों ने अपनी वेबसाइट्स और भाषणों से डोनाल्ड ट्रंप का नाम, तस्वीरें और उनके प्रति अति-उत्साह धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया है।

क्या होता है अमेरिकी राजनीति का यह चक्र?

अमेरिका के चुनावी गणित को समझने के लिए दो मुख्य चरणों को जानना जरूरी है:

प्राइमरी चुनाव (Primary Election): यह पार्टी के अंदर का चुनाव होता है। इसमें रिपब्लिकन पार्टी का टिकट पाने के लिए नेताओं को अपनी ही पार्टी के कट्टर कार्यकर्ताओं, जिन्हें MAGA या 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' बेस कहा जाता है, इसको खुश करना होता है। इसमें ट्रंप का समर्थन सबसे बड़ा जादुई हथियार माना जाता है।

आम चुनाव (General Election): टिकट मिलने के बाद प्रत्याशी का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार से होता है। यहां जीत दर्ज करने के लिए केवल कट्टर समर्थकों से काम नहीं चलता, बल्कि इंडिपेंडेंट और आम जनता के वोट हासिल करना अनिवार्य हो जाता है।

आखिर क्यों बैकफुट पर आ रहे हैं रिपब्लिकन प्रत्याशी?

AP-NORC के जुलाई सर्वे के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर महज 33% पर आ गई है। इसके अलावा तीन मुख्य कारण हैं जिन्होंने उम्मीदवारों को सोचने पर मजबूर किया है। पहला ईरान के साथ जंग, दूसरा महंगाई और तीसरा लोगों के बीच कम होती स्वीकार्यता।

बता दें कि अमेरिका द्वारा ईरान में चलाए जा रहे सैन्य अभियानों और युद्ध की आशंकाओं को लेकर आम अमेरिकी नागरिक बेहद चिंतित हैं। वहीं देश में रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें और रहने के खर्च ने आम जनता का बजट बिगाड़ दिया है। साथ ही मध्यममार्गी मतदाता ट्रंप की आक्रामक कार्यशैली और विवादित फैसलों से दूरी बनाना पसंद करते हैं। यही तीनों चीजें हैं जिससे उम्मीदवारों के रवैये में अंतर आ रहा है।

अलास्का से टेक्सास तक कैसे बदले जा रहे हैं शब्द और फोटो?

टेक्सास में एरिक फ्लोरेस: साउथ टेक्सास से चुनाव लड़ रहे पूर्व सैन्य अधिकारी एरिक फ्लोरेस ने अपनी वेबसाइट के मुख्य पेज से "सपोर्ट प्रेसिडेंट ट्रंप्स एजेंडा" हटाकर उसकी जगह "रहने का खर्च कम करना" प्राथमिकता बना दिया है।

केंटकी में राल्फ अल्वाराडो: केंटकी की 6वीं सीट से किस्मत आजमा रहे अल्वाराडो ने अपनी होमपेज से ट्रंप के साथ वाली तस्वीर हटा दी है। वह पहले खुद को 'अमेरिका फर्स्ट फाइटर' कहते थे, लेकिन NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक अब वे 'इंडिपेंडेंट लीडरशिप' (स्वतंत्र नेतृत्व) का वादा कर रहे हैं।

अलास्का में निक बेगिच: सांसद निक बेगिच ने अपनी वेबसाइट से वह लाइन हटा दी है जिसमें लिखा था कि "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर हमने अलास्का के लिए काम किया..." अब वहां केवल लिखा है- "हमने अलास्का के लिए काम किया है।"

नेवादा में मार्टी ओ'डोनेल: प्रसिद्ध 'हेलो' गेम के संगीतकार और प्रत्याशी मार्टी ओ'डोनेल के मुख्य डिजिटल बैनर से ट्रंप का पॉप-अप गायब हो चुका है।

केवल शब्द ही नहीं, अब नीतियों का भी सार्वजनिक विरोध

कुछ उम्मीदवार सिर्फ डिजिटल दूरी नहीं बना रहे, बल्कि सीधे ट्रंप के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। दो दशकों तक अमेरिकी सेना में रहे सांसद टॉम बैरेट ने ट्रंप द्वारा ईरान में चलाए जा रहे सैन्य अभियानों को रोकने के लिए 'वार पावर्स एक्ट' के पक्ष में वोट दिया। वह अपने चुनावी अभियानों में खुलकर कह रहे हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों पर अंकुश लगाने का काम किया है।

इसके अलावा गवर्नर पद के रिपब्लिकन प्रत्याशी टॉम टिफनी ने 'मिलवौकी जर्नल सेंटिनल' के अनुसार, ट्रंप द्वारा कनाडा के साथ ट्रेड-वॉर के दौरान 'लेक ओंटारियो' का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने के फैसले का विरोध किया है।

पार्टी का आधिकारिक रुख और ट्रंप की चुनौती

रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी (NRCC) के प्रवक्ता माइक मारिनेला ने बदलावों की इन खबरों को "मनगढ़ंत कहानी" बताया है। उनका कहना है कि उम्मीदवार राष्ट्रपति के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के साथ जनता के बीच जाने को उत्सुक हैं। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप खुद इस बात को भली-भांति समझते हैं। साउथ कैरोलिना में एक रैली के दौरान ट्रंप ने अपने समर्थकों से सीधा संवाद करते हुए कहा था कि लोग कहते हैं कि जब बैलेट पेपर पर मेरा नाम होता है तो लोग झूमकर वोट देते हैं, लेकिन जब मेरा नाम नहीं होता तो मेरे लोग वोटिंग के लिए बाहर नहीं निकलते। इसलिए मेरी आपसे विनती है, कृपया यह मानकर वोट दें कि इस बार भी बैलेट पेपर पर मेरा ही नाम है। डलास में होने वाले दो दिवसीय रिपब्लिकन सम्मेलन में ट्रंप खुद अपनी पार्टी के प्रचार की कमान संभालने वाले हैं।

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