मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को छह महीने पूरे हो चुके हैं। युद्ध के कारण फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, वहां से तेल की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। इसके चलते अमेरिका में पेट्रोल के दाम $4.09 प्रति गैलन पार कर गए हैं और अमेरिकी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) गिरकर 300 मिलियन बैरल के खतरनाक निचले स्तर पर आ गया है। घर के भीतर बढ़ते राजनीतिक दबाव और घरेलू गैस कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ 'इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील' का ऐलान किया है।
समझौते की मुख्य शर्तें और 100 साल का अधिकार
यह डील अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच बातचीत के बाद तय हुई है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका एक निजी ऑपरेटर के साथ मिलकर वेनेजुएला में एक नई निजी कंपनी बनाएगा। रोड्रिगेज सरकार ने इस कंपनी को 17 तेल क्षेत्रों के विकास के लिए 100 साल के लीज अधिकार दिए हैं। इस नई व्यवस्था में अमेरिका को कुल उत्पादन का 55% प्रभावी हिस्सा मिलेगा, जिसमें मालिकाना हक के साथ-साथ लागत मूल्य पर तेल खरीदने का अधिकार शामिल है। वेनेजुएला सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से देश के जर्जर तेल उद्योग में 100 अरब डॉलर का निजी निवेश आएगा और कराकस को 209 अरब डॉलर से ज्यादा का टैक्स राजस्व मिलेगा। यह नई निजी कंपनी सऊदी अरामको के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तेल भंडार धारक कंपनी बन जाएगी।
वेनेजुएला का भारी तेल बनाम ईरान का हल्का तेल
अब इस डील के साथ एक पहलू तेल की गुणवत्ता भी है। वेनेजुएला का मेरे ब्लेंड (Merey Blend) दुनिया के सबसे भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेलों में गिना जाता है। इसकी API ग्रेविटी सिर्फ 8°-16° होने के कारण यह बेहद गाढ़ा होता है और इसे परिवहन व रिफाइनिंग के लिए हल्के सॉल्वेंट्स तथा जटिल कोकर रिफाइनरियों की जरूरत पड़ती है। इसके विपरीत, ईरान का तेल लाइट होता है। ये 33°-36° API ग्रेविटी वाला अपेक्षाकृत हल्का और कम सल्फरयुक्त crude है, जो आसानी से रिफाइन होकर पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद देता है। यही वजह है कि ईरानी तेल वैश्विक बाजार में अधिक बहुउपयोगी और तेजी से खपत होने वाला माना जाता है, जबकि वेनेजुएला का तेल विशेष रिफाइनिंग क्षमता पर अधिक निर्भर रहता है।
ईरान का तेल जहां तुरंत रिफाइन होकर बाजार में पेट्रोल-डीजल की कमी दूर कर सकता है, वहीं वेनेजुएला का कच्चा तेल तारकोल जैसा गाढ़ा होता है। अमेरिका को वेनेजुएला के इस भारी तेल को निकालकर बाजार योग्य बनाने के लिए बड़े अपग्रेडर्स और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी।
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क्या इस डील से अमेरिका में तुरंत घटेंगे पेट्रोल के दाम?
अगर विवेक के धरातल से देखा जाए तो इस समझौते से रातों-रात अमेरिकी या वैश्विक बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं गिरेंगे। दशकों के प्रतिबंधों और कुप्रबंधन के कारण वेनेजुएला का तेल ढांचा पूरी तरह तबाह हो चुका है। हालांकि देश के पास 303 अरब बैरल का प्रमाणित रिजर्व यानी दुनिया का तकरीबन 17% है, लेकिन वर्तमान में वह दुनिया का केवल 1% तेल ही निकाल पाता है। बुनियादी ढांचे को ठीक करने और नया उत्पादन शुरू करने में सालों का समय और अरबों डॉलर का निवेश लगेगा। अमेरिका इस तेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को दोबारा भरने और अमेरिकी सेना की भविष्य की ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगा।
तो क्या है डील का हासिल
ट्रंप का यह कदम तत्काल ऊर्जा आपूर्ति से ज्यादा एक रणनीतिक और राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट का यह रातों-रात हल नहीं है, लेकिन 100 साल के इस समझौते से अमेरिका ने लैटिन अमेरिका में चीन और रूस के प्रभाव को बेअसर करते हुए भविष्य के लिए दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों की चाबी अपने पास रख ली है।