How Oil Tanker Safely Reached India : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से विश्व के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मालवाहक जहाजों की आवाजाही नहीं हो रही है। ईरान ने इम मार्ग को बंद कर दिया है। तेल टैंकरों पर हो रहे हमले को देखते हुए जहाज भी इल जल क्षेत्र में नहीं जा रहे हैं। फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की ढुलाई करने वाले मालवाहक जहाजों पर खतरा काफी ज्यादा है। बिना ईरान की अनुमति यहां से गुजरना असंभव है। इन खतरों के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर तेल का एक जहाज मुंबई पहुंचने में सफल हो गया। सवाल है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहां ईरान की निगरानी है और जहां हर एक जहाज को वह ट्रैक कर रहा है, ऐसे में यह जहाज चकमा देकर मुंबई पहुंच कैसे गया, यह बात सभी को हैरान कर रही है। बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत पहुंचने वाला यह पहला मालवाहक जहाज है।
11 मार्च को दिन के एक बजे मुंबई पोर्ट पर डॉक किया
लाइबेरिया के झंडे वाले इस जहाज पर सऊदी अरब का तेल लदा था। इस तेल टेंकर का नाम शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स और जहाज के कैप्टन भारतीय हैं। यह जहाज 11 मार्च को दिन के एक बजे मुंबई पोर्ट पर डॉक किया। यह जहाज अपने साथ 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है। इस कच्चे तेल को पूर्वी मुंबई के माहूल स्थित तेल रिफाइनरियों को दिया जाएगा। टैंकर का मालिकाना हक शेनलॉन्ग शिपिंग लिमिटेड के पास है और इसका प्रबंधन एथेंस स्थित डाइनाकॉम टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड करता है। इस जहाज पर भारतीय, पाकिस्तानी, फिलिपींस के नागरिक सहित चालक दल के 29 सदस्य सवार थे। इस जहाज के कमांडर कैप्टन सुक्षांत सिंह संधू हैं। बीते एक मार्च को इस टैंकर पर कच्चा तेल लादा गया और इसके दो दिन बाद वह मुंबई के लिए रवाना हुआ।
अंतिम सिग्नल आठ मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिला
मैरीटाइम ट्रैक्रिंग डाटा के मुताबिक इस जहाज का अंतिम सिग्नल आठ मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिला था। इसके बाद यह जहाज निगरानी तंत्र से ओझल हो गया। तकनीकी भाषा में यह टैंकर 'डार्क' मोड में चला गया। एक प्रमुख चेक प्वाइंट से गुजरने के बाद यह जहाज अगले दिन ट्रैकिंग डाटाबेस पर दोबारा दिखाई दिया।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं।
जहाज के 'डॉर्क' में जाने का मतलब क्या है?
एक जहाज के 'डॉर्क' में जाने का मतलब उसके ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेन सिस्टम (AIM) का बंद हो जाना है। यह सिस्टम जहाज की पहचान, उसकी लोकेशन, उसका मार्ग एवं स्पीड आस-पास मौजूद जहाजों और निगरानी करने वाली एजेंसियों को भेजता है। भारत के लिए जा रहे लाइबेरिया-ध्वज वाले तेल टैंकर के चालक दल ने संभवतः जहाज का AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था ताकि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अस्थिर समुद्री क्षेत्र में पकड़े जाने या ट्रैक होने से बच सके।
समुद्री VHF रेडियो सिस्टम होता है AIS
AIS ट्रांसपोंडर एक अनिवार्य समुद्री VHF रेडियो सिस्टम होता है, जो जहाज की जानकारी अन्य जहाजों और तटीय स्टेशनों तक भेजता है। इसका उद्देश्य टकराव से बचाव और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करना होता है। आमतौर पर जहाज 'गो डार्क' यानी अपनी पहचान प्रसारित करना बंद केवल असाधारण परिस्थितियों में ही करते हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार सुरक्षा और निगरानी के लिए AIS को सक्रिय रखना अनिवार्य है। हालांकि, संघर्ष वाले क्षेत्रों में जहाजों को अस्थायी रूप से अपने ट्रांसपोंडर बंद करने की अनुमति दी जाती है, ताकि उन्हें ट्रैक या निशाना न बनाया जा सके। ऐसा करने से युद्ध के दौरान जहाजों को हमलों से बचाने में मदद मिलती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले
इस सप्ताह की शुरुआत में मयूरी नारी नाम का एक थाई-ध्वज वाला बल्क कैरियर, जो भारत के कांडला बंदरगाह की ओर जा रहा था, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से गुजरते समय दो प्रोजेक्टाइल से टकरा गया। इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई। हमले के बाद जहाज के तीन क्रू सदस्य लापता हो गए, जबकि 20 अन्य को रॉयल थाई नेवी और ओमान के अधिकारियों ने बचा लिया। बाद में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संकेत दिया कि उसके लड़ाकों ने ही इस जहाज को निशाना बनाया था, जिसके बाद भारत ने इसकी आलोचना की।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना नहीं चाहते तेल टैंकर।
व्यापारिक जहाजों पर हमले की भारत ने की निंदा
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा, 'भारत इस बात की कड़ी निंदा करता है कि जारी संघर्ष के दौरान व्यावसायिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा रहा है।' भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल 28 भारतीय-ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। इनमें से 24 जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
खुद को चीन से जुड़ा हुआ बताने लगे हैं व्यावसायिक जहाज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 20 प्रतिशत है। दुनिया की बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) भी इसी रणनीतिक जलमार्ग से गुजरती है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में कम से कम 16 जहाजों पर हमला किया है। अब कुछ व्यावसायिक जहाज, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पर्शियन गल्फ के आसपास हैं, खुद को चीन से जुड़ा हुआ बताने लगे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, ऐसा उनके ऑपरेटरों द्वारा हमलों के जोखिम को कम करने के लिए किया जा रहा है। डेटा और एनालिटिक्स फर्म Kpler की ट्रेड रिस्क विश्लेषक एना सुबासिक के अनुसार, ईरान और उससे जुड़े समूह आमतौर पर चीन से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने से बचते हैं। इसकी वजह बीजिंग का अपेक्षाकृत तटस्थ रुख और तेहरान के साथ उसके मजबूत आर्थिक संबंध हैं।
