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80 एयरक्राफ्ट, 40 देश, 1500 जवान... कैसे आसमान में IAF की बढ़ती ताकत जयघोष कर रहा 'तरंगशक्ति'

राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर भारतीय वायुसेना (IAF) का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' शुरू हो गया है। इस अभ्यास में 40 देशों के 1,500 सैन्य जवान और 80 से अधिक आधुनिक एयरक्राफ्ट हिस्सा ले रहे हैं। पहली बार अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स भारतीय वायुसेना के सुखोई, तेजस और राफेल के साथ सामरिक मिशनों में उड़ान भरेंगे। आइए समझते हैं ये कैसे भारत की बढ़ती एयरपावर को दिखा रहा है।

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IAF के महाअभ्यास 'तरंग शक्ति' की खासियत (Newsroom Verified AI Image)
Authored by: निशांत तिवारी
Updated Sep 27, 2026, 13:35 IST
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Tarang Shakti 2026: राजस्थान के थार रेगिस्तान के ऊपर गरजते हुए सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों का शोर केवल वायुसेना का अभ्यास भर नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत के बदलते सामरिक कद की गूंज है। भारतीय वायुसेना (IAF) का अब तक का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' (Tarang Shakti 2026) जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस महाअभ्यास में लगभग 40 देश, 80 से अधिक आधुनिक एयरक्राफ्ट, 30 से अधिक विदेशी फाइटर जेट्स व ट्रांसपोर्ट प्लेन और करीब 1,500 सैन्य जवान एक ही छत के नीचे आ चुके हैं। अगले दो हफ्तों तक जोधपुर के आसमान में हजार से अधिक सॉर्टीज यानी उड़ानें भरी जाएंगी। आइए समझते हैं कि आखिर 'तरंग शक्ति' का यह दूसरा संस्करण इतना खास क्यों है और यह भारत की वैश्विक सामरिक स्थिति को कैसे मजबूत कर रहा है।

अमेरिकी F-35 का भारत में पहला सामरिक डेब्यू

'तरंग शक्ति 2026' का सबसे बड़ा आकर्षण अमेरिका का फिफ्थ जनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग II है। यह पहली बार है जब अमेरिकी F-35 फाइटर जेट्स भारतीय धरती पर किसी सामरिक युद्धभ्यास में सीधे भाग ले रहे हैं और भारतीय लड़ाकू विमानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उड़ान भर रहे हैं। अमेरिका ने इस अभ्यास के लिए अपने 6 F-35 जेट्स और 200 से अधिक एयरमेन जोधपुर भेजे हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस पर उत्साह जताते हुए X पोस्ट भी किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि "अमेरिकन एयरपावर जोधपुर पहुंच चुकी है! छह F-35 लाइटनिंग II और 200 से ज्यादा एयरमेन तरंग शक्ति में पहली बार भाग ले रहे हैं। अमेरिका के प्रीमियर फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट को भारतीय वायुसेना और हमारे साझेदार देशों के साथ उड़ते देखना बेहद रोमांचक है।"

दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों का जमावड़ा

जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन इस वक्त दुनिया के बेहतरीन सैन्य विमानों का गढ़ बना हुआ है। इस अभ्यास में सीधे तौर पर अपनी हवाई एसेट्स के साथ हिस्सा लेने वाले प्रमुख देशों में अमेरिका, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसमें विदेशों से आए दस्ते में अमेरिका के 6 F-35 स्टेल्थ फाइटर, फ्रांस के 7 राफेल, UAE के 6 F-16 जेट्स, रिफ्यूलिंग टैंकर (MRTT और KC-135) और ऑस्ट्रेलिया का C-130 हरक्यूलिस विमान। भारतीय वायुसेना का दस्ते की बात करें तो इसमें स्वदेशी तेजस (Tejas), सुखोई (Su-30 MKI), मिराज-2000 (Mirage-2000) और भारतीय राफेल जेट्स का विशाल समूह शामिल है।

फ्रांस के राजदूत थियरी माथौ (Thierry Mathou) ने भारत को फ्रांस का कोर स्ट्रैटेजिक पार्टनर बताते हुए कहा कि वरुण (नौसेना), गरुड़ (वायुसेना) और शक्ति (थलसेना) के बाद 'तरंग शक्ति' जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भागीदारी इंडो-पेसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, नियम-आधारित व्यवस्था और नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाती है।

'तरंग शक्ति' के दौरान आसमान में क्या-क्या होगा?

यह युद्धभ्यास सिर्फ विमान उड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक युद्ध रणनीति का एक जटिल परीक्षण है। अगले 15 दिनों में काउंटर-एयर ऑपरेशन्स, एयर डिफेंस और क्लोज कॉम्बैट, हवा में ईंधन भरना और इंटरऑपरेबिलिटी मिशन सेट पर अभ्यास किया जाएगा। इनको थोड़ा समझ लेते हैं।

काउंटर-एयर ऑपरेशन्स (Counter-Air Operations) में दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर उनके ठिकानों और फाइटर जेट्स को बेअसर करना, एयर डिफेंस व क्लोज कॉम्बैट (Dogfight) में आसमान में एक-दूसरे के खिलाफ काल्पनिक हवाई युद्ध (Dogfight) का अभ्यास, हवा में ईंधन भरना (Air-to-Air Refuelling) में रिफ्यूलिंग टैंकरों की मदद से उड़ान के दौरान ही फाइटर जेट्स में ईंधन भरकर लंबी दूरी के मिशन को अंजाम देना और इंटरऑपरेबिलिटी में अलग-अलग देशों के अलग-अलग रडार, सॉफ्टवेयर और कम्यूनिकेशन सिस्टम को एक साथ कॉर्डिनेशन में लाकर काम कराना शामिल है।

8 देश अपने एयर एसेट्स के साथ ले रहे भाग (चित्र साभार: Indian Airforce)

8 देश अपने एयर एसेट्स के साथ ले रहे भाग (चित्र साभार: Indian Airforce)

पहले संस्करण से कितना अलग है 'तरंग शक्ति 2026'?

भारतीय वायुसेना ने 'तरंग शक्ति' का पहला संस्करण साल 2024 में आयोजित किया था। उस समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे मित्र देशों के साथ विश्वास और सहयोग मजबूत करने की एक ऐतिहासिक पहल बताया था। 2024 में अमेरिका ने अपने ए-10 थंडरबोल्ट (A-10 Thunderbolt) विमान भेजे थे, लेकिन 2026 के इस संस्करण में सीधे फिफ्थ-जनरेशन F-35 स्टेल्थ फाइटर भेजकर अमेरिका ने यह संदेश दे दिया है कि भारत-अमेरिका रक्षा संबंध अब बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, यहां 7 प्रमुख देश प्रत्यक्ष रूप से अपनी वायुसेना के साथ भाग ले रहे हैं, वहीं दुनिया भर के 32 देश 'ऑब्जर्वर' के रूप में इस अभ्यास की रणनीतियों का अध्ययन करने के लिए भारत पहुंचे हैं।

एक साथ थल और नभ में भारत-अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन

दिलचस्प बात यह है कि 'तरंग शक्ति' के साथ-साथ राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिकी सेना का संयुक्त थलसेना अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' (Exercise Yudh Abhyas 2026) भी चल रहा है। हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और 10 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे ने महाजन में दोनों देशों का संयुक्त फायरपावर प्रदर्शन देखा। इस दौरान भारत की पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, धनुष आर्टिलरी सिस्टम, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार ने गरज दिखाई, तो वहीं अमेरिकी सेना ने अपने HIMARS (हाइमार्स) और M-LIDS एयर डिफेंस सिस्टम का जलवा दिखाया।

भारत का बढ़ता 'एयरपावर डिप्लोमेसी'

'तरंग शक्ति 2026' केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की 'एयरपावर डिप्लोमेसी' का एक बड़ा उदाहरण है। पूर्व से लेकर पश्चिम तक, दुनिया की अग्रणी वायुसेनाओं को एक ही मंच पर लाना और जटिल हवाई अभियानों का नेतृत्व करना यह साबित करता है कि भारतीय वायुसेना न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक प्रमुख धुरी के रूप में उभर चुकी है।

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