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क्या ट्रंप की हो गई जीत? संवर्धित यूरेनियम छोड़ने पर तैयार हुआ ईरान! जानिए कौन सी हैं तेहरान की 4 शर्तें

बताया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच इस बातचीत में सीजफायर 60 दिनों के लिए और बढ़ गया है। सीजफायर की इस बढ़ी हुई अवधि में दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर आगे बढ़ते हुए सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ट्रंप का कहना है कि डील को लेकर उनकी सऊदी अरब, यूएई, कतर सहित नौ देशों के साथ बातचीत हुई है।

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ईरान और यूएस के बीच हो सकती है डील। तस्वीर-AI

US-Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए शनिवार को कहा कि ईरान के साथ डील करीब-करीब पक्की हो गई है और इसके बारे में वह शीघ्र घोषणा की जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस डील में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खोला जाना भी शामिल है। हालांकि, इस बारे में उन्होंने कोई और ब्योरा नहीं दिया। इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बड़ा दावा किया। NYT ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप और एनवाईटी के दावे डील होने की संभावनाओं के संकेत तो दे रहे हैं लेकिन मौजूदा टकराव के ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर अभी स्पष्टता नहीं है। ट्रंप के इस बयान और एनवाईटी के दावे पर अभी ईरान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इजराइल की तरफ से भी इस पर अभी कोई बात नहीं कही गई है।

ईरान ने रखी हैं ये चार शर्तें

बताया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच इस बातचीत में सीजफायर 60 दिनों के लिए और बढ़ गया है। सीजफायर की इस बढ़ी हुई अवधि में दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर आगे बढ़ते हुए सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ट्रंप का कहना है कि डील को लेकर उनकी सऊदी अरब, यूएई, कतर सहित नौ देशों के साथ बातचीत हुई है। बता दें कि ईरान और अमेरिका की इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि डील के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं जिनमें चार प्रमुख हैं। ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने, अपनी जब्त संपत्तियों को जारी करने, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से खोलने की मांग की है। इन मांगों पर अमेरिका का क्या रुख अपनाने वाला है, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है।

क्या डील पर ट्रंप ने इजराइल को छोड़ दिया है?

इस समझौते के शुरुआती ड्राफ्ट में ईरान के खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल और घातक ड्रोन प्रोग्राम को रोकने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया है जो इजरायल के लिए सीधा और बड़ा रणनीतिक खतरा हैं। हैरान करने वाली बात है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए हो रही इस बातचीत में इजराइल कहीं नजर नहीं आ रहा है। वह एक तरह से खामोश है। सवाल है कि ट्रंप इस बातचीत में इजराइल को शामिल क्यों नहीं कर रहे हैं। इस युद्ध में वह भी उतना ही एक पक्ष है जितना कि अमेरिका और ईरान। क्योंकि बीते 28 फरवरी ईरान पर हमला अमेरिका और इजराइल दोनों ने मिलकर किया। दूसरा, एक बड़ा सवाल है कि इस डील में इजराइल एवं मध्य पूर्व की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए कौन से उपाय किए जा रहे हैं? लेबनान में हिज्बुल्ला सहित ईरान के प्रॉक्सीज को लेकर अमेरिका का क्या रुख रहने वाला है।

Mojtaba

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डील पर इजराइल का क्या रुख होगा?

अपनी सुरक्षा चिंताओं के समाधान के बगैर किसी डील पर इजराइल का रुख क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी। इस बीच, अमेरिका के वरिष्ठ राजनेता लिंडसे ग्राहम ने ईरान के साथ होने वाली इस डील को लेकर अमेरिका को आगाह किया है। वह इस डील को अमेरिका और इजराइल के हित में नहीं देख रहे। ग्राहम ने कहा है कि ईरान में मौजूदा रिजीम को बनाए रखने वाली डील दोनों देशों के हित में नहीं है क्योंकि यह डील ईरान को ताकतवर बनने के लिए समय देगी। इस समय उपयोग ईरान खुद को दोबारा खड़ा करने और सैन्य रूप से ज्यादा मजबूत बनाने में करेगा। सैन्य एवं आर्थिक रूप से ज्यादा ताकतवर ईरान अपने प्रॉक्सीज के जरिए इजराइल और खाड़ी के देशों के लिए मुसीबतें और संकट खड़ी करेगा। यही नहीं, इससे लेबनान में हिज्बुल्ला और इराक में शिया मिलिशिया दोनों ताकतवर होंगे। ग्राहम जैसी चिंता कमोबेश इजराइल और खाड़ी देशों की भी है। उन्हें भी लगता है कि युद्ध से एक बार निकलने के बाद ईरान इलाके में अस्थिरता और संकट की वजह बन सकता है।

एक पेज पर नहीं ट्रंप-नेतन्याहू?

एक्सियोस ने दो इजरायली सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान के साथ आगे कैसे निपटा जाए इस पर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच साफ तौर पर मतभेद हैं। हालांकि ट्रंप ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि नेतन्याहू 'वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहता हूं' और साथ ही यह भी कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री 'बहुत अच्छे इंसान' हैं। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौता 'काफी हद तक तय हो गया है' और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। इसके बाद संभावना बन रही है कि ईरान युद्ध शायद अब फिर से शुरू ना हो।

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डील या युद्ध की 50/50 संभावना -एक्सियोस

इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि डील नहीं होने की सूरत में ट्रंप दोबारा युद्ध शुरू कर सकते हैं। ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और संभवतः रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया प्रतिष्ठान एक्सियोस से कहा कि इस बात की पूरी तरह से 50/50 संभावना है कि वह कोई अच्छा सौदा कर पाएंगे या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात करेंगे। फिलहाल ओहायो में मौजूद उपराष्ट्रपति जे डी वेंस संभवतः बैठक में शामिल होने के लिए वाशिंगटन लौटेंगे। इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर शांति समझौते के पहलुओं पर वार्ताकारों से चर्चा करने के लिए तेहरान में हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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