एक्सप्लेनर्स

क्या आप बनारसी हैं? बाबा विश्वनाथ का दर्शन हुआ आसान, मंदिर में काशीवासियों की होगी 'स्पेशल एंट्री'; जान लें नियम

Special Gift for Varanasi Residents: वाराणसी के शिवभक्तों को सावन के पहले बड़ी सौगात मिली है। अब काशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों को अलग एंट्री मिलेगी। स्थानीय लोगों के लिए अलग से रास्ता बनाया गया है। जिसके जरिए वो सुगमता पूर्वक बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर सकेंगे। पढ़ें क्या है नियम...।

Image

अब काशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों को मिलेगी अलग एंट्री।

Photo : Times Now Digital

Kashi Vishwanath Mandir: क्या आप काशी के वासी है? अगर हां, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय लोगों के लिए अलग गेट का इंतजाम कर दिया गया है। सावन से पहले काशीवासियों को बड़ी सौगात मिली है। सावन में बाबा भोले का दर्शन पाने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवभक्तों का हुजूम देखने को मिलता है। बीते लंबे समय से ये मांग वाराणसी के स्थानीय लोगों द्वारा की जा रही थी। अब उनकी मांग मंजूर कर ली गई है। आपको इस लेख में सबकुछ तफसील से समझाते हैं।

सावन से पहले काशीवासियों को बड़ी सौगात

काशी के शिवभक्तों को सावन के पहले बड़ी सौगात मिली है। अब काशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों की अलग एंट्री होगी। बनारस के स्थानीय लोगों के लिए अलग रास्ता बनाया गया है। स्थानीय लोग काशीद्वार से होकर मंदिर में प्रवेश करेंगे। मंदिर के गेट नंबर 4 के पास अलग एंट्री पॉइंट बनाया गया है। मंदिर में काशीवासियों के लिए लंबे समय से अलग गेट बनाने की मांग उठ रही थी। मंदिर में भीड़ बढ़ने से काशीवासियों को दर्शन में परेशानी हो रही थी। अब बनारस के लोगों की इस मुश्किल का हल निकल गया है।

kashi vishwanath

काशी विश्वनाथ धाम।

इस सुविधा का लाभ पाने के लिए क्या हैं नियम?

काशी के लोगों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए अलग से एक द्वार बनाया गया है, जहां से आईडी कार्ड देखकर लोगों को एंट्री दी जाएगी। आसान शब्दों में समझा जाए तो सिर्फ परिचय पत्र दिखाकर बनारस के लोग बाबा के सुगम दर्शन कर सकेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिल रही है। बाबा के दरबार में सुगमता और बढ़ी हुई सुविधाओं के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में अगर आप काशी से ताल्लुक रखते हैं तो अपना परिचय पत्र साथ ले जाएं और उसे दिखाकर अलग गेट से मंदिर में प्रवेश पा सकते हैं।

इस साल कितने श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन?

जानकारी के अनुसार 1 जनवरी से 31 मई 2024 तक 2,86,57,473 भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। साल 2023 में इस समय सीमा के दौरान 1,93,32,791 लोगों ने दर्शन किए थे। पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक 93,24,682 श्रद्धालु अधिक पहुंचे हैं। मतलब साफ है, भीड़ लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए काशीवासियों की मांग को मंजूरी दे दी गई है।

Kashi Vishwanath Mandir

काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक KVM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया था। काशी कॉरिडोर बनने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को गलियों और संकरे रास्तों से गुजरना नहीं पड़ता है। श्रद्धालु गंगा घाट से कॉरिडोर के रास्ते सीधे बाबा विश्‍वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करने आते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर (KVM) भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।

काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी खास बातें

वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर सातवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान भोलेनाथ के विश्वनाथ यानी विश्वेश्वर रूप को समर्पित है। काशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस जगह भगवान शिव स्वंय निवास करते हैं। काशी भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय स्थान है। भारत के कोने-कोने से भोलेनाथ के भक्त बाबा विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। सावन के महीने में इस मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। पौराणिक मान्यता है कि काशी में जिन लोगों की मृत्यु होती है, उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है।

काशी विश्वनाथ में कितने बजे से शुरू होता है दर्शन?

बाबा विश्वनाथ मंदिर के कपाट मध्यरात्रि को 2 बजकर 30 मिनट पर खुल जाते हैं, लेकिन दर्शन करने का समय सुबह 4 बजे से शुरू होता है। सुबह 4 बजे से लेकर रात के 11 बजे तक मंदिर खुला रहता है। रात के समय में शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। जिन लोगों को मंगल आरती में शामिल होना होता है, वो लोग सुबह 3 बजे से मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।

बाबा विश्वनाथ आरती का समय (kashi Vishwanath Temple Aarti Timings)

आरतीसमय
मंगला आरतीसुबह 3:00 से 4:00 बजे तक
भोग आरतीसुबह 11:15 से दोपहर 12:20 बजे तक
सप्त ऋषि आरतीशाम 7:00 से रात 8:15 बजे तक
संध्या आरतीरात 9:00 से 10:15 बजे तक
शयन आरतीरात 10:30 से 11:00 बजे तक

काशी विश्वनाथ आरती बुकिंग

बाबा विश्वनाथ मंदिर में आरती देखने के लिए आप ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं। स्पेशल आरती में भाग लेने के लिए आप बाबा विश्वनाथ मंदिर के ओफिशियल वेबसाइट पर जाकर बुक सकते हैं। इसके साथ ही आप मंदिर ट्रस्ट की ऑफिशल वेबसाइट https://www.shrikashivishwanath.org/ लिंक पर क्लिक करके आरती की बुकिंग कर सकते हैं।

सावन से पहले अब काशीवासियों को बड़ा तोहफा मिल गया है, जाहिर है पिछले कई सालों की तुलना में इस बार श्रावण मास में बनारस के स्थानीय लोग बाबा विश्वनाथ का दर्शन सुगमता पूर्वक कर सकेंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article