Explainer: क्या है संसदीय कार्रवाई का रूल नंबर 349? जिस पर लोकसभा में भिड़ गए राहुल-राजनाथ
- Curated by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 2, 2026, 08:05 PM IST
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के प्रस्तावित संस्मरण का जिक्र किया। जिस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस पुस्तक का वो हवाला दे रहे हैं वह अभी अप्रकाशित है और उसका हवाला देना नियमों के विरुद्ध है। सत्तापक्ष ने कहा कि वे संसदीय कार्यवाही के रूल 349 का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया कि आखिर रूल 349 है क्या, और संसद में इसकी भूमिका क्यों इतनी अहम मानी जाती है।
क्या है संसदीय कार्यवाही का रूल नंबर 349?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सोमवार को लोकसभा में तीखी राजनीतिक तनातनी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के प्रस्तावित संस्मरण से जुड़े कुछ अंशों का हवाला दिए जाने के बाद सदन का माहौल गरमा गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसका विरोध जताया और फिर सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। इसके बाद सत्ता पक्ष और कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। पूरे घटनाक्रम के दौरान सत्तापक्ष ने संसदीय कार्यवाही के रूल 349 का हवाला देते हुए ऐसे संदर्भों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर इसके उल्लंघन का आरोप लगाया। ऐसे में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि संसदीय कार्यवाही को चलाने के नियम क्या होते हैं। इसके अलावा जिस रूल नंबर 349 की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वो आखिर क्या है और इसमें क्या निर्देश दिए गए हैं।
सबसे पहले जानें लोकसभा में क्या हुआ
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा जनरल नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने पर भारी हंगामा हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस नेता पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को कई बार रोका। इस दौरान सत्ता पक्ष ने कहा कि राहुल गांधी ने संसदीय कार्यवाही के रूल नंबर 349 का उल्लंघन किया। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और आखिर में चार बजे के करीब दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राहुल गांधी
अब जान लें क्या है संसदीय कार्यवाही का नियम 349
संसद में संसदीय कार्यवाही को सुचारू और शांति पूर्वक चलाने के लिए नियम बनाए गए हैं। चाहे राज्यसभा हो या लोकसभा दोनों सदनों के सभी सदस्यों को इनका पालन करना अनिवार्य है। ये लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों के लिए अलग-अलग हैं। इन्ही में से एक रूल 349 भी है। लोकसभा के Rules of Procedure and Conduct of Business का हिस्सा है। यह नियम तय करता है कि सदन के भीतर किसी सदस्य द्वारा किन बातों,दस्तावेजों या संदर्भों का उल्लेख किया जा सकता है और किनका नहीं। सरल शब्दों में कहें तो रूल 349 संसद में बोले जाने वाले शब्दों और उद्धृत किए जाने वाले दस्तावेजों पर 'फिल्टर'का काम करता है।इस नियम के तहत सदन में कोई भी सदस्यरूल 349 के तहत क्या प्रतिबंधित है?
इस नियम के अनुसार कोई भी सांसद सदन में अप्रकाशित दस्तावेजों जैसे ड्राफ्ट रिपोर्ट, अप्रकाशित संस्मरण, निजी डायरी,पत्र या नोट्स का हवाला नहीं दे सकता। इनमें ऐसे दस्तावेज भी हैं जो आधिकारिक रूप से सार्वजनिक न हों। ऐसे संदर्भ जो सदन के पटल पर रखे नहीं गए हों। सरल शब्दों में कहें तो अगर कोई दस्तावेज जो संसद के रिकॉर्ड में शामिल नहीं है या सरकार या स्पीकर द्वारा अधिकृत नहीं है तो उसका उल्लेख नियम विरुद्ध माना जाता है। इसके अलावा, संवेदनशील संस्थाओं जैसे सेना, खुफिया एजेंसियां, न्यायपालिका या संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से जुड़ी अप्रमाणित बातें उनका जिक्र रोका जा सकता है।

लोकसभा।
यह नियम क्यों जरूरी है?
- अफवाह और अटकलों पर रोक- संसद में कही गई हर बात सार्वजनिक रिकॉर्ड बनती है। अप्रमाणित जानकारी से भ्रम फैल सकता है।
- संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा- सेना या संवैधानिक पदों से जुड़ी निजी या अधूरी जानकारी राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
- बहस को तथ्यों तक सीमित रखना ताकि चर्चा भावनाओं व्यक्तिगत आरोपों या अधूरी सूचनाओं के बजाय प्रमाणिक तथ्यों पर हो।
उल्लंघन होने पर स्पीकर के पास क्या अधिकार
इस नियम को लागू करने का पूरा अधिकार लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास होता है। स्पीकर यह तय करते हैं कि कोई संदर्भ नियमों के दायरे में है या नहीं, बहस को आगे बढ़ने देना है या रोकना है। अगर रूल 349 का उल्लंघन हो तो स्पीकर के पास कई विकल्प होते हैं। स्पीकर संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा सकते हैं, सांसद को बोलने से रोक सकते हैं, सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए कार्यवाही स्थगित कर सकते हैं। यह सब स्पीकर के विवेकाधिकार में आता है।रूल 349 के तहत इन पर भी प्रतिबंध
रूल 349 के तहत कुछ और भी चीजें हैं जो प्रतिबंधित हैं, उनके अनुसार
- किसी सदस्य को बोलने से रोकने के लिए हंगामा करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
- भाषण दे रहे सदस्य के सामने से होकर गुजरना वर्जित है। यह सदन की शिष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा है।
- दूसरे सदस्य के बोलते समय व्यवधान डालना मना है। चाहे वह सीट से टिप्पणी करना हो,हूटिंग करना हो या तंज कसना
- सदन में नारेबाजी की अनुमति नहीं होती।
- संसद भवन परिसर में असंबंधित सामग्री का वितरण प्रतिबंधित है। कोई भी पैम्फलेट,प्रेस नोट,पर्चा या सवाल-जवाब वाली सामग्री तभी बांटी जा सकती है,जब वह सीधे तौर पर संसदीय कार्य से जुड़ी हो।