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शेयर बाजार सुस्त, फिर भी IPO की बंपर डिमांड, अगस्त में $10 अरब के रिकॉर्ड की तैयारी

शेयर बाजार में भले ही पिछले 6 महीने से सुस्ती का दौर जारी है। लेकिन, प्राइमरी मार्केट में जोरदार एक्शन है। अगस्त में प्राइमरी मार्केट से कंपनियां रिकॉर्ड 10 अरब डॉलर जुटाने जा रही हैं।

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आईपीओ बाजार में मजबूत ट्रेंड

IPO Market : भारतीय शेयर बाजार में इस साल भले ही तेजी की रफ्तार कमजोर रही हो, लेकिन कंपनियों के लिए शेयर बेचकर पैसा जुटाने का बाजार जोरदार तरीके से चल रहा है। अगस्त 2026 में अब तक करीब 10 अरब डॉलर के इक्विटी सौदे प्राइस हो चुके हैं। अगर यही रफ्तार बनी रही तो अगस्त भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़े महीनों में शामिल हो सकता है। इस उछाल की सबसे बड़ी वजह घरेलू निवेशकों के पास मौजूद भारी लिक्विडिटी और नई शेयर बिक्री में उनकी मजबूत दिलचस्पी है।

इस महीने के बड़े सौदों में सरकार की LIC में 3.2 अरब डॉलर की हिस्सेदारी बिक्री सबसे प्रमुख रही। संस्थागत निवेशकों से मिली जबरदस्त मांग के बाद सरकार ने एलआईसी ऑफर में ग्रीनशू विकल्प का इस्तेमाल करते हुए बिक्री का आकार बढ़ाया। संस्थागत निवेशकों ने बेस इश्यू के मुकाबले 3.32 गुना बोली लगाई थी।

मणिपाल हेल्थ का बड़ा IPO

इक्विटी बाजार में इस महीने की तस्वीर केवल सरकारी हिस्सेदारी बिक्री तक सीमित नहीं है। मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का करीब 958 मिलियन डॉलर का आईपीओ भी बड़ी डील में शामिल रहा। कंपनी ने IPO से पहले एंकर निवेशकों से करीब 4,167 करोड़ रुपये जुटाए थे। उसके करीब 9,275 करोड़ रुपये के IPO में घरेलू और विदेशी बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी रही। मणिपाल हेल्थ के इश्यू की एक खास बात यह भी रही कि कंपनी ने बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए अपने वैल्यूएशन को पहले बताए गए स्तर से नीचे रखा। इससे संकेत मिला कि बड़े इश्यू लाने वाली कंपनियां निवेशकों की मौजूदा सावधानी को ध्यान में रखकर कीमत तय करने को तैयार हैं।

शेयर बाजार और IPO के बीच दिखा बड़ा अंतर

भारत का करीब 5.1 ट्रिलियन डॉलर का सेकेंडरी मार्केट इस साल अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। बेंचमार्क निफ्टी पचास भी लंबे समय के नजरिए से बहुत मजबूत बढ़त नहीं दिखा पाया है। लेकिन इसके विपरीत नई लिस्टिंग में निवेशकों का उत्साह बना हुआ है। अगस्त में लिस्ट हुई 24 कंपनियों में से चार को छोड़कर बाकी सभी शेयर अपने आईपीओ भाव से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। यह बताता है कि निवेशक पूरे बाजार में एक साथ पैसा लगाने के बजाय चुनिंदा नए बिजनेस और IPO में मौके तलाश रहे हैं। यही वजह है कि सेकेंडरी मार्केट में सुस्ती के बावजूद प्राइमरी मार्केट में कंपनियां बड़ी रकम जुटाने में सफल हो रही हैं। बाजार में आने वाले हर नए इश्यू को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया अब केवल ओवरऑल इंडेक्स की दिशा पर निर्भर नहीं है, बल्कि कंपनी के बिजनेस मॉडल, कमाई और वैल्यूएशन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

NSE और जियो प्लेटफॉर्म्स पर नजर

अगस्त की मजबूत डीलमेकिंग आने वाले महीनों के लिए भी बड़ा संकेत है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसे बड़े संभावित इश्यू बाजार की इस क्षमता की अगली बड़ी परीक्षा होंगे। अगर इन कंपनियों के संभावित बड़े ऑफर को भी घरेलू संस्थागत और रिटेल निवेशकों से इसी तरह मजबूत मांग मिलती है तो 2026 भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट के लिए नया रिकॉर्ड साल बन सकता है। फिलहाल तस्वीर साफ है कि शेयर बाजार की चाल भले ही सुस्त हो, लेकिन नई कंपनियों और बड़े इश्यू में पैसा लगाने को लेकर निवेशकों की भूख कम नहीं हुई है। अगस्त में करीब 10 अरब डॉलर की डील इसका सबसे बड़ा संकेत है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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