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खूब सारा पैसा, घर और जिंदगीभर टैक्स फ्री! बच्चा पैदा करने के लिए किस देश की सरकार क्या-क्या दे रही ऑफर?

Birth Rate Crisis: दुनिया के कई देशों में घटती जन्मदर सरकारों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। इसी वजह से दक्षिण कोरिया, जापान, रूस, चीन और हंगरी जैसे देश लोगों को बच्चा पैदा करने पर नकद पैसा, टैक्स छूट, मुफ्त शिक्षा और घर जैसी सुविधाएं दे रहे हैं।

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क्यों घट रही है दुनिया में जन्मदर? (Photo: AI Generated)

Birth Rate Crisis: दुनिया के कई देशों में आबादी तेजी से कम हो रही है। वहां जन्मदर लगातार गिर रही है, जिसकी वजह से सरकारें चिंतित हैं। कम बच्चे पैदा होने का असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था, काम करने वाली आबादी और बुजुर्गों की देखभाल पर पड़ सकता है। इसी समस्या से निपटने के लिए कई देशों ने लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए खास योजनाएं शुरू की हैं। कहीं सरकार नकद पैसा दे रही है, तो कहीं टैक्स में छूट, मुफ्त शिक्षा और घर जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

दक्षिण कोरिया: सबसे बड़ा बेबी बोनस

दक्षिण कोरिया में दुनिया की सबसे कम जन्मदर मानी जाती है। यहां सरकार बच्चे (Baby Bonus Countries) के जन्म पर परिवारों को आर्थिक मदद देती है। बच्चे के जन्म के बाद एकमुश्त रकम दी जाती है और कई सालों तक हर महीने भत्ता भी मिलता है। कुछ निजी कंपनियां भी कर्मचारियों को बच्चा होने पर लाखों रुपये का बोनस दे रही हैं। इसके अलावा सस्ते लोन, टैक्स छूट और डे-केयर जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

हंगरी: चार बच्चों पर जिंदगीभर टैक्स माफ

हंगरी ने आबादी बढ़ाने के लिए बेहद अलग तरीका अपनाया है। यहां शादीशुदा जोड़ों को कम ब्याज पर बड़ा लोन दिया जाता है। अगर परिवार में तीन बच्चे हो जाते हैं, तो सरकार पूरा लोन माफ कर देती है। वहीं जिन महिलाओं के चार या उससे ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें जीवनभर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।

(Photo: iStock)

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जापान: नकद मदद और मुफ्त शिक्षा

जापान में कई गांव और स्कूल खाली होते जा रहे हैं क्योंकि वहां बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। इसे रोकने के लिए सरकार परिवारों को हर महीने आर्थिक सहायता देती है। कई शहरों में हर बच्चे के जन्म पर अलग-अलग बोनस दिया जाता है। इसके साथ बच्चों की पढ़ाई को सस्ता या मुफ्त बनाने की कोशिश भी की जा रही है।

रूस: ज्यादा बच्चों पर सम्मान और इनाम

रूस भी लंबे समय से कम होती आबादी की समस्या से जूझ रहा है। यहां 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को “मदर हीरोइन” सम्मान दिया जाता है। साथ ही उन्हें बड़ी नकद राशि भी मिलती है। कुछ इलाकों में युवा छात्राओं को बच्चा पैदा करने पर अलग से बोनस दिया जा रहा है। सरकार दूसरे और तीसरे बच्चे पर परिवारों को आर्थिक सहायता भी देती है।

चीन: वन चाइल्ड पॉलिसी से अब ज्यादा बच्चों को बढ़ावा

एक समय चीन में सिर्फ एक बच्चा पैदा करने की नीति लागू थी। लेकिन अब वहां कम होती आबादी चिंता का कारण बन गई है। इसलिए कई शहरों में तीसरे बच्चे पर नकद मदद दी जा रही है। सरकार माता-पिता के लिए पेड लीव बढ़ा रही है और बड़े परिवारों को घर खरीदने में भी मदद दे रही है।

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नॉर्डिक देश भी पीछे नहीं

फिनलैंड और एस्टोनिया जैसे देशों में भी सरकारें परिवारों को कई सुविधाएं दे रही हैं। फिनलैंड में बच्चे के जन्म पर “बेबी बॉक्स” दिया जाता है, जिसमें जरूरी सामान होता है। कुछ इलाकों में नकद बोनस भी दिया जाता है। एस्टोनिया में ज्यादा बच्चों वाले परिवारों को हर महीने ज्यादा आर्थिक मदद मिलती है।

भारत में भी दिखने लगा यह ट्रेंड

अब भारत के कुछ हिस्सों में भी इस तरह की योजनाओं की चर्चा शुरू हो गई है। आंध्र प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि तीसरे और चौथे बच्चे पर परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका मकसद राज्य में जन्मदर को संतुलित बनाए रखना है।

आखिर क्यों दे रही हैं सरकारें ये ऑफर?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी देश में जन्मदर बहुत कम हो जाए तो भविष्य में काम करने वाले लोगों की संख्या घट जाती है। इससे अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है और बुजुर्गों की देखभाल का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए कई देश अब लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। दुनिया भर में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में और भी देश ऐसी योजनाएं शुरू कर सकते हैं।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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