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विपक्षी दलों को केजरीवाल ने कर दिया कन्फ्यूज, 'INDIA' का क्या होगा? समझें सियासत

Lok Sabha Elections 2024: अरविंद केजरीवाल बार-बार ये संकेत दे रहे हैं कि विपक्षी दलों के गठबंधन से उन्हें कोई खास लेना-देना नहीं है, तभी तो वो खुद ही ऐलान कर रहे हैं कि इस राज्य में इतने सीट पर लड़ेंगे, पंजाब की सभी सीटों पर लड़ेंगे। जबकि INDI गठबंधन ने अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की।

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लोकसभा चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल का प्लान।

Photo : Times Now Digital

Kejriwal Plan For Lok Sabha Chunav: एक तरफ केजरीवाल विपक्षी दलों के गठबंधन 'INDIA' से बगावत के मूड में नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी पार्टी ये दावा कर रही है कि आम आदमी पार्टी वो गठबंधन के साथ खड़ी है। हालांकि लोकसभा चुनाव के पहले सियासी महकमों में इस बात की हलचल तेज हो चुकी है कि ममता बनर्जी, नीतीश कुमार के बाद क्या अब दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी विपक्षी खेमे को गच्चा देंगे?

आखिर क्या है केजरीवाल का असल प्लान?

पंजाब, दिल्ली, हरियाणा की लोकसभा सीटों पर केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने नजर गड़ाए रखी है। पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं, जहां AAP ने इस बात की घोषणा कर दी है कि सभी सीटों पर वो अकेले ही ताल ठोकेगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि केजरीवाल के इस फैसले के चलते कांग्रेस से कलेश होना तय है। वहीं कहा ये जा रहा है कि दिल्ली की 7 लोकसभी सीटों पर कांग्रेस और आप के बीच समझौता हो चुका है। वहीं हरियाणा की 10 सीटों में से ज्यादातर सीटों पर केजरीवाल की पार्टी चुनाव लड़ने की चाहत बयां कर रही है। आप ने पहले ही ये ऐलान कर दिया है कि वो राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

केजरीवाल के बयान के क्या हैं सियासी मायने?

विपक्षी गठबंधन में सभी क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस से खफा-खफा नजर आ रही हैं। पहले ही ममता बनर्जी की टीएमसी और नीतीश कुमार की जदयू ने INDIA को गच्चा दे दिया, अब केजरीवाल के भी तेवर ऐसे ही दिख रहे हैं। अखिलेश यादव भले ही कांग्रेस के साथ होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बीते दिनों चले जुबानी जंग से ये कहा जा सकता है कि वो भी अपनी अलग राह चुनने के बारे में सोच सकते हैं। इन सबके बीच अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में ये घोषणा की कि उनकी पार्टी अगले 10-15 दिन में राज्य की सभी 13 लोकसभा सीट और एकमात्र चंडीगढ़ संसदीय सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी।

केजरीवाल की ये घोषणा कांग्रेस पार्टी के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है। आप और कांग्रेस के बीच का मनमुटाव किसी से नहीं छिपा है, ऐसे में केजरीवाल एक के बाद एक नया झटका दे रहे हैं। हालांकि सीएम केजरीवाल कांग्रेस के खिलाफ अडिग मोड में हैं, तो विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए उनकी नरमी देखी जा सकती है।

AAP ने कहा- हम INDI गठबंधन के साथ खड़े हैं

आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बात पर जोर दिया कि वह पूरी मजबूती से विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के साथ खड़ी है। इतना ही नहीं AAP ने कांग्रेस से सीट बंटवारे पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया और पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने के कदम का बचाव करते हुए कहा कि दोनों पार्टियों की स्थानीय इकाइयां लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ना चाहती हैं।

इन राज्यों में कांग्रेस की टेंशन बढ़ाएंगे केजरीवाल

केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने पहले दिल्ली, गुजरात, गोवा और हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन का आह्वान किया था। बयान में कहा गया है, 'इसलिए हमने इसका सम्मान करने का फैसला किया है। अन्य राज्यों के संबंध में बातचीत जारी है।' दिल्ली और पंजाब में सत्तारूढ़ ‘आप’ ने कहा, 'हम दृढ़ता से गठबंधन के साथ खड़े हैं। हमारा साझा लक्ष्य भाजपा को हराना है। यदि लक्ष्य भाजपा को हराना है तो समय सबसे महत्वपूर्ण है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि कांग्रेस जल्द से जल्द सीट-बंटवारे की बातचीत को अंतिम रूप देगी।'

इशारों-इशारों में केजरीवाल चल रहे ऐसी चाल?

लोकसभा चुनाव नजदीक है, अरविंद केजरीवाल के बदलते तेवर से कहीं खुद कांग्रेस ही INDIA गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ने के बारे में न सोचने लगे। अगर ऐसा हुआ तो भी हैरानी नहीं होगी। केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ने ये बात समझ लिया है कि 2024 का वक्त ऐसा है कि खुद का जितना विस्तार कर सकते हैं, वो फायदेमंद होगा। केजरीवाल के एक-एक कदम से पूरा विपक्ष कन्फ्यूज हो गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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